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उज्जैन दर्शन
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सिंहस्थ कुंभ मेला
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सिंहस्थ-2028 की प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा
Tuesday,March 5, 2024
उज्जैन के पिछले 10 सिंहस्थ का इतिहास
इन 4 नगरों और 3 नदियों में गिरी थीं अमृत की बूंदें, जहां लगता है मेला
किन-किन शहरों में कुंभ का आयोजन होता है?
कैसे बनती है नागा साधु की भभूत
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Thursday, February 4, 2016
यह है संन्यासी अखाड़ों का संपूर्ण इतिहास
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Wednesday, February 3, 2016
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मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। मंगल के इस नक्षत्र परिवर्तन के चलते 3 राशि के लोगों को 12 अगस्त तक रहना होगा सावधान। चलिए जानते हैं कि किन राशि 3 राशियों को रहना होगा सावधान।
Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म
देकार्त के जीवन का सबसे बड़ा ध्येय यह था कि दर्शनशास्त्र को भी गणित (Mathematics) की तरह सटीक, अकाट्य और संदेह से परे बनाया जाए। वे एक ऐसा सार्वभौमिक सत्य खोजना चाहते थे, जिस पर कोई भी प्रश्नचिह्न न लगा सके। इसी विचार ने बुद्धिवाद (Rationalism) की नींव रखी। आइए, देकार्त के इस अद्भुत दार्शनिक चिंतन के 4 प्रमुख स्तंभों को गहराई से समझते हैं।
मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। ज्योतिष की दुनिया में एक बड़ा हलचल भरा मोड़ आ चुका है- बुध ग्रह अपनी ही प्रिय राशि मिथुन में सीधे (मार्गी) चलने लगे हैं। अब जब बुद्धि और संवाद का कारक ग्रह सीधी चाल चलेगा, तो जाहिर है आपकी सोच, बातचीत और फैसलों की रफ्तार भी बदल जाएगी।
Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?
Raksha Bandhan 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इसे मिठास और खुशियों का उत्सव माना गया है। यह भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व है। यहां जानें रक्षा बंधन 2026 कब है? जानें रक्षा बंधन 2026 की तारीख...
चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय
Chaturmas Astrology Remedies: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास यह चार महीनों का पवित्र काल भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार चातुर्मास में कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो जीवन में आ रही और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यहां जानें 12 राशियों के लिए चातुर्मास के अचूक उपाय...
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Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 02 सितंबर 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय
02 September 2026 Today Shubh Muhurat: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 02 सितंबर, 2026 का विशेष पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।
10 सितंबर से यूरेनस की उल्टी चाल: 4 राशियों के लिए 8 फरवरी 2027 तक खुलेंगे तरक्की और धन के रास्ते
वर्ष 2026 में एक बड़ी खगोलीय और ज्योतिषीय घटना घटने जा रही है। 10 सितंबर 2026, बृहस्पतिवार को रात्रि 11:57 बजे यूरेनस वक्री (Retrograde) यानी उल्टी चाल चलना शुरू करेगा। यूरेनस की यह वक्री अवस्था 8 फरवरी 2027 तक रहेगी, जिसके बाद यह पुनः मार्गी (सीधी चाल) हो जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की 12 अनूठी परंपराएं जो इस पर्व को बनाती हैं खास
Shri Krishna Janmashtami Traditions: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे विश्व में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सनातन धर्म में इस दिन को एक महान उत्सव के रूप में देखा जाता है। जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर 12 मुख्य परंपराओं और रीति-रिवाजों को निभाने का विशेष प्रचलन है, जो इस उत्सव को बेहद रोचक और भावपूर्ण बनाते हैं:
बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी पर मंगला आरती का रहस्य एवं धार्मिक महत्व
वृंदावन स्थित प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की अपनी एक अनूठी और अनुपम परंपरा है। यहाँ भगवान कृष्ण की उपासना एक नन्हे बालक (ठाकुर जी) के रूप में की जाती है। मंदिर की दिनचर्या में भी ठाकुर जी की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि पूरे वर्ष में केवल जन्माष्टमी के अवसर पर ही यहाँ मंगला आरती की जाती है, जबकि सामान्य दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में मंगला आरती नहीं होती। इस विशेष परंपरा और धार्मिक व्यवस्था के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण और मान्यताएं हैं:
मंगल-शनि का केंद्र योग बढ़ाएगा तनाव! 4 राशियों की किस्मत का पलट जाएगा पासा
वर्तमान में मंगल और शनि का केंद्र योग बना है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल और शनि के केंद्र योग (90° Square Aspect) को मूल रूप से एक अशुभ और तनावपूर्ण योग माना जाता है क्योंकि मंगल 'अग्नि व ऊर्जा' है और शनि 'ठंडक व रुकावट'। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में यह योग कुछ राशियों को नुकसान पहुंचाने के बजाय अत्यधिक मजबूती, जुझारूपन और सफलता देता है। जिन राशियों की कुंडली में मंगल या शनि मजबूत (अपनी स्वराशि, मित्र राशि या उच्च राशि में) होते हैं, वे इस योग के तनाव को सकारात्मक ऊर्जा में बदल लेते हैं।
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