Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा की मात्र 3 चौपाई पर रहोगे कायम तो संकट में दौड़े चले आएंगे बजरंगबली
Hanuman Chalisa: प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ने से सभी तरह के दोष और संकट दूर हो जाते हैं। भगवान हनुमान जी की स्तुति में 40 छंदों की एक भक्तिमय कविता हनुमान चालीसा है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है। इस चालीसा में 3 चौपाई ऐसी है जिस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। यदि आप इन तीनों चौपाइयों के महत्व को समझकर इसका पालन करते हैं तो समझो जीवन तर जाएगा।
1.
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।
अर्थात: जो भी आपकी शरण में आते है, उस सभी को आनन्द प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।
टिप्पणी: जो भी आपकी शरण में आते है उन सभी को आनन्द एवं सुख प्राप्त होता है और आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता। भविष्यवाणियों के अनुसार धरती 3 चरणों से गुजर रही है। पहला कलयुग का अंत होगा, दूसरा महाविनाश होगा और तीसरा आएगा एक नया युग। कलयुग का अंत हो चुका है और महाविनाश का समय चल रहा है और इसके कुछ काल बाद नए युग का प्रारंभ होगा। ऐसे में जितनी जल्दी हो सके हनुमानजी की शरण में आ जाएं। उनकी शरण में जाने के बात किसी भी तरह से डरने की कोई जरूरत नहीं।
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2.
और देवता चित्त न धरहीं।
हनुमत सेई सर्व सुख करहीं।।
अर्थात: अन्य देवताओं पर ध्यान (चित्त) न करें। हनुमान जी की सेवा करने से सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।
टिप्पणी: काल मंडराएगा तो सिर्फ हनुमानजी की भक्ति ही बचाएगी, क्योंकि कलयुग में हनुमानजी ही एकमात्र रक्षक और सुखदाता हैं। वे अपने और रामभक्त को हर तरह के ग्रह दोष, भूत दोष, त्रिदोष और सभी तरह के संकट से तुरंत ही बचाते हैं, लेकिन बस आपको यह कहना है कि हनुमानजी आज से हम तुम्हारे और तुम हमारे जिंदगीभर के लिए। फिर चाहे सुख हो या दुख आपके ही हाथों में हमारी जीवन की नाव है।
3.
संकट तै हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।
अर्थात: हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।
टिप्पणी: चौपाई की दूसरा हिस्सा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें लिखा है कि जो भी भक्त मन से, कर्म से और वचन अर्थात बोलने से अर्थात तीनों में एकरूप रहकर जो हनुमानजी की भक्ति या ध्यान करता है हनुमानजी तुरंत ही उपस्थित होकर उसके संकट का हरण कर लेते हैं। कई लोग है जिनका हनुमान चालीसा पढ़ते या हनुमान जी की भक्त करते समय ध्यान कहीं ओर रहता है या वे पाठ के बीच में ही वे दूसरों से बात करने लगते हैं। पाठ न भी कर रहे हो या हनुमानजी से किसी बात के लिए याचना भी कर रहे हों तो भी उनका ध्यान हनुमानजी को छोड़कर कहीं ओर रहता है। ऐसे में हनुमानजी से कांटेक्ट बन रही पाता है।

