कागजों में भगाए बंदर! राजस्थान संपर्क पोर्टल पर समस्या का 'फर्जी समाधान'
राजस्थान सरकार का 'संपर्क पोर्टल', जिसका मकसद जनता की समस्याओं का पारदर्शी और त्वरित समाधान करना है, चौमूं में प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो गया है। चौमू की कई कालोनियों में बंदरों का आतंक है। इसी संदर्भ में एक नागरिक ने जब पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, तो उसे धरातल पर हल करने के बजाय अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा कर कागजों में ही 'निस्तारित' दिखा दिया। हद तो तब हो गई जब समाधान पत्र पर ऐसे अधिकारी के नाम का लेटर अपलोड कर दिया गया, जो काफी समय पहले ही तबादला हो चुका है।
दरअसल, चौमूं नगर परिषद क्षेत्र के अशोक विहार कॉलोनी निवासी रमेश कुमार रावत ने 25 अगस्त को बंदरों के बढ़ते आतंक से राहत पाने के लिए राजस्थान संपर्क पोर्टल पर परिवाद दर्ज कराया था। लेकिन समस्या दूर होना तो दूर, पोर्टल के कार्यशैली ने प्रशासनिक ढिलाई की पोल खोल कर रख दी। ALSO READ: चोमू शहर में बंदरों का आतंक! लोगों में दहशत, एक साल से फाइल में दबा ज्ञापन, राहत का इंतजार
एक ही दिन में बिना कार्रवाई कागजी समाधान
शिकायत दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर ही पोर्टल पर दावा कर दिया गया कि समस्या का निवारण कर राहत प्रदान कर दी गई है। इसके प्रमाण के तौर पर पोर्टल पर दिलीप कुमार शर्मा (आयुक्त) के नाम से एक पत्र भी अपलोड कर दिया गया। मजेदार बात यह है कि दिलीप कुमार शर्मा लंबे समय से चौमूं नगर परिषद के आयुक्त हैं ही नहीं। वर्तमान में इस पद पर रामकिशोर मेहता कार्यरत हैं। इससे पहले ममता नागर महज एक दिन के लिए नियुक्त हुई थीं और फिर तबादला होने पर चली गई थीं। ऐसे में पदमुक्त अधिकारी के नाम का लेटर अपलोड होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
असंतोष जताया तो उपनिदेशक को भेजा मामला
पोर्टल की ओर से जब परिवादी रमेश रावत के पास कॉल और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए फीडबैक लिया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से असंतुष्टि जताते हुए कहा कि बंदरों का आतंक ज्यों का त्यों बना हुआ है। शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद, 26 अगस्त को पोर्टल के डेटा एंट्री ऑपरेटर (सिटीजन कांटेक्ट सेंटर) ने मामला वापस नगर परिषद आयुक्त को भेजा। इसके बावजूद तय समय सीमा में कार्रवाई न होने पर 29 अगस्त को परिवाद को उच्च स्तर पर उपनिदेशक (जयपुर, स्वायत्त शासन) को प्रेषित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री की मंशा पर फिर रहा पानी
परिवादी रमेश कुमार रावत का कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जहां एक ओर संपर्क पोर्टल के जरिए आमजन से सीधा संवाद कर राहत पहुंचाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी बिना धरातल पर काम किए फर्जी निवारण पत्र अपलोड कर रहे हैं। इस तरह की गलतियां न केवल मुख्यमंत्री की मंशा पर पानी फेर रही हैं, बल्कि सरकारी पोर्टल की विश्वसनीयता और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ भी हैं।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि ऐसे गलत दस्तावेज अपलोड करने वाले दोषी कर्मचारियों और लापरवाह अधिकारियों पर उच्चाधिकारी तुरंत सख्त कार्रवाई करें, ताकि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके।

