भारत के सीमा विवाद: POK, J&K, IB, LOC और LAC का पूरा इतिहास और भूगोल
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भारत की पश्चिम और पूर्वोत्तर सीमाओं पर चीन का कब्जा वर्षों से विवाद, संघर्ष और युद्ध का विषय बना हुआ है। चीन और पाकिस्तान लगातर भारत को चुनौती देते आ रहे हैं जिसका भारत अपने तरीके से जवाब भी देते आया है। दोनों देशों ने वर्तमान में, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश को भड़काने का भरपूर प्रयास किया है जिसमें वे कुछ हद तक सफल भी हुए हैं। चलिए जानते हैं भारत का चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं का एक विश्लेषण।
भारत की पश्चिम और पूर्वोत्तर सीमाओं पर चीन का कब्जा वर्षों से विवाद, संघर्ष और युद्ध का विषय बना हुआ है। चीन और पाकिस्तान लगातर भारत को चुनौती देते आ रहे हैं जिसका भारत अपने तरीके से जवाब भी देते आया है। दोनों देशों ने वर्तमान में, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश को भड़काने का भरपूर प्रयास किया है जिसमें वे कुछ हद तक सफल भी हुए हैं। चलिए जानते हैं भारत का चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं का एक विश्लेषण।
सीमा रेखाओं की परिभाषा और उनका निर्माण
1. अंतर्राष्ट्रीय सीमा (International Border - IB)
परिभाषा: यह दो देशों के बीच की वास्तविक, आधिकारिक और स्थायी सीमा रेखा होती है जिस पर कोई विवाद नहीं होता है। इसे दोनों देशों के साथ-साथ दुनिया के सभी देश मान्यता देते हैं।
भारत की स्थिति: भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, मर्मा (म्यांमार), अफगानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से लगती है। यदि सीमा पर कोई संघर्ष न हो, तो मामले सीधे बॉर्डर पर ही सुलझ जाते हैं।
विवाद की स्थिति: भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा वर्तमान में पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाले इलाकों के अंदर कहीं स्थित है, क्योंकि इन दोनों देशों ने भारत की भूमि को हड़प रखा है। भारतीय सेना वर्तमान में उन जगहों पर तैनात है जहां युद्ध विराम की घोषणा की गई थी।
2. नियंत्रण रेखा (Line of Control - LOC)
इतिहास और निर्माण: भारत विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। लेकिन उनके निर्णय में हुई देरी का फायदा उठाकर 1947-48 में पाकिस्तानी सेना ने कबाइलियों के साथ मिलकर कश्मीर पर हमला कर दिया और वे काफी भीतर तक घुस आए। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए श्रीनगर को बचाया और दुश्मनों को पीछे धकेला।
सीजफायर लाइन: सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण दोनों सेनाएं जहां थीं, वहीं रुक गईं। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के संयुक्त राष्ट्र (UN) जाने और वहां से युद्ध विराम की घोषणा होने के कारण इस मोर्चे को 'सीजफायर लाइन' कहा गया। इसके चलते जम्मू-कश्मीर दो भागों में बंट गया।
LOC नामकरण: साल 1972 के शिमला समझौते के तहत इसी सीजफायर लाइन को 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (LOC) का नाम दिया गया।
भौगोलिक स्थिति: LOC की लंबाई लगभग 814 किलोमीटर बताई जाती है। यह कोई आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं बल्कि एक युद्ध विराम रेखा है। यह जम्मू के अखनूर सेक्टर से शुरू होकर पॉइंट NJ 9842 तक फैली हुई है। इसका भारतीय भाग (दक्षिणी और पूर्वी हिस्सा) जम्मू-कश्मीर राज्य के रूप में जाना जाता है, जो मूल कश्मीर का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है। बाकी हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है।
3. चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control - LAC)
