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सैफ अली खान अटैक केस: हमलावर ने कोर्ट में कबूला अपना गुनाह, मांगी सजा में नरमी

Saif Ali Khan attack case
बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान के मुंबई स्थित बांद्रा वाले घर में घुसकर चाकू से हमला करने के मामले में एक बेहद अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। घटना के लगभग डेढ़ साल बाद इस मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शरिफुल इस्लाम ने अदालत के समक्ष अपना अपराध स्वीकार करने की इच्छा जताई है। 
 
आरोपी ने न केवल अपना जुर्म कबूलने की अर्जी दी है, बल्कि कोर्ट से अपनी सजा में नरमी बरतने की गुहार भी लगाई है। इस नए घटनाक्रम के बाद पूरे केस का रुख बदलता दिख रहा है। कोर्ट ने इस अर्जी पर अभियोजन पक्ष से उनका रुख स्पष्ट करने को कहा है। अब इस मामले की अगली और बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई 11 सितंबर को होने जा रही है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ था हमला?
यह सनसनीखेज वारदात 16 जनवरी 2025 की है। मुंबई के पॉश इलाके बांद्रा में स्थित सैफ अली खान के 12वीं मंजिल वाले अपार्टमेंट में एक अनजान शख्स अवैध रूप से दाखिल हो गया था। बताया जाता है कि घुसपैठिया बाथरूम की खिड़की या रास्ते के जरिए सैफ के छोटे बेटे जेह के कमरे तक पहुंच गया था।
 
जैसे ही सैफ अली खान को बेटे के कमरे में किसी अनजान व्यक्ति की मौजूदगी की भनक लगी, वे तुरंत उसे बचाने के लिए आगे आए। इसी दौरान आरोपी शरिफुल इस्लाम ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सैफ को गंभीर चोटें आईं और हमलावर मौके से फरार हो गया, हालांकि उसकी यह पूरी करतूत इमारत के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी।
 
अस्पताल में हुई थी इमरजेंसी सर्जरी
हमले के वक्त सैफ अली खान गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। उन्हें तुरंत मुंबई के लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी आपातकालीन सर्जरी की। हमले की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैफ की पीठ और कमर के पास फंसा चाकू का एक टूटा हुआ टुकड़ा सर्जरी के जरिए निकाला गया था। लगभग पांच दिनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया था। 
 
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए वारदात के महज दो दिन बाद मोहम्मद शरिफुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। हाल ही में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जीपी देशमुख की अदालत ने आरोपी के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे, जिससे मामले के नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया था।
 
11 सितंबर की सुनवाई क्यों है अहम?
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, यदि कोई आरोपी अदालत के सामने खुद अपना अपराध स्वीकार कर लेता है, तो कोर्ट को लंबे समय तक गवाहों और सबूतों की जांच करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ऐसे मामलों में अदालत सीधे आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान कर सकती है।
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