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Monday,January 5, 2026
Kartik Month 2025: क्यों खास है कार्तिक माह? जानिए महत्व और इस महीने में क्या करें और क्या करने से बचें
Ahoi Ashtami 2025: इन नियमों के साथ रखें अहोई अष्टमी व्रत, संतान को मिलेगा सुख-समृद्धि और दीर्घायु होने का आशीर्वाद
इस वर्ष के व्रत-त्योहार (2025)
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Thursday, December 22, 2022
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Monday, December 27, 2021
कैसा है माता पार्वती का मंगला गौरी स्वरूप, जानिए व्रत के 2 फायदे
Monday, July 26, 2021
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Wednesday, December 30, 2020
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मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। मंगल के इस नक्षत्र परिवर्तन के चलते 3 राशि के लोगों को 12 अगस्त तक रहना होगा सावधान। चलिए जानते हैं कि किन राशि 3 राशियों को रहना होगा सावधान।
Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म
देकार्त के जीवन का सबसे बड़ा ध्येय यह था कि दर्शनशास्त्र को भी गणित (Mathematics) की तरह सटीक, अकाट्य और संदेह से परे बनाया जाए। वे एक ऐसा सार्वभौमिक सत्य खोजना चाहते थे, जिस पर कोई भी प्रश्नचिह्न न लगा सके। इसी विचार ने बुद्धिवाद (Rationalism) की नींव रखी। आइए, देकार्त के इस अद्भुत दार्शनिक चिंतन के 4 प्रमुख स्तंभों को गहराई से समझते हैं।
मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। ज्योतिष की दुनिया में एक बड़ा हलचल भरा मोड़ आ चुका है- बुध ग्रह अपनी ही प्रिय राशि मिथुन में सीधे (मार्गी) चलने लगे हैं। अब जब बुद्धि और संवाद का कारक ग्रह सीधी चाल चलेगा, तो जाहिर है आपकी सोच, बातचीत और फैसलों की रफ्तार भी बदल जाएगी।
Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?
Raksha Bandhan 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इसे मिठास और खुशियों का उत्सव माना गया है। यह भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व है। यहां जानें रक्षा बंधन 2026 कब है? जानें रक्षा बंधन 2026 की तारीख...
चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय
Chaturmas Astrology Remedies: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास यह चार महीनों का पवित्र काल भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार चातुर्मास में कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो जीवन में आ रही और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यहां जानें 12 राशियों के लिए चातुर्मास के अचूक उपाय...
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Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 08 अगस्त 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय
08 August 2026 Today Shubh Muhurat: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 08 अगस्त, 2026 का विशेष पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।
शुक्र का हस्त नक्षत्र में गोचर: जानिए मेष से मीन तक 12 राशियों पर क्या होगा असर
11 अगस्त 2026, मंगलवार को प्रातः 06:33 बजे सौंदर्य, प्रेम, कला और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक ग्रह 'शुक्र' उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ पद से निकलकर हस्त नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करेगा। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जो मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। सौंदर्य के कारक शुक्र का चंद्रमा के नक्षत्र में प्रवेश सभी 12 राशियों के जीवन में रचनात्मकता, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत संबंधों पर गहरा प्रभाव डालेगा।
कांवड़ यात्रा 2026: किस पेड़ के नीचे से गुजरने पर कांवड़ मानी जाती है खंडित? जानिए धार्मिक मान्यता
सावन का महीना शुरू होते ही फिज़ाओं में एक अलग ही रूहानी रंग घुल जाता है। हर तरफ गूँजते 'बोल बम' के जयकारे और भगवा रंग में रंगे श्रद्धालुओं का सैलाब इस बात की गवाही देता है कि कांवड़ यात्रा महज़ एक सफ़र नहीं, बल्कि महादेव के प्रति अटूट आस्था का इम्तिहान है। मीलों पैदल चलकर पवित्र नदियों का जल शिव धाम तक पहुँचाना जितना कठिन है, उतना ही कड़ा है इस यात्रा के नियमों को निभाना। एक छोटी सी चूक और पूरी साधना पर पानी फिर सकता है।
हरतालिका तीज 2026: सिंधारा दोज से होती है व्रत की शुरुआत, जानिए इसका धार्मिक महत्व
Sindhara Dooj 2026: वर्ष 2026 में सिंधारा दूज श्रावण शुक्ल द्वितीया 14 अगस्त 2026 शुक्रवार को है। यह पर्व हरियाली तीज से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इसके बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को सिंधारा दोज भी आती है जिसे सिंधारा दूज या सौभाग्य द्वितीया कहा जाता है। यह दिन अगले दिन आने वाले हरतालिका तीज के कठिन निर्जला व्रत की तैयारी और उत्साह की शुरुआत का प्रतीक है।
श्रावण मास विशेष: शिवलिंग पर कितने प्रकार के अभिषेक किए जाते हैं? जानिए हर अभिषेक का महत्व
श्रावण मास (सावन) में भगवान शिव की आराधना और रुद्राभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, अलग-अलग द्रव्यों (सामग्रियों) से किए गए अभिषेक से अलग-अलग प्रकार के फल प्राप्त होते हैं। भगवान शिव को "अभिषेक प्रिय" माना गया है। यहाँ मुख्य प्रकार के शिव-अभिषेक और उनके महत्व की पूरी जानकारी दी गई है।
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