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  4. After the Supreme Court's intervention, implementing Bhopal's Master Plan has become a necessity or a compulsion.

भोपाल का मास्टर प्लान लागू करना अब जरूरी या मजबूरी, आखिरी क्यों 21 साल में तीन ड्राफ्ट, फिर भी कागजों में शहर का भविष्य?

Bhopal News
राजधानी भोपाल के आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े रूप के बाद एक ओर जहां नए भोपाल में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं एक भार भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर दिखाए है उससे अब नया मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करने को लेकर सरकार पर दबाव बना गया है।

सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देशों के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा,लेकिन सवाल यहीं है कि आखिर सरकार को सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही क्यों मास्टर प्लान लागू करने की आवश्यकता पड़ रही है।   

तीन बार ड्राफ्ट, फिर भी नहीं बना मास्टर प्लान- भोपाल शहर का मौजूदा मास्टर प्लान 2005 में खत्म हो चुका है, लेकिन इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। ऐसे नहीं 2005 के बाद भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर ड्राफ्ट तैयार नहीं हुए, एक नहीं, दो बार नहीं, तीन बार मास्टर प्लान को लेकर ड्राफ्ट तैयार हुए लेकिन सियासी हस्तक्षेप और प्राशासनिक उदासीनता के कारण मास्टर प्लान लागू नहीं हो सकता।

भोपाल के लिए नया मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया कई वर्षों से चल रही है। अलग-अलग समय पर 2009, 2020 और 2023 में ड्राफ्ट तैयार किए गए, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। 2023 के ड्राफ्ट पर जनप्रतिनिधियों, किसानों और अन्य पक्षों की ओर से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।  2023 में जारी ड्राफ्ट पर 3 हजार से ज्यादा आपत्तियां मिलने के बाद मामला और उलझ गया। मास्टर प्लान लागू करने को लेकर सबसे अधिक आपत्तियां शहर के उन जनप्रतिनिधियों की ओर से लगाई गई जिनके कंधों पर शहर के  विकास की जिम्मेदारी दी थी।

जमीन और सड़कें बनी बड़ी चुनौती-मास्टर प्लान के अटकने का असर शहर के विस्तार पर भी दिखाई दे रहा है। कई प्रस्तावित सड़कों का निर्माण नहीं हो पाया, जबकि दूसरी ओर मास्टर प्लान में प्रस्तावित क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों और अनियोजित निर्माण का विस्तार होता गया। रहवासी इलाकों में बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और नामी कंपनियों के स्टोर और ऑउटलेट बनकर तैयार हो गए। 

कई जगह जमीन पर बनी वास्तविक स्थिति और कागजों में दर्ज योजना के बीच अंतर बढ़ता गया। इससे सड़क, आवास, व्यावसायिक क्षेत्र और दूसरी शहरी सुविधाओं की योजना बनाने में मुश्किलें पैदा हुईं। भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 में लागू हुआ था और उसकी अवधि दिसंबर 2005 में समाप्त हो गई। उस समय शहर की आबादी आज की तुलना में काफी कम थी। इसके बावजूद नए प्लान के लागू न होने से शहर के विकास को पुराने नियोजन ढांचे पर निर्भर रहना पड़ा। यही वजह है कि बढ़ती आबादी, ट्रैफिक, नई कॉलोनियों और बदलती जमीन उपयोग की जरूरतों के हिसाब से शहर का विकास चुनौतीपूर्ण हो गया है।

2047 को ध्यान में रखकर नया प्लान- सरकार ने बाद में पुराने ड्राफ्ट को आगे बढ़ाने के बजाय 2047 की अनुमानित जरूरतों और आबादी को ध्यान में रखकर नया मास्टर प्लान तैयार करने का फैसला किया। इसमें ट्रैफिक व्यवस्था, सड़कों की चौड़ाई, फ्लाईओवर, मेट्रो विस्तार, तालाबों और भोपाल की पुरातात्विक विरासत के संरक्षण जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही गई थी।

मास्टर प्लान के लगातार टलने से सबसे ज्यादा असर शहर के व्यवस्थित विकास पर पड़ रहा है। जहां सड़कें और सार्वजनिक सुविधाएं भविष्य की आबादी के हिसाब से विकसित होनी चाहिए थीं, वहां कई क्षेत्रों में विकास पहले हो रहा है और योजना बाद में बनाई जा रही है। यानी भोपाल का सवाल सिर्फ एक नए दस्तावेज का नहीं, बल्कि अगले कई दशकों के शहर की दिशा तय करने का है। मौजूदा स्थिति में जरूरत इस बात की है कि नया मास्टर प्लान सिर्फ कागज पर तैयार न हो, बल्कि आपत्तियों और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध तरीके से लागू भी किया जाए।
 
लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
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