अयोध्या में सावन झूला मेले का आगाज, रामनगरी में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे, 28 अगस्त तक सजेगी झूलन विहार की छटा
Ayodhya Sawan Mela: रामनगरी अयोध्या धाम में श्रद्धालुओं का महाकुंभ माना जाने वाला प्रसिद्ध सावन झूला मेला शनिवार से पूर्ण श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। 15 से 28 अगस्त तक चलने वाले इस 14 दिवसीय धार्मिक उत्सव के पहले दिन मणिपर्वत पर भगवान श्रीराम और माता सीता का भव्य झूला विहार आयोजित हुआ। इस पावन अवसर पर अयोध्या धाम के विभिन्न मंदिरों से 11 भव्य झांकियां पारंपरिक रास्तों से होते हुए मणिपर्वत पहुंचीं। पूरे मेला अवधि के दौरान 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के रामनगरी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मंदिरों के शहर में उत्सव की छटा
लगभग 5000 से अधिक छोटे-बड़े मंदिरों वाली पावन अयोध्यापुरी के प्रमुख स्थानों— श्रीराम जन्मभूमि, कनक भवन, राजा दशरथ महल, अशर्फी भवन, राम वल्लभा कुंज, दिव्या कला कुंज, विअहुति भवन, रंग महल, जानकी महल, राज सदन, रूप कला कुंज और मणिराम दास जी की छावनी में इस उत्सव की अद्भुत आभा देखते ही बन रही है।
6 जोन और 29 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र
मेले के सुचारू संचालन के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 6 जोन और 29 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जिसमें अकेले मणिपर्वत क्षेत्र को 1 जोन और 5 सेक्टरों में बांटा गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव ग्रोवर ने बताया कि सावन झूला मेला श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का प्रतीक है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन के जरिए सतत निगरानी रखी जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी अधिकारी पूरी तरह सतर्क हैं।
एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी के अनुसार मेले की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बल तैनात किया गया है। इनमें 7 अपर पुलिस अधीक्षक, 30 पुलिस उपाधीक्षक, 60 निरीक्षक, 275 उपनिरीक्षक, 30 महिला उपनिरीक्षक, 150 हेड कांस्टेबल, 800 कांस्टेबल, 25 महिला हेड कांस्टेबल और 80 महिला कांस्टेबल शामिल हैं। इनके अलावा पीएसी की 10 कंपनियां (बाढ़ राहत दल सहित), आरएएफ की 2 कंपनियां, एटीएस कमांडो की 1 टीम और एसडीआरएफ की 2 टीमों को भी तैनात किया गया है। 30 हल्के वाहन चालक, 30 ड्रैगन लाइटें और 2 ड्रोन कैमरे भी लगाए गए हैं।
त्रेतायुग से चली आ रही है झूलन की परंपरा
स्थानीय संतों के अनुसार, सावन झूला मेला मनाने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि रामलला के जन्म के चार महीने बाद माता कौशल्या ने राजा दशरथ की अन्य रानियों के साथ मिलकर रामलला और उनके भाइयों को झूला झुलाया था और कजरी गीत गाए थे। यही परंपरा आज भी अयोध्या के मंदिरों में जीवंत है, जहां सावन के पूरे महीने प्रभु श्रीराम को सुंदर वस्त्रों व आभूषणों से सजाकर प्रतिदिन झूला झुलाया जाता है।
रामलला के दर्शन और कुबेर टीला पर झूलन विहार
राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि इस बार सावन झूला मेले के दौरान पहली बार आम श्रद्धालुओं को रामलला को झूला झुलाने का अवसर देने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। राम मंदिर के अनुष्ठान प्रभारी और मेला व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्र के अनुसार सुरक्षा कारणों से सावन उत्सव के दौरान रामलला का झूला कुबेर टीला ले जाया जाएगा, जहां झूलन विहार समारोह संपन्न होगा। इस दौरान प्रतिदिन विभिन्न मंदिरों से देवी-देवताओं की शोभायात्राएं निकलेंगी, जिनका समापन मणिपर्वत पर सांस्कृतिक आयोजनों के साथ होगा।

