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पीओके में भड़का जनाक्रोश, पाक सुरक्षा बलों पर फायरिंग के आरोप, भारत ने दोहराया अपना दावा
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से और बगावत की आग भड़क उठी है। ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के आह्वान पर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की अंधाधुंध गोलीबारी में दर्जनों प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। जेएएसी ने दावा किया है कि रावलकोट में एक प्रदर्शनकारी के जनाजे के दौरान हुई फायरिंग में 27 लोग मारे गए जबकि 200 से ज्यादा घायल हुए हैं।
रविवार और सोमवार को रावलकोट में तनाव चरम पर पहुंच गया। जेएएसी कार्यकर्ता शाहजैब हबीब के जनाजे और अस्पताल के बाहर इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों ने फायरिंग की। आधिकारिक रिपोर्ट्स में कुल 11 लोगों की मौत (6 प्रदर्शनकारी, 4 पुलिसकर्मी और 1 आम नागरिक) और 70 से ज्यादा घायलों की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों और जेएएसी ने इसे कत्लेआम बताया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। MEA के प्रवक्ता ने कहा:“हम पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और वहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा निर्दोष नागरिकों पर की जा रही बर्बरता की रिपोर्ट्स देख रहे हैं। यह पाकिस्तान के दमनकारी रवैये, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और इन क्षेत्रों से संसाधनों की लूट का स्वाभाविक परिणाम है। पाकिस्तान को इन मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत ने पाकिस्तान से इन क्षेत्रों को तुरंत खाली करने की मांग की है।
प्रदर्शन की वजह क्या?
जेएएसी लंबे समय से सस्ता आटा, सस्ती बिजली, बेहतर शासन और राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रही थी। हाल ही में पाकिस्तानी प्रशासन ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया और इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और जेएएसी कार्यालय सील कर दिए गए।आज 9 जून को पूरे पीओके में क्षेत्रव्यापी बंद रहा। प्रदर्शनकारियों ने भिंबर से मुजफ्फराबाद तक लंबी मार्च निकालने की योजना बनाई है, जबकि पाकिस्तानी प्रशासन ने इसे रोकने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की है।
दोनों पक्षों के दावे
पाकिस्तानी प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने पहले हथियारबंद हमला किया, पेट्रोल बम फेंके और पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई। जेएएसी और स्थानीय लोग इसे निहत्थे नागरिकों पर अत्याचार बताते हुए मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने भी कार्रवाई की निंदा की है। पीओके में पिछले कई महीनों से आर्थिक संकट, महंगाई और पाकिस्तान के शोषण के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है। Edited by : Sudhir Sharma
