भारत के 22 प्रसिद्ध और ऐतिहासिक देवी मंदिर, जानिए इनका धार्मिक महत्व और खास मान्यताएं
भारत की संस्कृति और सनातन परंपरा में देवी उपासना का अत्यंत विशेष स्थान है। उत्तर में बर्फीली चोटियों से लेकर दक्षिण के समुद्र तट तक माँ दुर्गा के विभिन्न रूप पूजे जाते हैं। चाहे 51 शक्तिपीठ हों, सिद्धपीठ हों या ऐतिहासिक कुलदेवी मंदिर, नवरात्रि और उत्सवों के दौरान लाखों श्रद्धालु यहाँ आशीर्वाद लेने आते हैं। प्रस्तुत आलेख में भारत के प्रमुख और आस्था से परिपूर्ण देवी मंदिरों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
1. वैष्णो देवी मंदिर (कटरा, जम्मू-कश्मीर)
त्रिकुटा पर्वत पर स्थित यह मंदिर भारत के सबसे पवित्र और प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ तीन प्राकृतिक पिंडियों के रूप में माँ वैष्णवी विराजित हैं।
2. तुलजा भवानी चामुंडा माता मंदिर (देवास, मध्य प्रदेश)
इंदौर के पास देवास टेकरी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर नवरात्रि में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहाँ की मूर्तियां स्वयंभू मानी जाती हैं और यह मंदिर देवास के राजघराने की कुलदेवी का भी स्थान है।
3. अम्बा जी मंदिर (बनासकांठा, गुजरात एवं कोल्हापुर, महाराष्ट्र)
गुजरात का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ गरबा और नवरात्रि उत्सवों का मुख्य केंद्र है, जहाँ माँ का कोई चित्र या मूर्ति नहीं बल्कि 'अंबे यंत्र' की पूजा होती है। इसी प्रकार महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को भी अंबाजी का प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है।
4. तुलजा भवानी मंदिर (सोलापुर, महाराष्ट्र)
तुलजापुर में स्थित यह मंदिर धार्मिक स्थल होने के साथ मराठा इतिहास की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी माँ तुलजा भवानी थीं और उन्होंने यहाँ विशेष साधना की थी।
5. दंतेश्वरी मंदिर (दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़)
बस्तर की अधिष्ठात्री देवी का यह ऐतिहासिक मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है और बस्तर के प्रसिद्ध दशहरा उत्सव के लिए जाना जाता है।
6. ज्वाला जी मंदिर (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश)
कांगड़ा घाटी का यह प्रसिद्ध धाम बिना किसी तेल, दीये या बाती के लगातार जलने वाली नौ प्राकृतिक ज्वालाओं (ज्योतियों) के लिए जाना जाता है, जिन्हें माँ दुर्गा का स्वरूप माना जाता है।
7. मैहर वाली माता / शारदा देवी मंदिर (सतना, मध्य प्रदेश)
त्रिकूट पर्वत पर 1063 सीढ़ियों की चढ़ाई पर स्थित यह मंदिर आल्हा और ऊदल की भक्ति गाथाओं और माँ शारदा के आशीर्वाद के लिए पूरे मध्य प्रदेश व देश में प्रसिद्ध है।
8. चामुंडेश्वरी मंदिर (मैसूर, कर्नाटक)
मैसूर की पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर महिषासुर का वध करने वाली माँ चामुंडा को समर्पित है, जहाँ मैसूर का दशहरा बहुत भव्य तरीके से मनाया जाता है।
9. कालीघाट काली मंदिर एवं दक्षिणेश्वर (कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
बंगाल की शक्ति उपासना का मुख्य केंद्र कालीघाट शक्तिपीठ है, जहाँ माँ सती के दाएँ पैर की अंगुलियाँ गिरी थीं। इसके साथ ही हुगली नदी के तट पर स्थित दक्षिणेश्वर मंदिर संत रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि रहा है।
10. मुंडेश्वरी देवी मंदिर (कैमूर, बिहार)
इसे भारत के सबसे पुराने जीवित मंदिरों में से एक माना जाता है, जहाँ माँ दुर्गा मुंडेश्वरी रूप में पूजी जाती हैं।
11. नैना देवी मंदिर (नैनीताल, उत्तराखंड)
नैनी झील के किनारे स्थित यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जहाँ मान्यतानुसार माँ सती के नेत्र गिरे थे।
12. विंध्याचल मंदिर (मिर्ज़ापुर, उत्तर प्रदेश)
गंगा किनारे स्थित यह मंदिर विंध्यवासिनी देवी का पवित्र धाम है, जहाँ देश भर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
13. मनसा देवी मंदिर (हरिद्वार, उत्तराखंड)
बिल्वा पर्वत पर स्थित यह मंदिर मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी मनसा को समर्पित है।
14. कन्याकुमारी अम्मन मंदिर (कन्याकुमारी, तमिलनाडु)
भारत के दक्षिणी छोर पर समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर देवी कन्या कुमारी का अति प्राचीन और पावन धाम है।
15. तारापीठ (बीरभूम, पश्चिम बंगाल)
यह तंत्र साधना का अति प्रसिद्ध केंद्र है, जहाँ माँ तारा (काली रूप) विराजित हैं। यह साधक बामाखेपा की भक्ति के लिए जाना जाता है।
16. पावागढ़ महाकाली मंदिर (पंचमहल, गुजरात)
ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु गरबा और दर्शन के लिए जुटते हैं।
17. बीजासन माता मंदिर (सलकनपुर, मध्य प्रदेश)
सीहोर जिले में 800 से अधिक सीढ़ियों की पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर मध्य प्रदेश का अत्यंत प्रतिष्ठित दुर्गा धाम है।
18. जीण माता मंदिर (सीकर, राजस्थान)
अरावली पहाड़ियों से घिरा यह मंदिर अपनी प्राचीनता और नवरात्रि में लगने वाले विशाल मेले के लिए विख्यात है।
19. त्रिपुरेश्वरी मंदिर (अंबाला, हरियाणा / पंजाब क्षेत्र)
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में देवी के त्रिपुर सुंदरी रूप का पूजन इस प्राचीन धाम में विशेष रूप से किया जाता है।
20. बिजासन माता मंदिर (इंदौर एवं दतिया, मध्य प्रदेश)
इंदौर में पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर मालवा क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है, जहाँ नवरात्रि पर मेला लगता है। इसके अलावा दतिया में भी बिजासन माता का प्रसिद्ध सिद्धपीठ स्थित है।
21. बगलामुखी मंदिर (नलखेड़ा, आगर मालवा, मध्य प्रदेश)
लखुंदर नदी के किनारे स्थित यह अति प्राचीन मंदिर तंत्र साधना और शत्रु बाधा निवारण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।
22. माँ हरसिद्धि मंदिर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
यह 51 शक्तिपीठों में शामिल है, जहाँ माँ सती की कोहनी गिरी थी। यहाँ स्थित दो विशाल दीप स्तंभ शाम के समय रोशनी से जगमगा उठते हैं।

