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Last Modified: वॉशिंगटन , रविवार, 29 मार्च 2026 (07:54 IST)

US-Iran Conflict : ईरान के साथ महायुद्ध की तैयारी? समंदर में उतरा अमेरिका का सबसे घातक युद्धपोत USS Tripoli, 3500 कमांडो तैनात

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ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को और घातक बना दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, लगभग 3,500 नौसैनिकों और मरीन कमांडोज के साथ युद्धपोत USS त्रिपोली (LHA-7) 27 मार्च को अपने निर्धारित ऑपरेशनल ज़ोन में पहुंच गया है। जापान के अपने बेस से रवाना हुआ यह विशालकाय 'एम्फीबियस असॉल्ट शिप' अब एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है। 
 

खार्ग द्‍वीप पर ट्रंप की नजर

अमेरिका की इस बड़ी हलचल ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि वॉशिंगटन, ईरान के भीतर किसी जमीनी ऑपरेशन (Ground Operation) की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि इन सैनिकों को ईरान के तट पर स्थित महत्वपूर्ण तेल निर्यात टर्मिनल 'खार्ग द्वीप' जैसे रणनीतिक ठिकानों की मारक क्षमता के भीतर तैनात किया जाएगा।
 
 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद से स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ये अतिरिक्त सैनिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य विकल्पों का एक बड़ा दायरा प्रदान करेंगे। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उनकी ईरान के खिलाफ सीधे जमीनी युद्ध में शामिल होने की कोई मंशा नहीं है।

नौसेना का सबसे आधुनिक हथियार है USS त्रिपोली

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, USS त्रिपोली अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक जहाजों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह F-35 लाइटनिंग II जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स और अन्य हमलावर विमानों को ऑपरेट करने में सक्षम है। USS त्रिपोली (LHA 7) पर सवार अमेरिकी नाविक और मरीन 27 मार्च को सेंट्रल कमांड के जिम्मेदारी क्षेत्र में पहुंच गए हैं। यह युद्धपोत त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 31वें मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के फ्लैगशिप के रूप में काम करेगा। 
 
सेंट्रल कमांड द्वारा जारी तस्वीरों में सैनिक युद्ध के लिए तैयार (Combat Fatigues) नजर आ रहे हैं। ये अतिरिक्त मरीन अब मध्य पूर्व में पहले से तैनात करीब 50,000 अमेरिकी सैनिकों की शक्ति को और बढ़ाएंगे। इस बेड़े में न केवल सैनिक हैं, बल्कि अतिरिक्त परिवहन और हमलावर विमान भी शामिल किए गए हैं। सेंट्रल कमांड के आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद से अब तक 11,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 150 से ज्यादा ईरानी जहाजों को क्षतिग्रस्त या नष्ट कर दिया गया है। हवाई हमलों में 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से जुड़ी सुविधाएं, वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल साइट और हथियार उत्पादन बुनियादी ढांचे को तबाह किया गया है। Edited by : Sudhir Sharma
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