दिवाली से पहले इंदौर में ध्वनि प्रदूषण का धमाका, चौंका रहे हैं प्रदूषण के ये आंकड़े
दिवाली के पहले इंदौर में ध्वनि प्रदूषण का बम फूटा है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें इंदौर में ध्वनि प्रदूषण को लेकर सामने आए आंकड़े चौंका रहे हैं। दरअसल,दिवाली से पहले ही 29 घोषित शांत क्षेत्रों में मानक सीमा से दो गुना अधिक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार अस्पतालों व विश्वविद्यालय परिसर में शोर 85 डेसिबल तक पहुंच गया है, जो बच्चों व बुजुर्गों के लिए घातक है।
बता दें कि शहर में ध्वनि प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ चुका है। जिन 29 स्थानों को प्रशासन द्वारा शांत क्षेत्र (साइलेंस जोन) घोषित किया गया है, वहां भी शोर का स्तर निर्धारित मानक सीमा से दो गुना अधिक दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण छोटे बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। इसके अलावा मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों और परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति बेहद नुकसानदायक साबित हो रही है।
हाई कोर्ट के निर्देशों की धज्जियां : माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला प्रशासन ने शहर के 29 प्रमुख स्थानों को शांत क्षेत्र घोषित किया था। इसके बावजूद पूरा शहर तेज आवाज के प्रभाव में है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रियल टाइम निगरानी प्रणाली के आंकड़ों से पता चलता है कि विभिन्न मापन केंद्रों पर शोर का अधिकतम स्तर मानक सीमा से लगभग दोगुना होकर 70 से 85 डेसिबल तक पहुंच रहा है।
मानक सीमा से दोगुना ध्वनि प्रदूषण : रविवार को साप्ताहिक अवकाश के दिन भी भंवरकुआं स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर में अधिकतम 80 डेसिबल और विजय नगर बोर्ड ऑफिस रहवासी क्षेत्र में 85 डेसिबल तक शोर दर्ज किया जा रहा है। जबकि भंवरकुआं में यह 40 और विजय नगर में यह 45 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। इस तरह यह ध्वनि प्रदूषण मानक सीमा से दोगुने से भी अधिक हो रहा है।
कौन-कौन से स्थान शामिल : एमवाय अस्पताल, जिला अस्पताल, बॉम्बे अस्पताल, सीएचएल अस्पताल, भंडारी अस्पताल, अरबिंदो सांवेर रोड, मानसिक चिकित्सालय बाणगंगा, चोइथराम अस्पताल, गोकुलदास अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल, डेंटल अस्पताल, यूनिक अस्पताल, दशहरा मैदान क्षेत्र, कोकिलाबेन निपानिया, बीमा नंदानगर, एमटीएच कोठारी मार्केट, अपोलो राजश्री विजय नगर, सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, जूपिटर रिंग रोड और मेडिकेयर तिलक नगर।
क्या है ध्वनि प्रदूषण के कारण : सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम के दौरान चालकों द्वारा बेवजह और अत्यधिक तेज आवाज वाले हॉर्न का प्रयोग करना ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है। व्यावसायिक बाजारों, जुलूसों और आवासीय क्षेत्रों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में उच्च डेसिबल वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल होने से भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। इसके साथ आधारभूत संरचनाओं, फ्लाईओवर और मेट्रो निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी-भरकम ड्रिलिंग मशीनें भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने का काम करती हैं। वहीं औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों में निरंतर चलने वाली तेज आवाज की मशीनें तथा भारी जनरेटर भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने का काम करते हैं।
कितना खतरनाक है हेल्थ के लिए : वैज्ञानिक डीके वाघेला का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक तेज शोर के संपर्क में रहने से इंसान की सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ता है। तेज आवाज के कारण शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्राव होता है, जिससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ता है और हृदय रोग का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है। अध्ययनरत विद्यार्थियों, वृद्धजनों, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह ध्वनि प्रदूषण अत्यंत घातक साबित हो सकता है।
हाई कोर्ट के निर्देशों की धज्जियां : माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला प्रशासन ने शहर के 29 प्रमुख स्थानों को शांत क्षेत्र घोषित किया था। इसके बावजूद पूरा शहर तेज आवाज के प्रभाव में है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रियल टाइम निगरानी प्रणाली के आंकड़ों से पता चलता है कि विभिन्न मापन केंद्रों पर शोर का अधिकतम स्तर मानक सीमा से लगभग दोगुना होकर 70 से 85 डेसिबल तक पहुंच रहा है।
मानक सीमा से दोगुना ध्वनि प्रदूषण : रविवार को साप्ताहिक अवकाश के दिन भी भंवरकुआं स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर में अधिकतम 80 डेसिबल और विजय नगर बोर्ड ऑफिस रहवासी क्षेत्र में 85 डेसिबल तक शोर दर्ज किया जा रहा है। जबकि भंवरकुआं में यह 40 और विजय नगर में यह 45 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। इस तरह यह ध्वनि प्रदूषण मानक सीमा से दोगुने से भी अधिक हो रहा है।
क्या है ध्वनि प्रदूषण के कारण : सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम के दौरान चालकों द्वारा बेवजह और अत्यधिक तेज आवाज वाले हॉर्न का प्रयोग करना ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है। व्यावसायिक बाजारों, जुलूसों और आवासीय क्षेत्रों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में उच्च डेसिबल वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल होने से भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। इसके साथ आधारभूत संरचनाओं, फ्लाईओवर और मेट्रो निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी-भरकम ड्रिलिंग मशीनें भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने का काम करती हैं। वहीं औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों में निरंतर चलने वाली तेज आवाज की मशीनें तथा भारी जनरेटर भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने का काम करते हैं।
कितना खतरनाक है हेल्थ के लिए : वैज्ञानिक डीके वाघेला का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक तेज शोर के संपर्क में रहने से इंसान की सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ता है। तेज आवाज के कारण शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्राव होता है, जिससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ता है और हृदय रोग का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है। अध्ययनरत विद्यार्थियों, वृद्धजनों, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह ध्वनि प्रदूषण अत्यंत घातक साबित हो सकता है।

