Delhi BRICS Summit: पुतिन, जिनपिंग और युद्ध के साए में 'मोदी टेस्ट'! जानिए विदेशी मीडिया ने क्या लिखा?
Foreign Media on BRICS: दुनिया भर की 40% जीडीपी और लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्य देश) सम्मेलन की मेजबानी इस बार भारत कर रहा है। वैश्विक संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितता और महाशक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के दौर में नई दिल्ली में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ा 'डिप्लोमैटिक टेस्ट' माना जा रहा है।
वैश्विक मीडिया इस सम्मेलन और भारत की रणनीतिक भूमिका को किस नजरिए से देख रहा है, आइए विस्तार से जानते हैं :
1. पाकिस्तान (Dawn) : 'युद्ध के साए में भारत का कूटनीतिक इम्तिहान'
पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र डॉन (Dawn) ने समाचार एजेंसी AFP के हवाले से दो मुख्य पहलुओं को उजागर किया है:
- शी जिनपिंग का भारत दौरा : रिपोर्ट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन पर विशेष जोर दिया गया है। 2019 के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। 2020 की गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि वीजा, उड़ानों और उच्च स्तरीय बैठकों की बहाली शुरू हुई है, लेकिन सीमा विवाद और बढ़ते व्यापार घाटे के कारण दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी एक बड़ी चुनौती है। ALSO READ: 7 साल बाद भारत आए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, आज शाम पीएम मोदी के साथ होगी महा-बैठक
- ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी : ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान का पद संभालने के बाद यह पहला भारत दौरा है। मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में चल रहे तनाव के बीच उनकी उपस्थिति सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में शामिल है। डॉन के अनुसार, भारत के संबंध ईरान और इजराइल दोनों से बेहतर हैं, लेकिन वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों का संतुलन बनाए रखने की बारीकी से कोशिश कर रहा है।
2. अमेरिका (The New York Times) : 'पश्चिम के विकल्प की तलाश, पर आंतरिक मतभेद बरकरार'
अमेरिकी समाचार पत्र द न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट की हेडिंग दी—"Emerging Powers Seek an Alternative to the West, But War Divides Them":
- पश्चिम के दबदबे को चुनौती : रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कम करना है। लेकिन वैश्विक युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतें इस गुट की एकजुटता की परीक्षा ले रही हैं।
- विरोधाभासी हित : BRICS में एक तरफ ईरान जैसा देश है जो पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद खुद को अलग-थलग न होने का संदेश देना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ UAE जैसे देश हैं जो अमेरिका के प्रमुख सुरक्षा साझेदार हैं। ALSO READ: बिहार का सत्तू, ओडिशा की कॉफी और बहुत कुछ: ब्रिक्स मेहमानों को दिए जा रहे 'गुडी बैग' में क्या-क्या है खास?
