तेजा दशमी 2026: तेजाजी महाराज की कथा
Teja Dashami 2026: तेजा दशमी लोक-आस्था, सत्य, वचनबद्धता और गो-रक्षा के प्रतीक वीर तेजाजी महाराज का पावन पर्व है। यह पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में तेजा दशमी 21 सितंबर 2026, मंगलवार को है। विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में इस दिन विशाल मेलों का आयोजन होता है और तेजाजी के थानों (मंदिरों) पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ता है।
वीर तेजाजी महाराज की अमर कथा
वीर तेजाजी का जन्म राजस्थान के नागौर जिले के खड़नाल गांव में धोलिया गोत्र के जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ताहड़ जी और माता का नाम रामकुंवरी था। तेजाजी बचपन से ही साहसी, दयालु, सत्यवादी और गौ-भक्त थे।
1. लाछां गुजरी की गायों की रक्षा का संकल्प
तेजाजी का विवाह बचपन में ही पेमल के साथ हो गया था, लेकिन उन्हें इस बात का पता युवावस्था में चला। जब वे अपनी पत्नी पेमल को विदा कराने अपने ससुराल पनेर गांव जा रहे थे, तो रास्ते में उनकी मुलाकात लाछां गुजरी नामक महिला से हुई। उसी रात मीणों (डाकुओं) ने लाछां गुजरी की गायों का अपहरण कर लिया। दुखी लाछां ने तेजाजी से सहायता मांगी। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले वीर तेजाजी ने गायों को डाकुओं के चंगुल से छुड़ाने की प्रतिज्ञा ली।
2. नागदेवता को दिया गया वचन
गायों को खोजने के लिए जब तेजाजी जंगल के रास्ते आगे बढ़ रहे थे, तो उन्होंने देखा कि एक सर्प (नागदेवता) आग में जल रहा था। तेजाजी ने जीव-दया के भाव से अपने भाले से उस सर्प को आग से बाहर निकाल दिया। किंतु वह नाग अग्नि-समाधि ले रहा था, इसलिए तेजाजी द्वारा उसकी साधना में बाधा डालने पर वह क्रोधित हो गया और उसने तेजाजी को डसने का प्रयास किया।
तेजाजी ने नम्रतापूर्वक नागदेवता से कहा, "हे नागदेव! इस समय मैं लाछां गुजरी की गायों को छुड़ाने जा रहा हूँ। यह मेरा कर्तव्य है। मैं आपको वचन देता हूँ कि गायों को सुरक्षित वापस लाकर मैं स्वयं आपके समक्ष उपस्थित हो जाऊँगा, तब आप मुझे डस लेना।" नागदेवता तेजाजी के सत्यवादी स्वभाव से प्रभावित हुए और उन्हें जाने दिया।
3. भीषण युद्ध और वचनों का पालन
तेजाजी ने डाकुओं से कड़ा मुकाबला किया और लहूलुहान होकर भी गायों को छुड़ाकर लाछां गुजरी को सौंप दिया। इसके बाद, अत्यंत घायल अवस्था में भी अपना वचन निभाने के लिए वे सीधे नागदेवता के पास पहुँचे।
तेजाजी का पूरा शरीर घावों से भरा हुआ था। उन्होंने नागदेवता से कहा, "हे प्रभु! मेरा पूरा शरीर युद्ध में घायल हो चुका है, किंतु मेरी जीभ पूरी तरह सुरक्षित और स्वच्छ है। आप मुझे जीभ पर डस सकते हैं।"
तेजाजी की ऐसी अद्भूत सत्यनिष्ठा, वचनबद्धता और त्याग को देखकर नागदेवता गद्गद हो गए। नागदेवता ने उनकी जीभ पर डसा और उन्हें आशीर्वाद दिया, "जो भी व्यक्ति सर्पदंश या किसी जहरीले जीव के काटने पर तुम्हारे नाम का तागा (धागा) बांधेगा, वह विषमुक्त हो जाएगा और उसकी रक्षा होगी।"
तेजा दशमी का धार्मिक व सामाजिक महत्व
वचनबद्धता और सत्य का संदेश: तेजाजी महाराज का जीवन हमें सिखाता है कि प्राण चले जाएँ पर वचन नहीं जाना चाहिए।
गौ-रक्षा और परोपकार: तेजाजी ने अपने प्राणों की आहुति केवल दूसरों के धन (गायों) और सम्मान की रक्षा के लिए दी थी।
सर्पदंश से मुक्ति की मान्यता: आज भी ग्रामीण अंचलों में सर्पदंश या जहरीले कीड़े के काटने पर तेजाजी महाराज के नाम का तागा बांधा जाता है और तेजा दशमी के दिन मंदिर जाकर उसे खोला जाता है।
किसान और लोक-संस्कृति: किसान फसल की बुआई के समय 'तेजा गायन' गाते हैं, जिससे खेत में सुख-समृद्धि बनी रहे और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा हो सके।

