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श्राद्ध पक्ष 2026: पितृपक्ष में भरणी श्राद्ध कब रहेगा क्या है इसका महत्व?

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वर्ष 2026 में महा भरणी श्राद्ध 29 सितंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह तिथि तब तय होती है जब पितृपक्ष के दौरान अपराह्न काल (दोपहर के समय) में 'भरणी नक्षत्र' व्याप्त रहता है। पितृपक्ष 2026 में भरणी श्राद्ध (महा भरणी श्राद्ध): तारीख और महत्व। पितृपक्ष में 'भरणी श्राद्ध' (जिसे महा भरणी श्राद्ध भी कहा जाता है) का विशेष धार्मिक महत्व है। 

भरणी श्राद्ध 2026 | Bharani shraddha 2026

1. जब‍ किसी तिथि विशेष को अपराह्न काल के दौरान भरणी नक्षत्र होता है तब इसे भरणी श्राद्ध कहते हैं।
2. पंचमी के दिन भरणी नक्षत्र रहेगा तब भरणी श्राद्ध का महत्व रहेगा। मृत्यु के प्रथम वर्ष के बाद भरणी श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।
3. पंचमी तिथि को श्राद्ध करने वाला उत्तम लक्ष्मी की प्राप्ति करता है।
4. जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई है उका पंचमी को श्राद्ध करते हैं। इसीलिए इसे कुंवारा पंचमी भी कहते हैं।
5. जो लोग जीवन भर कोई भी तीर्थ यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए मातृगया, पितृगया, पुष्कर तीर्थ और बद्रीकेदार आदि तीर्थों पर भरणी श्राद्ध किया जाता हैं।
 

भरणी श्राद्ध का महत्व

यमराज से जुड़ाव: भरणी नक्षत्र के स्वामी भगवान यमराज (मृत्यु के देवता) माने गए हैं। इस दिन किए गए श्राद्ध व तर्पण से यमलोक में निवास कर रहे पितरों को विशेष शांति और तृप्ति मिलती है।
 
गया श्राद्ध के समान फल: धर्मशास्त्रों और मत्स्य व गरुड़ पुराण के अनुसार, महा भरणी के दिन श्राद्ध या पिंडदान करने से वही पुण्य प्राप्त होता है जो तीर्थ नगरी गया (बिहार) में पिंडदान करने से मिलता है।
 
अकाल मृत्यु या अज्ञात तिथि वाले पितरों की शांति: यदि परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु की सही तिथि ज्ञात न हो या किसी की अकाल मृत्यु हुई हो, तो भरणी नक्षत्र में किया गया श्राद्ध उनकी आत्मा को मोक्ष और गति प्रदान करता है।
 
पितृदोष से मुक्ति: इस दिन श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन तथा पंचबली भोग (गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी और देव) निकालने से पितृदोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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