- मोदी के लिए नाजुक संतुलन : मेजबान के रूप में पीएम मोदी के लिए यह एक बेहद नाजुक संतुलन साधने जैसा है। भारत BRICS में अकेला ऐसा देश है जो चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को रोकना चाहता है। भारत रूस के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखते हुए भी पूरी तरह से अमेरिका-विरोधी रुख नहीं अपना सकता।
3. ब्रिटेन (Reuters): 'सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) और डॉलर का सवाल'
ब्रिटिश समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने वित्तीय और व्यापारिक एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया है:
- CBDC कनेक्टिविटी : सम्मेलन में सदस्य देशों की सरकारी डिजिटल मुद्राओं (Central Bank Digital Currency) को आपस में जोड़ने के प्रस्ताव पर चर्चा संभव है। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सीधी भुगतान प्रणाली बनाना है ताकि व्यापार तेज, सस्ता और बिना किसी तीसरे देश (या अमेरिकी डॉलर) की मध्यस्थता के हो सके। ALSO READ: ट्रम्प को भारत का कड़ा संदेश : पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेशकियन संग मोदी ने बनाया नया ग्लोबल समीकरण
- डॉलर पर भारत का रुख : डोनाल्ड ट्रंप द्वारा BRICS करेंसी या डॉलर को नुकसान पहुंचाने पर टैरिफ लगाने की चेतावनी के बीच, भारत ने अपना रुख स्पष्ट रखा है। भारत डॉलर को खत्म करने या कोई नई 'BRICS करेंसी' बनाने के पक्ष में नहीं है; वह केवल अपने मौजूदा डिजिटल रुपए को अन्य देशों के आधिकारिक डिजिटल सिस्टम से जोड़ने का व्यावहारिक रास्ता तलाश रहा है।
4. कतर (Al Jazeera) : 'बहुध्रुवीय दुनिया की ओर कदम, लेकिन चुनौतियां कायम'
क़तर आधारित अल जजीरा ने संगठन के 20 साल के सफर और इसकी सीमाओं का विश्लेषण किया:
- ग्लोबल साउथ की आवाज : BRICS ने विकासशील देशों को एक ऐसा मंच दिया है, जहां से वे पश्चिमी संस्थाओं के सामने अपनी मोलभाव की शक्ति बढ़ा सकते हैं।
- सीमाएं : अल जजीरा के अनुसार, डॉलर का दबदबा आज भी कायम है और सदस्य देशों के अपने आंतरिक मतभेदों (जैसे भारत-चीन सीमा विवाद) के कारण यह समूह विदेश नीति या सुरक्षा पर हमेशा एकमत नहीं हो पाता।
- सफलता का पैमाना : एक्सपर्ट्स का मानना है कि BRICS की सफलता इस बात में नहीं है कि उसने पश्चिमी संस्थाओं को पूरी तरह बदल दिया है, बल्कि इस बात में है कि उसने पश्चिमी देशों की मनमानी को सीमित कर दिया है।
5. रूस (RT International & TASS): 'मजबूत रणनीतिक साझेदारी और बहुपक्षवाद'
रूस के सरकारी नेटवर्क RT International और समाचार एजेंसी TASS ने इस सम्मेलन को सकारात्मक रूप से कवर किया है:
- मोदी-पुतिन केमिस्ट्री : RT ने पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच के व्यक्तिगत संबंधों, ऊर्जा (तेल), रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस के संबंध मजबूत बने हुए हैं।
- वियतनाम की भागीदारी : TASS ने वियतनाम जैसे देशों की उपस्थिति को उद्धृत करते हुए लिखा कि BRICS के भीतर व्यावहारिक और ठोस सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जो बदलती वैश्विक भू-राजनीति में बेहद जरूरी है।
6. चीन (Global Times): "भारत-चीन सहयोग और 'हाथी-पांडा' का विजन"
चीनी सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने ओपिनियन पीस में एक कार्टून के साथ रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें एक हाथी (भारत) और एक पांडा (चीन) को एक साथ उगते सूरज को देखते हुए दिखाया गया है:
- सहयोग की अपील : आर्टिकल का शीर्षक था—"India Should Not Miss the Opportunity to Work With China". इसमें तर्क दिया गया कि भारत को चीन के साथ दीर्घकालिक (long-term) रणनीतिक साझेदारी पर विचार करना चाहिए।
- विदेश नीति में बदलाव का सुझाव : चीनी मीडिया ने लिखा कि अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में आई हालिया तल्खियों और उम्मीदें पूरी न होने के बीच चीन के साथ एक संतुलित रिश्ता भारत के हित में है। सीमा विवादों के बावजूद बातचीत के जरिए आर्थिक और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों को साथ मिलकर काम करना चाहिए।
दिल्ली का BRICS सम्मेलन केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था का एक दर्पण है। जहां एक तरफ पश्चिमी मीडिया इसे मतभेदों से घिरा हुआ देख रहा है, वहीं ग्लोबल साउथ के देश इसे एक संतुलित और बहुध्रुवीय (Multipolar) दुनिया के निर्माण की दिशा में एक अहम मंच मान रहे हैं।

