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ध्यानलिंगम् : शिव का इतना सुंदर और अलौकिक मंदिर आपने कहीं नहीं देखा होगा

शनिवार,जुलाई 24, 2021
dhyanalinga coimbatore
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इस साल गुरु पूर्णिमा पर्व आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा दिन शनिवार, 24 जुलाई 2021 मनाया जा रहा है। इसे व्यास पूजा के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो किसी भी तरह का ज्ञान देने वाला गुरु कहलाता है
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भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है विश्‍व प्रसिद्ध सबरीमाला का मंदिर। यहां हर दिन लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में ...
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शास्त्रों में देवशयनी एकादशी को अत्यधिक खास माना गया है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी यानी आषाढ़ शुक्ल एकादशी का व्रत 20 जुलाई 2021 को है। देवशयनी एकादशी के दिन से देवउठनी एकादशी
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भारत के गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे स्थित 4 धामों में से 1 धाम और 7 पवित्र पुरियों में से एक पुरी है द्वारिका। यहां पर श्रीकृष्ण का एक प्राचीन मंदिर है और समुद्र में डूबी हुई द्वारिका नगरी। आओ जानते हैं मंदिर के बारे में 10 रोचक ...
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कलियुग में गोवर्धन पर्वत, जिन्हें गिरिराज भी कहा जाता है, की परिक्रमा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है। गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा श्रद्धालुओं के सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाली होती है। गोवर्धन पर्वत को योगेश्वर भगवान कृष्ण का साक्षात स्वरूप माना गया ...
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पंढरपुर की यात्रा आजकल आषाढ़ में तथा कार्तिक शुक्ल एकादशी को होती है। देवशयनी और देवोत्थान एकादशी को वारकरी संप्रदाय के लोग यहां यात्रा करने के लिए आते हैं। यात्रा को ही 'वारी देना' कहते हैं। प्रत्येक वर्ष देवशयनी एकादशी के मौके पर पंढरपुर में लाखों ...
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आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि में जलदेवी का पूजन होता है। कहते हैं यह माता दुर्गा का ही एक रूप है। कई राज्यों में जलदेवी की पूजा की जाती है। कई जगहों पर जल देवी के मंदिर भी है। मध्यप्रदेश में भी जलदेवी की पूजा होती है।
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भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान 1 अप्रैल 1937 को हुई थी। तब संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध को मिलाकर तब इसे यूनाइटेड प्रोविंस कहा जाता था जो कि 1950 में बदलकर उत्तर प्रदेश हो गया। उत्तर प्रदेश पहले भारत का सबसे बड़ा राज्य हुआ ...
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धरती के 70.8% प्रतिशत भाग पर समुद्र है जिसमें से 14% भाग पर बसा है विराट हिंद महासागर। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। निम्न प्रमुख समुद्र तटों से समुद्र को निहारना बहुत ही रोमांचक अनुभव होता है। ये ...
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इस संबंध में एक जन प्रचलित कथा है कि एक बार श्रीकृष्‍ण अचानक नींद में राधे-राधे कहने लगे तो श्रीकृष्‍ण की आठों पत्नियां चौंक गई और सोचने लगे कि भगवान अभी तक राधा को नहीं भले हैं। सभी ने मिलकर माता रोहिणी से इस संबंध मैं विचार किया और उनसे राधा और ...
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श्री जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित लाल ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा किस कारण होता है यह तो वैज्ञानिक ही बता सकते हैं लेकिन यह निश्‍चित ही आश्चर्यजनक बात है। यह भी आश्‍चर्य है कि प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव ...
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भारतीय राज्य उड़िसा के पुरी तट पर भगवान जगन्नाथ का भव्य और प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर राजा इंद्रद्युम्न ने बनवाया था। सैंकड़ों वर्षों तक यह मंदिर रेत में दबा रहा बाद में इसे वहां के राजा ने निकाला और फिर से वहां प्रभु नीलमाधव की पूजा अर्चना होने ...
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हमने जिस तरह आपको पंच कैलाश, पंच केदार आदि हिन्दू तीर्थ के बारे में बताया था उसी तरह अब जानिए सप्त बद्री के बार में संक्षिप्त जानकारी जो उत्तराखंड के चमोली में स्थित है और सभी जगह श्रीहरि विष्णु विराजमान हैं।
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अनलॉक के बाद उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन श्रावण मास में हो सकेंगे। सोमवार से महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर खोल दिया गया है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से महाकाल ही एकमात्र सर्वोत्तम शिवलिंग है। कहते हैं कि 'आकाशे तारकं लिंगं पाताले ...
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उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के तपोवन क्षेत्र में नंदा देवी का सबसे ऊंचा पहाड़ है। नंदादेवी के दोनों ओर ग्लेशियर यानी हिमनद हैं। इन हिमनदों की बर्फ पिघलकर एक नदी का रूप ले लेती है। यहां दो बड़े ग्लेशियर है- नंदादेवी नॉर्थ और नंदा देवी साउथ। ...
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भारत में गायत्री माता के कई प्राचीन मंदिर है परंतु राजस्थान के पुष्करजी में स्थित गायत्री माता के मंदिर को सबसे प्राचीन माना जाता है। पुष्करजी में एक तो माता सती का शक्तिपीठ है, दूसरा ब्रह्माजी का प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां पर गायत्री माता भी विराजमान ...
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विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां तीन गणेशजी विराजमान हैं चिंतामन, मंछामन और इच्छामन। ...
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15 जून को देवभूमि कैंची धाम में मेले का आयोजन होता है और यहां पर देश विदेश से बाबा नीम करौली के भक्त आते हैं। इस धाम में बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है। यह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटता। यह ...
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चार धाम की यात्रा करते समय हो सकता है कि ज्यादातर लोगों को यह नहीं मालूम हो कि ये चारों धाम कहां हैं और इनकी यात्रा का महत्व क्या है।
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