चीन ने क्यों बढ़ाई टेक कंपनियों और टैलेंट की यात्रा पर सख्ती
निक मार्टिन
दशकों से, चीन पर अमेरिका और यूरोपीय संघ से उनकी तकनीक चुराने के आरोप लगते रहे हैं। रोबोटिक्स और उन्नत सेमीकंडक्टर से लेकर बेहतर इंजीनियरिंग और ऑटोमोटिव पार्ट्स तक, चीनी कंपनियों ने शीर्ष स्तर के इंजीनियरों को अपने साथ जोड़ा है। उन पर पश्चिमी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की जासूसी करने और अहम कारोबारी जानकारी हासिल करने के मकसद से साइबर हमलों में शामिल होने के आरोप भी लगे हैं।
ऐसे में यह विडंबना ही है कि अब चीन अपनी ही अत्याधुनिक तकनीक और प्रतिभाओं को विदेश जाने से रोकने के कदम उठा रहा है। ALSO READ: एआई के डर से अब चीन भी अछूता नहीं, पर ट्रंप नहीं मान रहे
विशेषज्ञों पर चीन की कड़ी नजर
पिछले हफ्ते, देश से बाहर जाने और देश में आने से जुड़े नए एंट्री-एग्जिट नियम लागू हुए। इनके तहत, चीन के अधिकारी इंजीनियरों, स्टार्टअप संस्थापकों और अन्य विशेषज्ञों को विदेश जाने से रोक सकते हैं। खास तौर पर तब, जब बैटरी, रेयर अर्थ या एआई से जुड़ी उनकी विशेषज्ञता को "औद्योगिक और तकनीकी सुरक्षा” के लिए खतरा माना जाए। हाल के दिनों में, चीन ने विदेशों में निवेश के नियम भी सख्त किए हैं। उसने विदेशों में संपत्ति रखने वाले चीनी नागरिकों पर सख्ती बढ़ाई है और तकनीकी क्षेत्र के कर्मचारियों को विदेश भेजने पर भी पाबंदियां बढ़ाई है।
सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी (एसएमयू) में कानून के प्रोफेसर हेनरी गाओ का मानना है कि अगर इन सभी पाबंदियों को एक साथ देखा जाए, तो ये "चीन की अर्थव्यवस्था की असली स्थिति की एक दुर्लभ झलक दिखाती हैं।” गाओ ने डीडब्ल्यू को बताया, "इन कड़े कदमों से साफ पता चलता है कि बीजिंग आर्थिक कमजोरी और देश से बड़े पैमाने पर पैसा बाहर जाने को लेकर काफी चिंतित है।” उन्होंने यह भी कहा कि चीनी प्रशासन किसी भी कीमत पर "उद्यमियों और पढ़े-लिखे कुशल लोगों को देश छोड़कर जाने से रोकने” पर तुला हुआ है।
चीन की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव अब छिपाना मुश्किल होता जा रहा है। देश से होने वाले निर्यात की मांग अभी भी मजबूत है, खासकर हाई-टेक सामान की। लेकिन प्रॉपर्टी बाजार में आई भारी गिरावट ने घरेलू खपत को बुरी तरह प्रभावित किया है। गर्मियों के दौरान बैंकों से कर्ज देने की दर में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अगस्त में नई कारों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले करीब एक चौथाई कम रही। ALSO READ: भारत की तेज आर्थिक वृद्धि में भी युवा क्यों परेशान हैं
बीजिंग ने रोकी डील, देश छोड़ने की फिराक में उद्यमी
अब यही चिंता लोगों और पूंजी के देश से बाहर जाने को लेकर भी है। इसका हालिया सबसे प्रमुख उदाहरण एआई स्टार्टअप ‘मानुस' है, जिसे बीजिंग में दो चीनी नागरिकों ने शुरू किया था। पिछले साल कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर में शिफ्ट कर दिया था। ऐसा मुख्य रूप से अमेरिकी निवेश पर लगी पाबंदियों से बचने और ग्लोबल मार्केट में विस्तार करने के लिए किया गया था।
जब फेसबुक की मालिक कंपनी ‘मेटा' ने पिछले दिसंबर में मानुस को 2 अरब डॉलर में खरीदने की कोशिश की, तो बीजिंग ने इस सौदे पर रोक लगा दी थी और कंपनी के दोनों संस्थापकों के देश छोड़ने पर भी पाबंदी लगा दी।
