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दिल्ली में ब्रिक्स समिट का आगाज, BRICS रिफॉर्म के लिए क्या है पीएम मोदी का रोडमैप?

modi in brics summit
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा कि मैं प्रस्ताव रखता हूं कि हम मिलकर ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के 10 प्रपोजल तैयार करें जिसे हम अगली समिट तक एक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप कर सकते हैं। इस रोडमैप को बनाने में हमें तीन मुख्य पहलुओं- रिप्रेजेटेंशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल मेकिंग का ध्यान रखना होगा। ALSO READ: Delhi BRICS Summit: पुतिन, जिनपिंग और युद्ध के साए में 'मोदी टेस्ट'! जानिए विदेशी मीडिया ने क्या लिखा?
 
उन्होंने कहा कि रिप्रेजेंटेशन में यूएनएससी में सुधार अब टाला नहीं जा सकता। टैक्स बेस्ड नेगोशिएशन से हमें इस जोड़ना होगा। वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, इकोनॉमिक नीति आज की असलियत के आधार पर होनी चाहिए। जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक को गति देते हैं उन्हें उचित भूमिका मिलनी चाहिए।
 
पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान रेजिलियंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी भारत की प्राथमिकताएं रही हैं। कोशिश की गई कि ब्रिक्स सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे आम लोगों से भी जोड़ा जाए। इसी उद्देश्य से 350 से ज्यादा बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों की टीमों का स्वागत किया गया। ALSO READ: बिहार का सत्तू, ओडिशा की कॉफी और बहुत कुछ: ब्रिक्स मेहमानों को दिए जा रहे 'गुडी बैग' में क्या-क्या है खास?
 

20 साल में ब्रिक्स ने बनाई अलग पहचान

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और सहमति के आधार पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा, हम सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। अब समय आ गया है कि ब्रिक्स में मौजूद हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदला जाए।
 

अगले 20 साल के लिए तैयार करना होगा एजेंडा

प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स को आने वाले दो दशकों के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा। इसकी शुरुआत संगठन के अपने कामकाज के तरीके में सुधार से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इसके कारण संगठन की संस्थागत प्रगति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए ऐसी मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिससे अध्यक्षता बदलने के बावजूद फैसलों और पहलों में निरंतरता बनी रहे।
 

ग्लोबल गवर्नेंस में बदलाव की जरूरत

पीएम मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा ग्लोबल गवर्नेंस स्ट्रक्चर एक पिरामिड की तरह है, जिसमें सत्ता और फैसले लेने की ताकत शीर्ष पर कुछ देशों और संस्थाओं के हाथों में केंद्रित है। उन्होंने कहा कि पिरामिड के निचले हिस्से में वे देश हैं, जो इन फैसलों से सीधे प्रभावित होते हैं, लेकिन आकार या प्रभाव कम होने की वजह से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी पर्याप्त भागीदारी नहीं हो पाती। पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स को मजबूत करने के साथ-साथ ऐसी वैश्विक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम करना होगा, जिसमें सभी देशों की आवाज को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
 
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