भोपाल में MBBS इंटर्न्स के प्रदर्शन और सड़क जाम पर उठे सवाल, 65 लाख रुपए की सरकारी मदद के बाद भी 1 साल के स्टाइपेंड पर बवाल
भोपाल। इंटर्नशिप भत्ते में 110% की बढ़ोतरी की मांग को लेकर भोपाल में MBBS छात्रों द्वारा किए जा रहे सड़क जाम को लेकर अब सवाल उठने लगे है। 40 घंटे से अधिक से शहर के सबसे व्यवस्तम इलाके में मेडिकल छात्रों के द्वारा सडक जाम का खामियाजा आम आदमी का भुगतना पड़ा रहा है। 8 सितंबर की शाम से जारी छात्रों के प्रदर्शन और अवैध सड़क कब्जे के कारण लाखों नागरिक परेशान हैं।
इस बीच स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुपों और आम जनता के बीच यह सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है कि जब सरकार प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ाई पर जनता के 65 लाख से 75 लाख रुपये खर्च कर रही है, तो महज 1 साल के स्टाइपेंड के नाम पर इतना उपद्रव क्यों मचाया जा रहा है?
सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों और चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से रेखांकित की जा रही है कि मध्य प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जो मेडिकल की पढ़ाई के लिए छात्रों को 65 से 75 लाख रुपये तक की भारी वित्तीय सहायता व छात्रवृत्ति देता है। इसी कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी छात्र यहाँ मेडिकल की पढ़ाई करने आते हैं।
वहीं इंटर्नशिप की अवधि केवल एक वर्ष की होती है और इन छात्रों ने अभी तक अपनी MBBS की डिग्री भी हासिल नहीं की है।
जनता के पैसे से 65 से 75 लाख रुपये की सहायता पाने के बावजूद ये छात्र महज एक साल के वजीफे या पॉकेट मनी के लिए जनता को मुसीबत में डाल रहे हैं और गरीब मरीजों का इलाज करने से पीछे हट रहे हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इंटर्नशिप वजीफा एक प्रकार का भत्ता है, न कि कोई मौलिक अधिकार या जीवन-मरण का सवाल। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा 40 घंटे से भी अधिक समय से मुख्य सड़कों को ब्लॉक करके रखा गया है।
बुधवार सुबह भी छात्रों का सड़क को जाम कर प्रदर्शन जारी है। वहीं आम लोग और यहाँ तक कि रास्ते के लिए गिड़गिड़ाती महिलाओं को भी आगे बढ़ने नहीं दिया गया। छात्रों का अड़ियल रवैया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक रास्ता बंद रहेगा। इस पर गुस्सा जताते हुए भोपाल के लोगों ने कहा है कि जनता का सब्र अब टूट चुका है; यदि पुलिस बल कम पड़ता है तो आम जनता मदद करेगी, लेकिन इस तरह का सड़क जाम अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

