फिर आगे लड़कियाँ... !
हर बार बाजी लड़कियों के हाथ में क्यों?
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प्रश्न यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या है इन लड़कियों में जो तमाम दबावों और जिम्मेदारियों से निपटते-जूझते भी आगे निकल जाती है। भावुकता,नजाकत और चंचलता जैसे गुणों के होते हुए भी कैसे लड़कों को पीछे धकेल खुद को साबित कर देती है?
मनोविज्ञान कहता है लड़कियों में कुछ ऐसे विशिष्ट गॉड गिफ्टेड गुण होते हैं जिनकी बराबरी लड़के कर ही नहीं सकते। हमें प्रकृति के इस भेद को स्वीकारना होगा कि स्त्री और पुरुष दो अलग-अलग स्वरूप में गढ़े गए ईश्वर के खिलौने हैं। दोनों की क्वॉलिटी डिफरेंट है। आइए कुछ बेसिक अंतर पर गौर फरमा लिया जाए :
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किसी जमाने में समाज के कुछ हिस्सों में लड़कियाँ उपेक्षित होती होंगी,आजकल लड़कियाँ परिवार में ज्यादा अटेंशन पाती है। ज्यादा केयर भी उन्हें मिलने लगी है। इस बात का लड़कियाँ गलत फायदा नहीं उठाती है और करियर के प्रति गंभीरता बनाए रखती है।
पेरेंट्स के प्रति ग्रेटफुल : बचपन से ही लड़कियाँ इस अहसास के साथ जीती हैं कि एक दिन उन्हें किसी और के घर जाना है। यह बात उन्हें अपने पेरेंट्स के और करीब ले आती है। अपनी पढ़ाई और दूसरे खर्चों पर माता-पिता का सेक्रिफाइज करना उन्हें कचोटता है। यही कारण है कि उनमें जल्द ही कुछ बनकर माता-पिता के उपकारों का बदला चुकाने का जुनून होता है।
लड़के इस मामले में उतने संवेदनशील नहीं होते हैं कि पेरेंट्स की तकलीफों को महसूस कर सकें। उन्हें लगता है पेरेंट्स जो कुछ कर रहे हैं उस पर उनका पूरा हक है, जबकि लड़कियाँ और अधिक ग्रेटफुल हो जाती हैं। यह एक अहम वजह हो सकती है कि लड़कियाँ रिजल्ट का शानदार तोहफा लेकर फैमेली को देती है।
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