CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को बड़ी राहत, SEM कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत से राहत मिली है। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने दोनों नेताओं की रिहाई का आदेश दिया है। आदेश के बाद दोनों को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से बाहर ले जाया जा रहा है।
सौरव दास और आशुतोष रांका को दो दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद SEM कोर्ट में पेश किया गया था। अदालत के रिहाई के आदेश के बाद मामले में दोनों नेताओं को राहत मिली है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। यह मामला जंतर-मंतर में कथित तौर पर बंद गेट पार करके प्रवेश करने और शांति भंग होने की आशंका से संबंधित था।
क्या है सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का मामला?
यह मामला मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल का दर्जा वापस ले लिया था। इस फैसले को अलग-अलग याचिकाओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने वहां प्रवेश करने के लिए बंद गेट पार किया। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को हिरासत में लिया गया।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने शांति भंग होने की आशंका जताते हुए दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद उस समय तेज हुआ, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दस महीने की अवधि में निर्वाचन आयुक्तों ने CEC के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई थी।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इस रिपोर्ट के संदर्भ में कहा कि उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल की मान्यता वापस लेने के फैसले ने मामले को और चर्चा में ला दिया है।

