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kshamavani parva 2021: आत्मा की शुद्धि का पर्व है 'क्षमावाणी', माफी मांगने का महापर्व

मंगलवार,सितम्बर 21, 2021
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भगवान महावीर के अनुसार 'क्षमा वीरों का आभूषण है'। क्षमा मांगने से अहंकार ढलता और गलता है, तो क्षमा करने से सुसंस्कार पलता और चलता है। पर्युषण पर्व आदान-प्रदान का पर्व है
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10 सितंबर से दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व शुरू हो गए हैं। इस पर्व के अंतर्गत गुरुवार, 16 सितंबर 2021 को सुगंध/धूप दशमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन धूप खेवन का पर्व मनाया जाएगा। प्रतिवर्ष जैन धर्म में भाद्रपद शुक्‍ल दशमी को सुगंध दशमी का पर्व ...
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पर्युषण का अर्थ है परि यानी चारों ओर से, उषण यानी धर्म की आराधना। श्वेतांबर और दिगंबर समाज के पर्युषण पर्व भाद्रपद मास में मनाए जाते हैं। श्वेतांबर के व्रत समाप्त होने के बाद दिगंबर समाज के व्रत प्रारंभ होते हैं। 3 से 10 सितंबर तक श्वेतांबर और 10 ...
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इस वर्ष 10 सितंबर 2021 से जहां दिगंबर जैन समुदाय के पर्युषण महापर्व की शुरुआत होगी, वहीं श्वेतांबर जैन समुदाय संवत्सरी पर्व पर्व मनाएंगे। पंचांग तिथि के हिसाब से यह पर्व एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
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जैन धर्म के पर्युषण पर्व मानव को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा है। गणेश चतुर्थी या ऋषि पंचमी को संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। उस दिन लोग उपवास रखते हैं और स्वयं के पापों की आलोचना
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श्वेतांबर समाज 8 दिन तक पर्युषण पर्व मनाते हैं जिसे 'अष्टान्हिका' कहते हैं जबकि दिगंबर 10 दिन तक मनाते हैं जिसे वे 'दसलक्षण' कहते हैं। 3 से 10 सितंबर तक श्वेतांबर और 10 सितंबर से दिगंबर समाज के 10 दिवसीय पयुर्षण पर्व की शुरुआत होगी। 10 दिन तक उपवास ...
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9 सितंबर 2021, गुरुवार को रोटतीज व्रत मनाया जा रहा है। रोट तीज का व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, हिन्दू धर्मानुसार इस दिन हरतालिका तीज पर्व मनाया जाता है।
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दिगंबर जैन समाज में 9 सितंबर 2021, गुरुवार को रोट तीज पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सभी धर्मावलंबी मंदिरों में बैठकर ही श्री रोट तीज व्रत कथा को पढ़ते और सुनते हैं, देश-विदेश में बैठे सभी पाठकों के लिए यहां प्रस्तुत हैं श्री रोटतीज व्रत की कथा, आप भी ...
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9 सितंबर को जैन धर्म का रोटी तीज व्रत रहेगा। यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तीज को मनाया जाता है। यह पर्व खासकर दिगंबर जैन समाज मनाता है। दिगंबर जैन समाज बड़ी पक्षाल के बाद गुरुवार को रोट तीज मनाएगा। आओ जानते हैं‍ कि क्या है यह रोटीतीज का पर्व।
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श्वेतांबर और दिगंबर समाज के पर्युषण पर्व भाद्रपद मास में मनाए जाते हैं। श्वेतांबर के व्रत समाप्त होने के बाद दिगंबर समाज के व्रत प्रारंभ होते हैं। 3 से 10 सितंबर तक श्वेतांबर और 10 सितंबर से दिगंबर समाज के 10 दिवसीय पयुर्षण पर्व की शुरुआत होगी। 10 ...
