6 दिन तक मृत बच्चे को पीठ पर लेकर तैरती रही मां डॉल्फिन, VIDEO देख नम हो जाएंगी आंखें
समुद्र की अथाह गहराइयों से सामने आई एक तस्वीर ने दुनिया भर के लोगों को भावुक कर दिया है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तट पर शोधकर्ताओं ने 'फ्रैगल' (Fraggle) नाम की एक बॉटलनोज डॉल्फिन को अपने महज दो सप्ताह के मृत शावक को कई दिनों तक पीठ और सिर के सहारे पानी की सतह पर तैराते हुए देखा। यह मार्मिक दृश्य ड्रोन कैमरे में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लाखों लोगों की आंखें नम हो गईं।
समुद्री जीवों पर शोध करने वाली संस्था जियोग्राफ मरीन रिसर्च ने इस वीडियो को साझा करते हुए बताया कि यह सिर्फ एक मां का अपने बच्चे के प्रति प्रेम नहीं, बल्कि शोक और बिछड़ने के दर्द की ऐसी कहानी है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
पहली बार नहीं टूटा फ्रैगल का दिल
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह हादसा फ्रैगल के साथ पहली बार नहीं हुआ। वह इससे पहले भी अपने चार शावकों को खो चुकी है। इस बार भी उसका बच्चा जन्म के महज दो सप्ताह बाद दुनिया छोड़ गया।
रिसर्च टीम ने बताया कि शावक का जन्म सर्दियों के मौसम में हुआ था, जब समुद्र का तापमान कम होने के कारण उसके जीवित रहने की संभावना पहले से ही कम थी। कुछ दिन पहले उसकी सांसें असामान्य रूप से तेज चलती देखी गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि निमोनिया या फेफड़ों में गंभीर संक्रमण उसकी मौत की संभावित वजह हो सकता है।
'फ्रैगल' (Fraggle) नाम की एक मां डॉल्फिन कई दिनों तक अपने मृत शावक को साथ लेकर तैरती रही। डॉल्फिन अपने मृत बच्चों को कुछ समय तक अपने साथ लेकर चलती हैं। इसे उनके शोक व्यक्त करने का एक स्वाभाविक व्यवहार माना जाता है। #dolphin #fraggle #sea #mother#calf pic.twitter.com/itXqZd0NOl
— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) August 5, 2026
मृत बच्चे को छोड़ने को तैयार नहीं थी मां
वीडियो में फ्रैगल अपने मृत शावक को लगातार पीठ और सिर के सहारे पानी की सतह पर संभालती दिखाई देती है। वह उसे एक पल के लिए भी खुद से अलग नहीं होने देती, मानो अब भी उसे जिंदा रखने की कोशिश कर रही हो।
समुद्री जीव वैज्ञानिक बताते हैं कि डॉल्फिन अत्यंत बुद्धिमान और सामाजिक जीव होती हैं। जब किसी मां डॉल्फिन का शावक मर जाता है, तो वह कई घंटों या कई दिनों तक उसके शव को अपने साथ लेकर तैरती रहती है। वैज्ञानिक इसे 'मॉर्निंग बिहेवियर' (Mourning Behaviour) यानी शोक व्यक्त करने का प्राकृतिक तरीका मानते हैं।
हालांकि, अंततः उसे जीवित रहने के लिए अपने शावक को छोड़ना पड़ता है, क्योंकि भोजन की तलाश करना उसके लिए जरूरी होता है।
दुख की घड़ी में पूरा समूह बना सहारा
इस वीडियो का सबसे भावुक पहलू सिर्फ मां और उसके बच्चे का रिश्ता नहीं, बल्कि उसके पूरे समूह का साथ भी है। फुटेज में देखा जा सकता है कि कई दूसरी डॉल्फिन लगातार फ्रैगल के आसपास तैरती रहीं। वे उसे अकेला छोड़कर नहीं गईं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कई बार समूह की दूसरी डॉल्फिन भी मृत शावक को संतुलित रखने में मदद करती हैं और शोक में डूबी मां की सुरक्षा करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉल्फिन और व्हेल जैसे समुद्री जीवों के सामाजिक रिश्ते बेहद मजबूत होते हैं। वे एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहते हैं और समूह के सदस्य की पीड़ा को भी महसूस करते हैं।
वीडियो ने छू लिया लोगों का दिल
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। करोड़ों लोग इसे देख चुके हैं और हजारों यूजर्स ने भावुक प्रतिक्रियाएं दी हैं।
कई लोगों ने लिखा कि यह दृश्य साबित करता है कि भावनाएं सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं हैं। एक यूजर ने कहा, "मां का प्यार हर प्रजाति में एक जैसा होता है।" वहीं दूसरे ने लिखा, "जिस तरह दूसरी डॉल्फिन उसके साथ बनी रहीं, उसने सबसे ज्यादा भावुक कर दिया।"
समुद्र से मिला एक बड़ा संदेश
फ्रैगल की कहानी केवल एक डॉल्फिन की कहानी नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि प्रेम, अपनापन, बिछड़ने का दर्द और शोक जैसी भावनाएं केवल इंसानों की दुनिया तक सीमित नहीं हैं। कभी-कभी प्रकृति ऐसे दृश्य दिखा देती है, जो बिना कुछ कहे हमें संवेदनशीलता, रिश्तों और साथ निभाने का सबसे बड़ा सबक सिखा जाते हैं।

