इंटरनेट 2010 : विवादों से खुलासों तक
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गौरतलब है कि गूगल, स्काइप, वीपीएन और कुछ अन्य नेटवर्कों के जरिए आँकड़ों के आदान-प्रदान पर देश की सुरक्षा एजेंसियों की पहुँच नहीं है। अगस्त माह में फेसबुक भारत में ऑर्कुट तथा याहू जैसी प्रतिस्पर्धियों को पछाड़ते हुए शीर्ष सोशल नेटवर्किंग साइट बन गई। इस साल जुलाई में उसके विजिटर्स की संख्या 2.09 करोड़ रही।
मई माह में दुनिया के तीन देशों में वेब एड्रेस अंग्रेजी में लिखने की बाध्यता खत्म हो गई। मिस्र, सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ऐसे पहले तीन देश बन गए हैं जहाँ अरबी लिपि में वेब एड्रेस का इस्तेमाल किया जा सकता है। चीन समेत कुछ देश पहले ही ऐसी प्रणाली विकसित कर चुके हैं जिससे किसी भी वेब एड्रेस को अपनी ही भाषा में लिखा जा सकेगा।
इंटरनेट दुनिया के ‘बादशाह’ गूगल को इस साल जनवरी में चीनी लेखकों से माफी मांगी पड़ी। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने चीनी कॉपीराइट का उल्लंघन कर चीनी किताबों को अपने डिजिटल लाइब्रेरी प्रोजेक्ट के लिए स्कैन किया। किताबों की स्कैनिंग से चीनी लेखकों में गुस्से की लहर दौड़ गई थी।
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मई में फेसबुक के एक पन्ने पर पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों की प्रतियोगिता को लेकर लाहौर उच्च न्यायालय ने अस्थायी तौर पर इस पर पाबंदी के लिए कहा था, जिसके मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को इस सोशल नेटवर्किंग साइट को ब्लॉक करने का निर्देश दिया।
इसके अगले दिन पाकिस्तान में यू ट्यूब को और उसके बाद वाले दिन ट्विटर को भी ब्लॉक कर दिया गया। पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश ने भी पैगम्बर मोहम्मद साहब के कथित कार्टून और मुल्क के कई नेताओं की ‘अप्रिय’ तस्वीरें अपलोड किए जाने की वजह से सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर पाबंदी लगा दी।
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