इजराइल और ईरान के बीच भीषण संघर्ष का गुजरात के उद्योगों पर सीधा असर
Israel and Iran conflict: इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष का सीधा असर अब गुजरात के व्यापार और उद्योग जगत पर दिखने लगा है। विशेष रूप से मध्य पूर्व के देशों में समुद्री मार्गों पर बढ़ती अनिश्चितता के कारण समुद्री व्यापार पर बड़ा ब्रेक लग गया है। मध्य गुजरात के उद्योग क्षेत्र से मिडिल ईस्ट के देशों में निर्यात होने वाली मशीनरी का व्यापार फिलहाल पूरी तरह से रुक गया है, जिससे स्थानीय व्यापारियों में भारी चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
शिपिंग कंपनियों ने नई बुकिंग पर लगाई रोक
वर्तमान स्थिति को देखते हुए कई शिपिंग कंपनियों ने सावधानी के तौर पर नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है। कई कंसाइनमेंट, जो पहले ही जहाजों में लोड किए जा चुके थे, उन्हें सुरक्षा कारणों से बंदरगाहों पर ही रोक दिया गया है। विशेष रूप से बड़ी बहुराष्ट्रीय (MNC) शिपिंग कंपनियों ने अपना संचालन (Operations) स्थगित कर दिया है, जिससे नए ऑर्डर्स पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं और निर्यातकों के करोड़ों रुपए के माल का अंबार लग गया है।
इंश्योरेंस कवरेज बंद होने से संकट गहराया
व्यापार ठप होने का एक मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों का निर्णय भी है। संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों को बीमा कंपनियों ने कवर देना बंद कर दिया है। इंश्योरेंस के बिना समुद्री मार्ग से माल भेजना बेहद जोखिम भरा होने के कारण शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को आगे बढ़ाने से रोक दिया है। इस स्थिति के कारण मध्य गुजरात के मशीनरी निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से सप्लाई चेन बाधित
वैश्विक व्यापार और तेल के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' मार्ग फिलहाल सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। ईरान और खाड़ी देशों के बीच स्थित यह मार्ग यूरोपीय देशों तक पहुंचने के लिए मुख्य विकल्प है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मार्ग में अवरोध पैदा होने से पूरी सप्लाई चेन चरमरा गई है। हालांकि अन्य समुद्री मार्ग भी उपलब्ध हैं, लेकिन युद्ध की आशंका को देखते हुए फिलहाल कोई भी पक्ष बड़ा जोखिम लेने को तैयार नहीं है।
सरकार से आर्थिक सहायता और हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय उद्योग संगठनों ने इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। व्यापारी चाहते हैं कि सरकार निर्यातकों के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करे या आर्थिक नुकसान के बदले सहायता प्रदान करे। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में गुजरात के एक्सपोर्ट बिजनेस पर इसके और भी घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala