1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. अंतरराष्ट्रीय
  4. brics summit pakistan membership india terrorism pahalgam

BRICS में एंट्री चाहता है Pakistan, आतंकवाद पर भारत का रुख क्यों बन सकता है सबसे बड़ा रोड़ा? घोषणा-पत्र से आतंकिस्तान को बड़ी चेतावनी

modi_sharif
देश की राजधानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच पाकिस्तान की नजर एक बार फिर इस वैश्विक समूह पर है। पाकिस्तान लंबे समय से BRICS में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। उसने वर्ष 2023 में समूह की सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन किया था और अब उसे चीन और रूस के समर्थन की उम्मीद है। लेकिन पाकिस्तान की राह आसान नहीं है। BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा देशों की सहमति जरूरी होती है। ऐसे में भारत का रुख इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो जाता है। खासकर आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। ब्रिक्स में भारत का दबदबा देखकर पाकिस्तान बैचेन हो गया होगा। उसके प्रधानमंत्री और मंत्रियों की नींद उड़ गई होगी।

BRICS घोषणापत्र में आतंकवाद पर कड़ा संदेश

 
नई दिल्ली BRICS Summit के दौरान आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख सामने आया है। घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और उसके लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अलग-अलग तरीकों की निंदा की गई है। घोषणापत्र में आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का विरोध किया गया है। साथ ही आतंकवाद, उसकी फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया है।
 
भारत के नजरिए से यह संदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद को समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा रुख अपनाता रहा है।
 

पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र

 
BRICS घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई है। इस हमले में 26 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया है। घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयासों और आतंकियों तथा आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता लगातार उठाई है।
 

पाकिस्तान BRICS में क्यों शामिल होना चाहता है?

 
पाकिस्तान ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन किया था। उसके लिए इस समूह में शामिल होना आर्थिक और कूटनीतिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
 
BRICS में दुनिया की कई बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। समूह में शामिल होने से पाकिस्तान को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक सहयोग, निवेश और व्यापार के नए अवसर मिलने की उम्मीद हो सकती है।
 
इसके अलावा BRICS की बढ़ती वैश्विक भूमिका को देखते हुए पाकिस्तान के लिए इस समूह का हिस्सा बनना उसकी विदेश नीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
 

चीन और रूस के समर्थन पर पाकिस्तान की नजर

 
पाकिस्तान को BRICS में प्रवेश के लिए चीन और रूस के समर्थन की उम्मीद है। चीन पहले से पाकिस्तान का करीबी रणनीतिक साझेदार है, जबकि रूस के साथ भी पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों में अपने संबंध बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
 
लेकिन केवल कुछ देशों का समर्थन पाकिस्तान के लिए पर्याप्त नहीं होगा। नए सदस्य को लेकर BRICS के मौजूदा सदस्यों के बीच सहमति जरूरी है। यही वजह है कि भारत का रुख पाकिस्तान की सदस्यता की कोशिश में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
 

पाकिस्तान की मीडिया की भी BRICS पर नजर

 
नई दिल्ली में हो रहे BRICS Summit को लेकर पाकिस्तान की मीडिया में भी लगातार चर्चा हो रही है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार Dawn समेत वहां के मीडिया संस्थान भारत में हो रही बैठकों और सम्मेलन के फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया में यह चर्चा भी है कि भारत BRICS जैसे वैश्विक मंच का इस्तेमाल अपनी कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए कर रहा है। वहीं पाकिस्तान अभी इस समूह का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है।
 

भारत का रुख पाकिस्तान के लिए क्यों अहम?

 
BRICS का विस्तार केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है। नए सदस्य के शामिल होने से समूह की राजनीतिक और रणनीतिक दिशा भी प्रभावित हो सकती है। भारत के लिए आतंकवाद एक बड़ा सुरक्षा मुद्दा है। इसलिए पाकिस्तान की सदस्यता पर चर्चा होने की स्थिति में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रह सकते हैं।
 
हालांकि, किसी भी देश की सदस्यता को लेकर अंतिम निर्णय BRICS के आधिकारिक तंत्र और सदस्य देशों की सहमति पर निर्भर करेगा। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत अकेले किसी देश की सदस्यता रोक सकता है।
 

BRICS घोषणापत्र की प्रमुख बातें

 
BRICS Summit के घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया है।
 
1.  पहलगाम आतंकी हमले की निंदा : 22 अप्रैल 2025 के हमले की कड़ी निंदा की गई और 26 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया।
 
2. आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख: आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की गई।
 
3. आतंकवाद को धर्म से जोड़ने का विरोध: आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने के खिलाफ रुख अपनाया गया।
 
4. आतंकवाद की फंडिंग पर कार्रवाई: आतंकवाद और उसकी फंडिंग के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया।
 
5. आतंकियों को पनाह देने वालों पर कार्रवाई : आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की बात कही गई।
 
6. संयुक्त राष्ट्र की भूमिका : अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र संधि को जल्द अपनाने की मांग की गई।
 
7. एकतरफा टैरिफ पर चिंता : एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता जताई गई और WTO के नियमों के अनुरूप व्यापारिक कदम उठाने पर जोर दिया गया।
 
8. परमाणु खतरे पर चिंता : परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव को लेकर चिंता जताई गई।
 
9. भारत की BRICS अध्यक्षता की सराहना : BRICS देशों ने भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS Plus और Outreach संवाद की सराहना की।
 

पाकिस्तान के लिए संदेश क्या?

 
BRICS Summit के दौरान आतंकवाद पर सामने आया कड़ा रुख पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान BRICS में शामिल होना चाहता है, लेकिन भारत के साथ उसके संबंधों में आतंकवाद का मुद्दा सबसे संवेदनशील विषयों में से एक है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने एक तरफ BRICS में जगह बनाने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ उसे इस समूह के बढ़ते राजनीतिक और रणनीतिक महत्व के बीच अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले समय में पाकिस्तान को BRICS की सदस्यता के लिए कितना समर्थन मिलता है और भारत समेत मौजूदा सदस्य देश उसके आवेदन पर किस तरह का रुख अपनाते हैं।
अगला लेख
BRICS Summit 2026 : BRICS Summit 2026: PM मोदी-शी जिनपिंग की अहम मुलाकात, सीमा पर शांति से लेकर व्यापार तक इन मुद्दों पर बनी सहमति