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Ganesh chaturthi 2026: गणेश पूजा एवं स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र, नियम और उपाय

gneshutsav 2026
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Ganesh Chaturthi 2026: भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। यह पर्व अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इस बार 14 सितंबर सोमवार से प्रारंभ होकर 25 सितंबर शुक्रवार 2026 को समाप्त होगा। चलिए जानते हैं 14 सितंबर के दिन के शुभ मुहूर्त, स्थापना विधि, गणपति मंत्र, नियम और उपाय।

गणेश प्रतिमा लाने का शुभ मुहूर्त:

अमृत चौघड़िया: प्रात: 06:05 से 07:38 के बीच।
शुभ चौघड़िया: सुबह 09:11 से 10:44 के बीच।
नोट: उपरोक्त समय में गणेश प्रतिमा खरीदकर घर लाएं। 
 

गणेश पूजा एवं स्थापना का शुभ मुहूर्त:

मध्याह्न गणेश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:09 से 12:58 तक।
गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त: मध्याह्न 11:20 से 01:48 तक।
शाम को पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त: 06:42 से 07:05 तक।

गणपति पूजा के लिए गणेश मंत्र:

1. मूल एवं सर्वप्रिय मंत्र
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥
महत्व: यह गणेश जी का सबसे सरल और शक्तिशाली बीज मंत्र है। किसी भी पूजा, नए कार्य की शुरुआत या दैनिक स्मरण के लिए इसका जाप किया जाता है।
 
2. विघ्नविनाशक मंत्र (बाधाएं दूर करने हेतु)
मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ: हे विशाल शरीर वाले, मुड़ी हुई सूंड वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी प्रभु! मेरे सभी कार्यों को हमेशा बिना किसी बाधा के पूर्ण करें।
 
3. कार्य सिद्धि एवं रिद्धि-सिद्धि मंत्र
मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
महत्व: इस मंत्र का जाप धन, समृद्धि, व्यापार में वृद्धि और कार्य की सफलता के लिए किया जाता है।
 
4. गणेश गायत्री मंत्र (बुद्धि और एकाग्रता हेतु)
मंत्र:
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
महत्व: विद्यार्थियों और मानसिक शांति चाहने वालों के लिए यह मंत्र अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता बढ़ती है।
 
5. शुभ-लाभ एवं संकट नाशक मंत्र
मंत्र: ॐ लम्बोदराय नमः॥ या ॐ विघ्नेश्वराय नमः॥
महत्व: जीवन के संकटों, भय और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए इन मंत्रों का जाप किया जाता है।

गणेश स्थापना और पूजा की संक्षिप्त विधि:

स्थापना:

तैयारी व स्वच्छता: स्थापना से पूर्व घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूजा स्थान की अच्छे से सफाई करें। स्वयं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले) धारण करें।
चौकी की सजावट: एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर अक्षत (चावल) का एक अष्टदल कमल या ढेरी बनाएं।
मूर्ति स्थापना: भगवान गणेश की मूर्ति लाते समय उनका मुख ढका होना चाहिए। चौकी पर स्थापित करते समय बाप्पा का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
कलश स्थापना (वैकल्पिक): चौकी के पास जल से भरा कलश रखें, जिसमें आम के पत्ते, सुपारी, सिक्का और दुर्वा डालें तथा ऊपर नारियल रखें।
पंचामृत व गंगाजल स्नान: यदि धातु की मूर्ति है तो पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। मिट्टी की प्रतिमा पर केवल जल के छींटे मारें।

पूजन:

  • पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • कलश की स्थापना करें और उसमें जल, चावल, सुपारी और एक सिक्का डालें।
  • गणेश जी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं।
  • मूर्ति पर कुमकुम, हल्दी और चंदन का तिलक लगाएं।
  • अब उन्हें दूर्वा घास और फूल अर्पित करें।
  • इसके बाद, मोदक, लड्डू और अन्य प्रसाद का भोग लगाएं।
  • अंत में, गणेश जी की आरती गाएं और 'ॐ गणेशाय नमः' मंत्र का जाप करें।
  • पूजा के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।
 

