EV खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, कितने तरह के होते हैं इलेक्ट्रिक वाहन और कौन-सा आपके लिए बेहतर?
भारत में तेजी से बढ़ रहा EV का चलन, 2030 तक 30% नई गाड़ियों का लक्ष्य, जानें इलेक्ट्रिक वाहन कितने प्रकार के होते हैं और क्या है 200 अरब रुपए का मौका
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बनती जा रही है। 2016 के बाद से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में करीब 46 गुना बढ़ोतरी हुई है। वहीं, EV से जुड़े निर्यात का मूल्य 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया।
सरकार की कई योजनाओं और नीतियों से देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को बढ़ावा मिल रहा है। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए PLI Scheme, PM E-DRIVE Scheme और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली पहलें भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर रही हैं।
2030 तक नई गाड़ियों में 30% EV का लक्ष्य
भारत ने 2030 तक नई वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए India Electric Mobility Index जारी किया है। इसके साथ Electric Vehicles in India: $200 Billion Opportunity रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का EV सेक्टर आने वाले वर्षों में करीब 200 अरब डॉलर का आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। इससे सिर्फ वाहन निर्माण ही नहीं, बल्कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग स्टेशन, ऑटो कंपोनेंट, सर्विस और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
शहरों से छोटे कस्बों तक बदल रही मोबिलिटी
बड़े शहरों में रोजाना आने-जाने और छोटे शहरों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सरकार की जलवायु रणनीति और टिकाऊ परिवहन के लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है।
EV को बढ़ावा देने से पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम है।
इलेक्ट्रिक वाहन क्या होता है?
इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV वह वाहन है, जो मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है और बैटरी में स्टोर बिजली का इस्तेमाल करता है। बैटरी को बाहरी पावर सोर्स यानी चार्जिंग स्टेशन या अन्य चार्जिंग सिस्टम से रिचार्ज किया जा सकता है।
कितने तरह के होते हैं इलेक्ट्रिक वाहन?
1. Battery Electric Vehicle (BEV)
ये वाहन पूरी तरह बिजली से चलते हैं। इनमें इंटरनल कंबशन इंजन नहीं होता और इन्हें बाहरी चार्जिंग सिस्टम से चार्ज किया जाता है।
2. Hybrid Electric Vehicle (HEV)
हाइब्रिड वाहन में पेट्रोल/डीजल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर भी होती है। दोनों प्रणालियां वाहन को चलाने में मदद करती हैं।
3. Plug-in Hybrid Electric Vehicle (PHEV)
PHEV में भी इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों होते हैं, लेकिन इसकी बैटरी को बाहरी पावर सोर्स से चार्ज किया जा सकता है। इससे वाहन कुछ दूरी तक सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड पर चल सकता है।
4. Fuel Cell Electric Vehicle (FCEV)
इन वाहनों में केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदला जाता है और इसी बिजली से इलेक्ट्रिक मोटर चलती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है EV?
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारत के लिए सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर का बदलाव नहीं है। इसका असर ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग, आयात बिल, प्रदूषण और नई तकनीक जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। बैटरी निर्माण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ भारत में EV का पूरा इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री और सरकारी नीतियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश की मोबिलिटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 2030 का 30 फीसदी EV लक्ष्य और 200 अरब डॉलर के संभावित आर्थिक अवसर को देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ऑटो सेक्टर के साथ-साथ रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी बड़ा क्षेत्र बन सकती है।