इतिहास और निर्माण: साल 1914 में ब्रिटिश काल के दौरान भारत और तिब्बत के बीच सीमा निर्धारण के लिए 'मैकमोहन लाइन' (McMahon Line) खींची गई थी। लेकिन चीन इस समझौते को नहीं मानता। ब्रिटिश शासन के बाद जो क्षेत्र उनके पास था, वह भारत का कहलाया, लेकिन भारत और चीन के बीच सीमा को कभी भी जमीन पर बाड़ या पत्थरों से सही तरह से चिन्हित नहीं किया गया। चीन में माओवादी क्रांति के बाद उसने तिब्बत पर कब्जा कर लिया। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने "हिंदी-चीनी भाई-भाई" का नारा दिया, लेकिन चीन ने धोखा दिया और 1962 में भारत पर आक्रमण कर दिया। चीन की सेना मैकमोहन लाइन को पार कर भारतीय क्षेत्रों में घुस आई। युद्ध विराम के बाद जो सेना जहां रुकी, उसे ही 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) कहा गया और मैकमोहन लाइन पीछे छूट गई।
भौगोलिक स्थिति और लंबाई: LAC लद्दाख, कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह भारत को चीन के कब्जे वाले 'अक्साई चीन' से अलग करती है। भारत के अनुसार इसकी कुल लंबाई 3,488 किलोमीटर से अधिक है, जबकि चीन इसे नहीं मानता और इसकी लंबाई केवल 2,000 किलोमीटर बताता है। इसी मतभेद के कारण दोनों देशों में विवाद है।
प्रबंधन: काराकोरम से अरुणाचल प्रदेश तक LAC तीन हिस्सों में बंटी है: पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड), मिडिल सेक्टर (सिक्किम) और पूर्वी सेक्टर (अरुणाचल प्रदेश)। 1993 में हुए एक समझौते के तहत दोनों देशों के सैनिक इस रेखा से लगभग 50 से 100 किलोमीटर की दूरी बनाकर निगरानी करते हैं। गलवां जैसी कुछ घटनाओं को छोड़कर LAC पर आमतौर पर शांति रहती है।
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) और गिलगित-बाल्टिस्तान
1. प्रशासनिक विभाजन: भारत सरकार ने अब इसका नाम बदलकर 'पाक अधिकृत जम्मू और कश्मीर' (PoJK) कर दिया है। पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को दो प्रशासनिक हिस्सों में बांटा हुआ है:
2. आजाद कश्मीर: इसका क्षेत्रफल लगभग 5,134 वर्ग मील (करीब 13,297 वर्ग किलोमीटर) है। इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है और इसमें 10 जिले हैं।
3. गिलगित-बाल्टिस्तान: इसका क्षेत्रफल लगभग 28,174 वर्ग मील (करीब 72,970 वर्ग किलोमीटर) है। इसकी राजधानी गिलगित है और इसमें भी 10 जिले हैं। यह पूरे पाक अधिकृत क्षेत्र का 85 प्रतिशत हिस्सा है। पहले इसे पाकिस्तान में 'नॉर्न एरिया' कहा जाता था, लेकिन 2009 में वहां एक स्वायत्त प्रांतीय व्यवस्था बनाकर मुख्यमंत्री और असेंबली (24 सदस्य) का गठन किया गया, जिसके पास अधिकार न के बराबर हैं।
4. कुल क्षेत्रफल और आबादी: इस पूरे क्षेत्र का कुल अनुमानित क्षेत्रफल लगभग 13,297 वर्ग किलोमीटर (गिलगित-बाल्टिस्तान को मिलाकर कुल क्षेत्र भारतीय कश्मीर से लगभग 3 गुना बड़ा है) से ज्यादा है। यहाँ की कुल आबादी करीब 30 से 60 लाख के बीच बताई जाती है।
5. भौगोलिक सीमाएं: इसकी सीमा पश्चिम में पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से, उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान के वखान कॉरिडोर से, उत्तर में चीन के शिनजियांग प्रांत से और पूर्व में भारतीय जम्मू-कश्मीर व लद्दाख से मिलती है।
6. भारत की नीति: भारत इसे अवैध कब्जे वाला क्षेत्र मानता है। संयुक्त राष्ट्र के 1948 और 1949 के प्रस्तावों के अनुसार, यहाँ से पाकिस्तानी सेना के हटने के बाद ही जनमत संग्रह होना था, जो पाकिस्तान ने कभी नहीं किया। भारत ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके के लिए 24 सीटें और भारतीय संसद में 7 सीटें आरक्षित रखी हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद भारत अब इस हिस्से को भी वापस मिलाने की दिशा में अग्रसर है।
1. शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley)
