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कश्मीर में टल रही हैं शादियां, क्या है बेरोजगारी और महंगाई से कनेक्शन?

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Jammu Kashmir News in hindi : कश्मीर में बढ़ती बेरोजगारी की वजह से शादियां लगातार टल रही हैं; कई युवा लड़के-लड़कियां इसकी मुख्य वजह आर्थिक अस्थिरता और शादी में होने वाले भारी खर्च को बताते हैं। कई कश्‍मीरी युवाओं का कहना था कि पक्की नौकरी न होने की वजह से उनके लिए शादी के बारे में सोचना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि वे पारंपरिक रस्मों-रिवाजों में होने वाले बढ़ते खर्च को उठा पाने में असमर्थ हैं।
 
उत्तरी कश्मीर के रहने वाले आमिर (बदला हुआ नाम) कहते थे कि मेरी सगाई को दो साल हो चुके हैं, लेकिन हमने अभी तक शादी की तारीख तय नहीं की है, क्योंकि मैं अभी भी बेरोजगार हूं। 
 
एक और युवा, सना (बदला हुआ नाम) के बकौल, भविष्य को लेकर अनिश्चितता की वजह से परिवार वाले शादी की योजनाओं को आगे बढ़ाने में हिचकिचा रहे हैं। उसका कहना था कि हमारे माता-पिता चाहते हैं कि हम घर बसा लें, लेकिन बिना किसी पक्की आमदनी के यह बहुत तनावपूर्ण हो जाता है। आजकल हर चीज बहुत महंगी हो गई है।
 
कई लोगों का कहना था कि पिछली पीढ़ियों को सरकारी नौकरियों का फायदा मिला था, जिससे उनके लिए शादियां करना आसान हो जाता था।
 
श्रीनगर के फैसल (बदला हुआ नाम) कहते थे कि हमारे पिताओं के पास सरकारी नौकरियां थीं, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली हुई थी। आज, अगर किसी के पास नौकरी है भी, तो उसकी तनख्वाह इतनी कम होती है कि उससे शादी का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है।
 
स्थानीय लोगों का कहना था कि कश्मीर में शादियों का खर्च काफी बढ़ गया है; अब एक आम शादी में औसतन 30 लाख से 40 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इसमें सोने पर होने वाला खर्च भी शामिल है, जो आजकल बहुत महंगा हो गया है। कुछ अमीर परिवारों में, खासकर रिटायर्ड अधिकारियों और बड़े व्यापारियों के परिवारों में, शादी का खर्च 1 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है।
 
कश्मीर यूनिवर्सिटी के एक पोस्टग्रेजुएट छात्र बताते थे कि हम सादगी से शादी करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन समाज की उम्मीदों की वजह से ऐसा करना मुश्किल हो जाता है। लोग चाहते हैं कि शादी में खूब धूम-धड़ाका हो, जिससे परिवारों पर काफी दबाव आ जाता है।
 
इस मुद्दे का जिक्र विधानसभा में भी किया गया है। विधायक‍ रफीक अहमद नाइक ने हाल ही में विधानसभा में इस बात पर चिंता जताई कि इस क्षेत्र में बेरोजगारी की वजह से शादियों की दर लगातार गिर रही है।
इस साल फरवरी में जम्मू कश्मीर विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस केंद्र शासित प्रदेश में बेरोज़गारी की दर 6.7 फीसदी है, जो कि राष्ट्रीय औसत (3.5 फीसदी) से काफी अधिक है।
 
खबरों के मुताबिक, कश्मीर यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि इस केंद्र शासित प्रदेश में अविवाहित लोगों की आबादी 55 फीसदी है, जो कि राष्ट्रीय औसत (49.5 फीसदी) से अधिक है।
 
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर में लगभग 2.5 लाख युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई पढ़े-लिखे युवा परेशान हैं; उनका आरोप है कि सरकार उनकी चिंताओं के प्रति उदासीन है। वे इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि रोजगार चाहने वालों के लिए पर्याप्त नौकरी के अवसर उपलब्ध नहीं हैं।
 
विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जब तक रोजगार के अवसर बेहतर नहीं होते और भव्य शादियों से जुड़े सामाजिक रीति-रिवाजों पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक देर से शादी करने का यह चलन जारी रहने की संभावना है।
लेखक के बारे में
सुरेश एस डुग्गर
सुरेश डुग्गर वेबदुनिया के लिए जम्मू कश्मीर से समाचार संकलन के लिए अधिकृत हैं। वे तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।.... और पढ़ें
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