इस महीने ही चीनी सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें तेजी से फैलीं कि हुआवे के संस्थापक और सीईओ रेन झेंगफेई और उनकी बेटी व कंपनी की सीएफओ मेंग वानझोउ शायद देश छोड़ चुके हैं। ताइवानी और भारतीय मीडिया ने भी इन दावों को खबरों में जगह दी। हालांकि, बुधवार को चीनी भाषा के मीडिया हाउस ने एक दिन पहले की रेन की एक तस्वीर साझा की। इसमें वह शेनझेन में एक चीनी वाहन निर्माता कंपनी के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करते नजर आए।
अमीर चीनी लोगों को अपनी पूंजी देश से बाहर निकालने में हो रही है मुश्किल
ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस का अनुमान है कि पिछले साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की चीनी संपत्ति देश से बाहर चली गई। 2006 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से यह देश से बाहर जाने वाली "हॉट मनी” (अस्थिर पूंजी) की सबसे बड़ी रकम थी।
बीजिंग ने विदेश ले जाने के लिए, परिवारों की सालाना 50,000 डॉलर की विदेशी मुद्रा सीमा को सख्त नहीं किया है। फ्रांसीसी निवेश बैंक ‘नतिक्सिस' की एशिया-प्रशांत क्षेत्र की मुख्य अर्थशास्त्री एलिसिया गार्सिया-हेरेरो के मुताबिक, सख्ती उन अनौपचारिक तरीकों पर की गई है जिनका इस्तेमाल अमीर लोग इस सीमा से बचने के लिए करते थे। गार्सिया-हेरेरो ने डीडब्ल्यू को बताया, "उन्होंने 50,000 डॉलर की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है। वे अब उन लोगों और एजेंटों पर शिकंजा कस रहे हैं जिनके जरिए आमतौर पर पैसा बाहर भेजा जाता है।”
चीन और विदेशों में लोगों व उनकी पूंजी को देश से बाहर निकालने में मदद करने वाला पूरा एक कारोबार खड़ा हो गया है। इमिग्रेशन एजेंट वीजा और दूसरे देश में बसने की व्यवस्था करते हैं, जबकि विदेशों में काम करने वाले ब्रोकर और ट्रस्ट चीनी नागरिकों को अपनी संपत्ति विदेश में रखने में मदद करते हैं। कभी-कभी कंपनियां विदेश में अपनी सहायक कंपनी, शेयर बाजार में लिस्टिंग या कर्मचारियों की विदेश में तैनाती के जरिए पैसा और तकनीकी जानकारी दोनों को देश से बाहर ले जाती हैं।
चीन के नए नियमों से बचने के तरीके ढूंढ रहे हैं लोग
एसएमयू के गाओ का मानना है कि नई पाबंदियां उल्टा असर डाल सकती हैं। उनका कहना है कि विदेश में पैसा या लोगों को भेजना जितना मुश्किल होगा, साधन-संपन्न लोग बाहर निकलने के दूसरे तरीके खोजने के लिए उतने ही ज्यादा प्रेरित होंगे।
गाओ ने डीडब्ल्यू को बताया, "समय बीतने के साथ लोगों का भरोसा और कम हो सकता है। पैसा तेजी से देश से बाहर जा सकता है और आर्थिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जबकि इन कदमों का मकसद इन्हीं समस्याओं को रोकना है।”
इस बीच, गार्सिया-हेरेरो का मानना है कि पूंजी पर सख्ती की तुलना में प्रतिभाशाली लोगों की आवाजाही पर लगाई गई रोक ज्यादा मायने रखेगी। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, "मंजूरी लेकर आप धीरे-धीरे पैसा विदेश भेज सकते हैं। लेकिन उस इंजीनियर की जगह किसी और को लाना आसान नहीं है जो न तो प्लेन में बैठ सकता है और न ही अनिश्चितकालीन प्रतिबंध के डर से विदेश में नौकरी करने को तैयार होगा।” ALSO READ: क्या वाकई रोकी जा सकती है एआई के विकास की रफ्तार?