काराकोरम पर्वत श्रृंखला का हिस्सा रही यह घाटी ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर-लद्दाख का अंग थी। मार्च 1963 में पाकिस्तान ने एक अवैध सीमा समझौते के तहत पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान वाले हिस्से में से लगभग 1,900 वर्ग मील (कुछ स्रोतों के अनुसार 5,180 वर्ग किलोमीटर) का यह इलाका चीन को उपहार में दे दिया। भारत इस हस्तांतरण को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।
2. सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier)
स्थिति: यह काराकोरम पर्वतमाला में स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है। यह चीन को दिए गए शक्सगाम, अक्साई चीन, गिलगित-बाल्टिस्तान और भारतीय कश्मीर के बीच स्थित एक बेहद रणनीतिक बिंदु है।
सैन्य नियंत्रण: 1984 में भारत ने "ऑपरेशन मेघदूत" चलाकर इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्लेशियर पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया। यह सैन्य रूप से और सिंधु नदी के जल स्रोतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
3. अक्साई चीन (Aksai Chin)
यह लद्दाख का पूर्वी हिस्सा है जो महाराजा हरि सिंह के समय कश्मीर का हिस्सा था। 1962 के युद्ध में भारत की हार के बाद चीन ने लद्दाख के इस पठारी और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्से पर कब्जा कर लिया, जो लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है। पाकिस्तान ने चीन के इस कब्जे को आधिकारिक मान्यता दे रखी है। यह क्षेत्र चीन के तिब्बत और शिनजियांग प्रांतों को आपस में जोड़ता है।
पाक अधिकृत क्षेत्र (PoK) की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
1. पाकिस्तान की दोहरी नीति और सामाजिक दमन: पाकिस्तान विश्व मंच पर इसे 'आजाद कश्मीर' कहता है, लेकिन यहाँ का प्रशासन सीधे इस्लामाबाद से संचालित होता है। यहाँ एक कठपुतली प्रधानमंत्री और 49 सीटों वाली विधानसभा (1974 से क्रियाशील) है, जिसे वैश्विक मान्यता प्राप्त नहीं है। पाकिस्तान ने यहाँ बाहरी लोगों को बसाकर इसकी डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) बदल दी है। 1947 में यहाँ बहुसंख्यक आबादी कश्मीरी शिया थी, जिन्हें अब अल्पसंख्यक बना दिया गया है। विशेषकर सूफी और शिया समुदाय के अधिकारों का हनन हो रहा है, जिसके कारण वे समय-समय पर भागकर भारतीय कश्मीर में शरण लेते रहे हैं। विकास के नाम पर यहाँ कुछ नहीं किया गया, जिससे स्थानीय कश्मीरियों की जिंदगी बदहाल है।
2. आतंकवाद का केंद्र: पाकिस्तान ने 1988 से ही इस क्षेत्र का उपयोग भारतीय कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए आतंकवादी ट्रेनिंग सेंटर के रूप में किया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दी गई जानकारियों के अनुसार, हजारों कश्मीरी और अन्य आतंकवादी इस क्षेत्र में घुसपैठ की तैयारी के लिए कैंपों में ट्रेनिंग लेते रहे हैं।
3. चीन की पैठ और सीपेक (CPEC): विकास के बहाने पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में चीन को प्रवेश दे दिया है। यहाँ से 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर' (CPEC) गुजरता है, जो अरब सागर में पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के काशघर से जोड़ता है। इस रणनीतिक गलियारे के तहत चीन और पाकिस्तान के बीच 200 किमी लंबी सुरंग बनाने का भी समझौता हुआ है, जिस पर 18 अरब डॉलर का खर्च अनुमानित है। स्थानीय लोग इसका विरोध करते हैं क्योंकि चीनी कंपनियां यहाँ के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही हैं। चीनी प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए यहाँ लगभग 24 हजार चीनी सैनिकों की तैनाती है और चीनी सेना इस क्षेत्र में पाकिस्तानी सैनिकों को राजौरी व श्रीगंगानगर सेक्टर के पार अग्रिम चौकियों पर हथियार संबंधी ट्रेनिंग और स्नाइपर्स की तैनाती में मदद कर रही है।
जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का ऐतिहासिक और भौगोलिक परिचय
