1. सामयिक
  2. विचार-मंथन
  3. करंट अफेयर्स
  4. history of pojk Pakistan occupied Jammu and Kashmir

पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK/PoJK): कब बनेगा भारत का हिस्सा, जानिए इतिहास

Protests in PoK
वर्तमान में POK में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। भारत की पश्चिमी सीमा पर स्थित पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) दशकों से भू-राजनीतिक विवाद और संघर्ष का विषय बना हुआ है। भारत सरकार ने अब इसका आधिकारिक नाम बदलकर 'पाक अधिकृत जम्मू और कश्मीर' (PoJK) कर दिया है। यह क्षेत्र सामरिक और कूटनीतिक दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1. PoK का निर्माण और नियंत्रण रेखा (LOC) का इतिहास

इतिहास और निर्माण: 1947 में भारत विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन उनके निर्णय में हुई देरी का फायदा उठाकर 1947-48 में पाकिस्तानी सेना ने कबाइलियों के साथ मिलकर कश्मीर पर हमला कर दिया और वे काफी भीतर तक घुस आए। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए श्रीनगर को बचाया और दुश्मनों को पीछे धकेला।
 
सीजफायर लाइन: सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण दोनों सेनाएं जहां थीं, वहीं रुक गईं। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के संयुक्त राष्ट्र (UN) जाने और वहां से युद्ध विराम की घोषणा होने के कारण इस मोर्चे को 'सीजफायर लाइन' कहा गया। इसके चलते मूल जम्मू-कश्मीर दो भागों में बंट गया और एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चला गया।
 
नियंत्रण रेखा (LOC) नामकरण: साल 1972 के शिमला समझौते के तहत इसी सीजफायर लाइन को 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (LOC) का नाम दिया गया।
 
भौगोलिक स्थिति: LOC की लंबाई लगभग 814 किलोमीटर है। यह कोई आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं बल्कि एक युद्ध विराम रेखा है। यह जम्मू के अखनूर सेक्टर से शुरू होकर पॉइंट NJ 9842 तक फैली हुई है। इसके पार का पूरा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) कहलाता है।
 

2. PoK का प्रशासनिक और भौगोलिक विभाजन

पाकिस्तान ने इस पूरे अवैध कब्जे वाले क्षेत्र को दो मुख्य प्रशासनिक हिस्सों में बांट रखा है:
 

अ. आजाद कश्मीर (तथाकथित)

क्षेत्रफल और जिले: इसका क्षेत्रफल लगभग 5,134 वर्ग मील (करीब 13,297 वर्ग किलोमीटर) है। इसमें कुल 10 जिले शामिल हैं।
राजधानी: इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है।
वास्तविक स्थिति: यह क्षेत्र वास्तव में जम्मू संभाग का ही हिस्सा है। जम्मू के भिम्बर, कोटली, मीरपुर, पुंछ हवेली, बाग, सुधान्ती, मुजफ्फराबाद, हट्टियां और हवेली जिले इसके अंतर्गत आते हैं। जम्मू संभाग के कुल 36,315 वर्ग किमी क्षेत्रफल में से लगभग 13,297 वर्ग किमी पर पाकिस्तान का कब्जा है।
 

ब. गिलगित-बाल्टिस्तान

क्षेत्रफल और जिले: इसका क्षेत्रफल लगभग 28,174 वर्ग मील (करीब 72,970 वर्ग किलोमीटर) है। इसमें भी 10 जिले हैं।
राजधानी: इसकी राजधानी गिलगित है।
प्रशासनिक स्थिति: यह पूरे पाक अधिकृत क्षेत्र का 85 प्रतिशत हिस्सा है। पहले इसे पाकिस्तान में 'नॉर्दर्न एरिया' कहा जाता था। 2009 में पाकिस्तान सरकार ने यहाँ एक स्वायत्त प्रांतीय व्यवस्था बनाकर मुख्यमंत्री और 24 सदस्यीय असेंबली का गठन किया, लेकिन इस असेंबली के पास अधिकार न के बराबर हैं।
सामरिक महत्व: यह इलाका बेहद खूबसूरत ऊंची पर्वत चोटियों (हिन्दूकुश और तिरिच मीर) और सिंधु नदी से घिरा है। इसके उत्तर में चीन-अफगानिस्तान और पूर्व में भारत का सियाचिन ग्लेशियर स्थित होने के कारण यह बेहद रणनीतिक क्षेत्र है।
PAK POK Pak Map

कुल क्षेत्रफल, आबादी और सीमाएं

आंकड़े: गिलगित-बाल्टिस्तान और तथाकथित आजाद कश्मीर को मिलाकर इस पूरे क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल भारतीय कश्मीर के वर्तमान हिस्से से लगभग 3 गुना बड़ा है। यहाँ की कुल आबादी करीब 30 से 60 लाख के बीच अनुमानित है।
 