एआई के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को विदेश जाने के लिए लेनी होगी मंजूरी
इस जोखिम का असर चीन की एआई कंपनियों पर पहले से ही दिखने लगा है। सबसे उन्नत एआई सिस्टम बनाने की दौड़ में ये कंपनियां तेजी से अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों के करीब पहुंच रही हैं। ब्लूमबर्ग ने मई में खबर दी थी कि अलीबाबा और डीपसीक जैसी कंपनियों के शीर्ष एआई शोधकर्ताओं, संस्थापकों और अधिकारियों को अब विदेश जाने से पहले चीनी अधिकारियों से मंजूरी लेनी होगी।
टेक न्यूज साइट ‘द इंफॉर्मेशन' के मुताबिक, पिछले साल डीपसीक के कुछ कर्मचारियों से उनके पासपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया था। बीजिंग ने इस बात की न तो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है।
ब्लूमबर्ग ने पिछले साल जनवरी में रिपोर्ट किया था कि दूसरे टेक इंजीनियरों को भी इसी तरह के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इनमें वे इंजीनियर भी शामिल हैं जो वियतनाम और भारत में फैक्टरी बनाकर विदेशी कंपनियों की चीन पर निर्भरता कम करने में मदद कर रहे हैं।
कानूनी सलाह को ज्यादा सख्त कर रहे हैं वकील और अधिकारी
विदेशी नागरिकों के मामले में, चीनी और विदेशी कंपनियां कभी-कभी जांच और वीजा में होने वाली देरी से बचने के लिए चीन की कामकाजी यात्रा को दूसरे मकसद के तौर पर दिखाती हैं। वे यात्रा को नौकरी या काम के बजाय पर्यटन, कारोबारी बैठकों या फैक्ट्री देखने के लिए होने वाली यात्रा बता सकती हैं।
नए प्रतिबंध लागू होने से पहले, ‘डीएलए पीपर' जैसी अंतरराष्ट्रीय लॉ फर्मों ने कंपनियों को सलाह दी थी कि वीजा के लिए जमा किए जाने वाले दस्तावेज "सही और पूरी जानकारी वाले” होने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि दस्तावेजों में बताई गई जानकारी और वास्तव में किए जाने वाले काम में अंतर होने पर अब पांच साल तक चीन में प्रवेश पर रोक लग सकती है।
नए नियमों के मुताबिक, किसी व्यक्ति पर यात्रा प्रतिबंध लगाए जाने पर आम तौर पर उसे इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। हालांकि, अगर सूचना देने से "राष्ट्रीय सुरक्षा या आपराधिक मामलों की जांच प्रभावित हो सकती है”, तो चीनी अधिकारी यह जानकारी देने से इनकार कर सकते हैं।
इस महीने की शुरुआत में जारी अपनी अपडेटेड ट्रैवल एडवाइजरी में, अमेरिकी विदेश विभाग ने इससे भी आगे बढ़कर चेतावनी दी। उसने अमेरिकियों से कहा कि वे "चीन की मुख्य भूमि में ज्यादा सावधानी बरतें, क्योंकि वहां कानून के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के बिना लोगों के देश छोड़ने पर रोक लगाई जा सकती है और बिना वजह गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने का जोखिम है।”