ऐतिहासिक रूप से यह संपूर्ण भू-भाग विभिन्न समय में हिंदू राजाओं, मुस्लिम सुल्तानों, मुगलों (अकबर के काल में), अफगानों (1756) और सिखों (1819) के अधीन रहा। 1846 में सिख साम्राज्य के राजा रंजीत सिंह ने जम्मू का क्षेत्र महाराजा गुलाब सिंह को सौंप दिया, जिसके बाद डोगरा राजवंश का शासन शुरू हुआ। भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से इसके तीन मुख्य भाग हैं:
1. जम्मू संभाग (Jammu Division)
परिचय: भारतीय ग्रंथों में इसे 'डुग्गर प्रदेश' कहा गया है। इसका कुल क्षेत्रफल 36,315 वर्ग किलोमीटर है।
जिले: इसमें कुल 10 जिले हैं- जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, डोडा, पुंछ, राजौरी, रियासी, RAMBAN (रामबन) और किश्तवाड़।
विवादित हिस्सा: इसके लगभग 13,297 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (भिम्बर, कोटली, मीरपुर, पुंछ हवेली, बाग, सुधान्ती, मुजफ्फराबाद, हट्टियां आदि जिलों) पर पाकिस्तान का कब्जा है, जिसे पाकिस्तान 'आजाद कश्मीर' कहता है।
2. कश्मीर संभाग (Kashmir Division)
परिचय: पीर पंजाल पहाड़ी श्रृंखला के दूसरी ओर कश्मीर घाटी स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 16,000 वर्ग किलोमीटर है।
जिले: इसमें भी 10 जिले हैं- श्रीनगर, बड़गाम, कुलगाम, पुलवामा, अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामूला, शोपियां, गन्दरबल और बांडीपुरा।
जनसांख्यिकी और विस्थापन: यहाँ मुख्य रूप से सुन्नी, शिया, वहाबी और अहमदिया मुसलमानों के साथ सिख और हिंदू (गुर्जर, राजपूत, ब्राह्मण) रहते थे। लेकिन 1989 से शुरू हुए पाकिस्तानी छद्म युद्ध और सुन्नी आतंकवादी हिंसा में 20,000 से अधिक निर्दोष लोग मारे गए। इसके चलते घाटी के लगभग 7 लाख हिंदू और सिख अल्पसंख्यक विस्थापित हो गए, जो आज जम्मू और दिल्ली के शिविरों में शरणार्थियों का जीवन जी रहे हैं।
3. लद्दाख संभाग (Ladakh Division)
परिचय: यह एक ऊंचा पठार है जिसकी औसत ऊंचाई 3,500 मीटर (9,800 फीट) से अधिक है। यह हिमालय, काराकोरम पर्वत श्रृंखला और सिंधु नदी की ऊपरी घाटी में फैला है। भौगोलिक साक्ष्यों के अनुसार यह क्षेत्र प्राचीन काल में किसी बड़ी झील का हिस्सा था जो समय के साथ घाटी में बदल गया। ऐतिहासिक रूप से यह सिल्क रूट का हिस्सा था और मध्य एशिया से व्यापार (रेशम, कालीन, मसाले, पश्मीना ऊन) का एक बड़ा गढ़ था। लद्दाख कभी भी तिब्बत का हिस्सा नहीं रहा, हालांकि चीन इस पर अपना दावा करता है।
जिले और क्षेत्रफल: भारत के नियंत्रण वाले लद्दाख में लेह और कारगिल (जंस्कार घाटी सहित) दो हिस्से हैं। इसका कुल क्षेत्रफल काफी बड़ा है, लेकिन इसके करीब 38,000 वर्ग मील (या किलोमीटर) के हिस्से 'अक्साई चीन' पर चीन का अवैध कब्जा है।
जनसंख्या और संस्कृति: यहाँ की आबादी बेहद कम (लगभग 2,36,539) है। पूर्वी हिस्से (लेह) में मुख्य रूप से तिब्बती बौद्ध और हिंदू रहते हैं, जबकि पश्चिमी हिस्से (कारगिल) में भारतीय शिया मुसलमानों की संख्या अधिक है।
5. समेकित भौगोलिक एवं जनसांख्यिकीय आंकड़े
कुल क्षेत्रफल और राजधानियां: अविभाजित जम्मू-कश्मीर का कुल क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग किलोमीटर है। इसकी दो राजधानियां हैं- श्रीनगर (ग्रीष्मकालीन) और जम्मू (शीतकालीन)। क्षेत्रफल के आधार पर वर्तमान भारतीय नियंत्रण वाले हिस्से में लद्दाख 58 प्रतिशत, जम्मू 26 प्रतिशत और कश्मीर 16 प्रतिशत है।
जनसंख्या वितरण (2011 की जनगणना): संपूर्ण राज्य की कुल जनसंख्या 1,25,41,302 है। इसमें कुल आबादी का लगभग 64% मुस्लिम, 33% हिंदू और 3% में बौद्ध, सिख व ईसाई शामिल हैं। कश्मीर घाटी मुस्लिम बहुल (जिसमें शियाओं की संख्या घटकर 13% रह गई है) है, जम्मू हिंदू व सिख बहुल है, और लद्दाख में बौद्धों तथा शिया मुसलमानों की संख्या अधिक है।
नोट: उपरोक्त बताएं गए आंकड़े अनुमानित और इंटरनेट से प्राप्त हैं। पाठक अपने विवेक का उपयोग करके समझें।