गणपति पूजा के नियम

  1. गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं, क्योंकि गणेश पूजन में तुलसी वर्जित मानी गई है।
  2. गणेश चतुर्थी की रात को चंद्र दर्शन करने से बचें, ताकि मिथ्या कलंक दोष से बचा जा सके।
  3. गणेशजी की पुरानी प्रतिमा को अलग रखें और अंत में उसको विधिवत रूप से विसर्जन करें।
  4. गणेश जी की प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में होनी चाहिए। उनकी सूंड बाईं ओर (वामवर्ती) मुड़ी हो और साथ में उनका वाहन मूषक (चूहा) तथा हाथ में मोदक/लड्डू अवश्य हो।
  5. प्रतिमा को घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में स्थापित करें। स्थापना के समय गणेश जी का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  6. पूजा स्थान पर केवल एक ही गणेश प्रतिमा की स्थापना और पूजन करें; एक साथ दो गणेश मूर्तियां पास-पास न रखें।
  7. बप्पा को मोदक, बेसन या बूंदी के लड्डू, मोसमी फल (केला) और पंचमेवा का भोग लगाएं। भोग में प्याज, लहसुन या अशुद्ध सामग्री का प्रयोग बिल्कुल न हो।
  8. जितने दिन का आपने संकल्प लिया हो (जैसे 3, 5 या 10वें दिन अनंत चतुर्दशी पर), उसी दिन पूर्ण आदर और भक्ति भाव के साथ ढोल-नगाड़ों और 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों के साथ प्रतिमा का विसर्जन जल में करें।
 

गणेश चतुर्थी के दिन करें ये उपाय:

1. आर्थिक तंगी और धन लाभ के लिए
दूर्वा और मोदक का अर्पण: गणेश जी को 21 दूर्वा (दूब घास) की गांठें बनाकर अर्पित करें। दूर्वा अर्पित करते समय 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करें। साथ ही बूंदी या मोदक का भोग लगाएं।
गुड़ और घी का उपाय: गणेश जी को शुद्ध देसी घी और गुड़ का भोग लगाएं। इसके बाद उस प्रसाद को गाय को खिला दें या स्वयं ग्रहण करें। इससे धन-धान्य में वृद्धि होती है।
 
2. विघ्न-बाधाओं और संकटों से मुक्ति के लिए
शमी पत्र अर्पण: यदि आपके कामों में बार-बार रुकावट आ रही है, तो गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करें। माना जाता है कि शमी पत्र चढ़ाने से मानसिक तनाव दूर होता है और कार्य सिद्ध होते हैं।
सिंदूर का तिलक: गणेश जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। उन्हें सिंदूर अर्पित करें और फिर उसी सिंदूर का थोड़ा सा भाग अपने माथे पर तिलक के रूप में लगाएं।
 
3. सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए
चौमुखी दीपक: गणेश स्थापना के बाद शाम के समय भगवान गणेश की मूर्ति के सामने चौमुखी (चार बत्तियों वाला) दीपक जलाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और पारिवारिक कलह दूर होती है।
स्वास्तिक का चिन्ह: घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम और हल्दी से स्वास्तिक बनाएं। इससे घर में शुभ-लाभ और समृद्धि का आगमन होता है।
 
4. मनोकामना पूर्ति और ज्ञान वृद्धि के लिए
गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ: गणेश चतुर्थी के दिन या 10 दिनों के दौरान प्रतिदिन 'श्री गणपति अथर्वशीर्ष' का पाठ करें। विद्यार्थियों के लिए यह उपाय एकाग्रता और बुद्धि बढ़ाने में विशेष लाभदायक माना जाता है।
21 नाम जाप: गणेश जी के 21 नामों (जैसे- सुमुख, एकदंत, कपिला, गजकर्णक, लंबोदर आदि) का स्मरण करते हुए उन्हें 21 दूर्वा चढ़ाएं।
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