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शुक्रवार, 3 सितंबर 2021 से श्वेतांबर जैन समाज के 8 दिवसीय पर्युषण पर्व प्रारंभ हो गए हैं। पर्युषण पर्व जैन धर्मावलंबियों का आध्यात्मिक त्योहार माना गया है।
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मंगलवार, 31 अगस्त 2021 जैन धर्म में महत्वपूर्ण माना गया रोहिणी व्रत किया जा रहा है। यह व्रत हर माह किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र रोहिणी भी है।
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दिगंबर जैन जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। यह व्रत आत्‍मा के विकारों को दूर कर कर्म बंध से छुटकारा दिलाने में सहायक है।
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श्वेतांबर जैन समाज के पर्यूषण पर्व के पूर्व शुरू होने वाली 15 दिवसीय अक्षय निधि तपस्या की शुरुआत हुई। कल स्थापना के साथ ही संकल्प लेकर इस तपस्या में 15 दिन तक एकासन एवं संवत्सरी के दिन उपवास कर इसे पूर्ण किया जाएगा।
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जैन समुदाय की मान्यताओं में रक्षा बंधन की कथा कुछ अलग है। यह कथा एक मुनि द्वारा 700 मुनियों की रक्षा करने पर आधारित है। यह कहानी ही रक्षा बंधन के त्योहार का आधार है।
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जैन धर्म में आषाढ़ शुक्ल पंचमी का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज इस सदी के महान संत जिन्होंने अपने त्याग से धर्म की राह दिखाई हैं। ऐसे गुरु संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के 54वे दीक्षा दिवस पर शत्-शत् नमन।
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चातुर्मास का हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म में खासा महत्व है। तीनों ही धर्म के संत इसका कड़ाई से पालन करते हैं। हिन्दू धर्म के सभी बड़े त्यौहार इन्ही चौमासा के भीतर आते हैं. सभी अपनी मान्यतानुसार इन त्यौहारों को मनाते हैं एवं धार्मिक अनुष्ठान भी करते ...
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जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। जैन समुदाय में रोहिणी व्रत 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत किया जाता होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है।
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जैन मान्यता है कि पूर्णता प्राप्त करने से पूर्व तक तीर्थंकर मौन रहते हैं। अत: आदिनाथ को एक वर्ष तक भूखे रहना पड़ा। इसके बाद वे अपने पौत्र श्रेयांश के राज्य हस्तिनापुर पहुंचे।
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प्राचीन जैन ग्रंथ 'उत्तर पुराण' में तीर्थंकरों का वर्णन मिलता है। इस ग्रंथ के अनुसार वैशाली के राजा चेटक के दस पुत्र और सात पुत्रियां थीं।
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सबके मंगल के साथ हमारा अमंगल न हो, यही धर्म है। इसीलिए कहते हैं कि धर्म मंगल है। कौन-सा धर्म? जो न दूसरों पर और न ही स्वयं पर हिंसा होने दे, वही अहिंसक धर्म ही मंगल है।
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चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को जैन समाज द्वारा पूरे भारत में भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप मे 'महावीर जयंती' मनाई जाती है।
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जय महावीर दया के सागर, जय श्री सन्मति ज्ञान उजागर। शांत छवि मूरत अति प्यारी, वेष दिगम्बर के तुम धारी।
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यहां पढ़ें जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की 3 खास आरतियां।
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जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। फरवरी 2021 में यह व्रत 20 फरवरी, शनिवार को रखा जाएगा। यहां पढ़ें व्रत की कथा
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ऋषभदेव आदिनाथ भगवान का जन्म युग के आदि में राजा नाभिराय जी के यहां पर माता मरूदेवी की कोख में हुआ था। उन्हें जन्म से ही सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान था।
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जैन शब्द जिन शब्द से बना है। जिन बना है 'जि' धातु से जिसका अर्थ है जीतना। जिन अर्थात जीतने वाला। जिसने स्वयं को जीत लिया उसे जितेंद्रिय कहते हैं। भगवान महावीर के काल में ही विदेहियों और श्रमणों की इस परंपरा का नाम जिन (जैन) पड़ा, अर्थात जो अपनी ...
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जैन धर्म के 24 तीर्थंकर है। प्रथम ऋषभनाथ हैं तो अंतिम महावीर स्वामी। भगवान पार्श्वनाथ 23वें तीर्थंकर थे और उनकी जयंती पौष कृष्ण पक्ष की दशमी को मनाई जाती है। आओ जानते हैं उनके बारे में 10 खास बातें।
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जैन पुराणों के अनुसार तीर्थंकर बनने के लिए पार्श्वनाथ को पूरे नौ जन्म लेने पड़े थे। पूर्व जन्म के संचित पुण्यों और दसवें जन्म के तप के फलत: ही वे 23वें तीर्थंकर बने।
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जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म आज से लगभग तीन हजार वर्ष पूर्व पौष कृष्ण एकादशी के दिन वाराणसी में हुआ था। पिता का नाम अश्वसेन और माता का नाम वामादेवी था।
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यहां पढ़ें भगवान पार्श्वनाथ का पावन चालीसा का संपूर्ण पाठ।
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विश्व-वंदनीय जैन संत आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महाराज भारत भूमि के प्रखर तपस्वी, चिंतक, कठोर साधक, लेखक हैं। जानिए आचार्यश्री आचार्यश्री विद्यासागरजी का जीवन परिचय......
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