राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!
Ram Mandir priest dress code: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजित रामलला की सेवा-पूजा कर रहे पुजारियों की वेशभूषा (ड्रेस कोड) में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा नवगठित 'धार्मिक न्यास समिति' की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया है। अब राम मंदिर के पुजारी सिलाई किए हुए वस्त्रों के बजाय बिना सिले वस्त्र (धोती और दुपट्टा/अंगवस्त्र) धारण करके ही पूजा-पाठ करेंगे।
क्यों बदला गया ड्रेस कोड?
इससे पहले ट्रस्ट की ओर से पुजारियों के लिए पीले रंग की सिलाई वाली चौबंदी (कुर्ता/अंगरखा), सफेद धोती और पगड़ी तय की गई थी, जिस पर तीर्थ क्षेत्र का मोनोग्राम भी छपा हुआ था। हाल ही में हुई धार्मिक न्यास समिति की पहली बैठक में संतों ने इस पर आपत्ति जताई। संतों का तर्क था कि सिलाई वाले वस्त्र पहनना अयोध्या की प्राचीन वैष्णव परंपरा के प्रतिकूल है।
संतों का सुझाव : गर्भगृह में प्रभु की सेवा के दौरान पुजारियों को पूर्णतः वैष्णव मर्यादा के अनुसार केवल बिना सिले वस्त्र ही धारण करने चाहिए। संतों के इस मार्गदर्शन को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
रोस्टर बदलाव के साथ नई व्यवस्था प्रभावी
बदला हुआ ड्रेस कोड सावन शुक्ल प्रतिपदा (13 अगस्त) से पूरी तरह लागू कर दिया गया है। रामलला के पुजारियों की ड्यूटी का रोस्टर हर माह अमावस्या और पूर्णिमा को बदलता है। सावन कृष्ण अमावस्या तक जो पुजारी सुबह की पाली में थे, वे प्रतिपदा से शाम की पाली में आ गए हैं और नई वेशभूषा के साथ अपनी सेवा दे रहे हैं।