भौगोलिक सीमाएं: इसकी सीमाएं पश्चिम में पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से, उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान के वखान कॉरिडोर से, उत्तर में चीन के शिनजियांग प्रांत से और पूर्व में भारतीय जम्मू-कश्मीर व लद्दाख से मिलती हैं।
 

3. शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley): चीन को अवैध हस्तांतरण

काराकोरम पर्वत श्रृंखला का हिस्सा रही शक्सगाम घाटी ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से मूल जम्मू-कश्मीर-लद्दाख का अंग थी। लेकिन मार्च 1963 में पाकिस्तान ने एक अवैध सीमा समझौते के तहत पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान वाले हिस्से में से लगभग 1,900 वर्ग मील (करीब 5,180 वर्ग किलोमीटर) का यह रणनीतिक इलाका चीन को उपहार में दे दिया। भारत इस हस्तांतरण को कभी स्वीकार नहीं करता और इसे अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन मानता है।
 

4. PoK की वर्तमान स्थिति और मुख्य चुनौतियाँ

अ. पाकिस्तान की दोहरी नीति और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demography)
पाकिस्तान विश्व मंच पर इसे 'आजाद कश्मीर' के रूप में पेश करता है, लेकिन यहाँ का पूरा शासन सीधे इस्लामाबाद से संचालित होता है। यहाँ 1974 से एक प्रधानमंत्री और 49 सीटों वाली विधानसभा तो है, लेकिन उसे कोई वैश्विक मान्यता नहीं है।
पाकिस्तान ने यहाँ जानबूझकर बाहरी लोगों को बसाकर इसकी डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) बदल दी है। 1947 में यहाँ बहुसंख्यक आबादी कश्मीरी शिया और सूफियों की थी, जिन्हें अब प्रताड़ित करके अल्पसंख्यक बना दिया गया है। अधिकारों के हनन के कारण ये शिया मुस्लिम समय-समय पर भागकर भारतीय कश्मीर में शरण लेते रहते हैं। पाकिस्तान ने यहाँ विकास के नाम पर कुछ नहीं किया, जिससे स्थानीय लोगों की जिंदगी बदहाल है।
 
ब. आतंकवाद का ट्रेनिंग सेंटर
यह तथ्य पूरी दुनिया के सामने आ चुका है कि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का उपयोग भारतीय कश्मीर में अशांति और आतंकवाद फैलाने के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर के रूप में किया है। 1988 से ही यहाँ कश्मीरी और अन्य युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग देकर भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए तैयार किया जाता है। एक आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, विभिन्न समय पर यहाँ लगभग 4,000 आतंकवादी घुसपैठ की फिराक में कैंपों में सक्रिय रहे हैं।
 
स. चीन की बढ़ती पैठ और सीपेक (CPEC) का जाल
स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने विकास के बहाने पूरे क्षेत्र को चीन के हाथों गिरवी रख दिया है। यहाँ से 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर' (CPEC) गुजरता है, जो पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के काशघर से जोड़ता है।
 
चीन की सुरंग: इस कॉरिडोर के तहत भारत पर दबाव बनाने के लिए पीओके से गुजरने वाली 200 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने का समझौता हुआ है, जिस पर 18 अरब डॉलर खर्च किए जा रहे हैं।
 
चीनी सेना की मौजूदगी: चीनी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के बहाने इस इलाके में चीन के लगभग 24 हजार सैनिकों की तैनाती हो चुकी है। भारतीय खुफिया एजेंसियों (BSF) के अनुसार, चीनी सेना पीओके के राजौरी और श्रीगंगानगर सेक्टर के ठीक उस पार अग्रिम रक्षा ठिकानों पर पाकिस्तानी सैनिकों को आधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग दे रही है और अचूक निशानेबाज (Snipers) तैनात करने की योजना पर काम कर रही है।
 

5. भारत सरकार की नीति और भावी कदम

भारत सरकार PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के पूरे क्षेत्र को अपना अभिन्न हिस्सा और पाकिस्तान का अवैध कब्जा मानती है। संयुक्त राष्ट्र के 1948-49 के प्रस्तावों के अनुसार भी इस क्षेत्र से पाकिस्तानी सेना का हटना अनिवार्य था, जिसका पाकिस्तान ने हमेशा उल्लंघन किया।
 
भारत ने अपनी लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता दर्शाने के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके के क्षेत्रों के लिए 24 सीटें और भारतीय संसद में 7 सीटें हमेशा से आरक्षित रखी हैं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने और लद्दाख को स्वतंत्र केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद, भारत सरकार का अगला रणनीतिक लक्ष्य पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) को वापस भारत के नक्शे में शामिल करना है, और वर्तमान में इस दिशा में कूटनीतिक प्रयास तेज हो चुके हैं।
लेखक के बारे में
वेबदुनिया फीचर टीम
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
अगला लेख
भारत के सीमा विवाद: POK, J&K, IB, LOC और LAC का पूरा इतिहास और भूगोल