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Last Modified: मेरठ (उप्र) , मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 (15:45 IST)

विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर भीकुंड वेटलैंड में भव्य आयोजन, 30 हजार से अधिक प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति, 1633 कछुआ शावकों का गंगा में पुनर्वास

World Wetlands Day News
World Wetlands Day News : विश्व आर्द्रभूमि (वेटलैंड) दिवस पर मेरठ वन विभाग द्वारा हस्तिनापुर रेंज स्थित भीकुंड वेटलैंड के वॉच टावर परिसर में बर्ड वॉचिंग, जैव विविधता संरक्षण एवं जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण, प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की महत्ता तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जनमानस में जागरूकता बढ़ाना रहा।
 

बर्ड वॉचिंग एवं जैव विविधता जागरूकता कार्यक्रम

कार्यक्रम की शुरुआत भीकुंड वॉच टावर से बर्ड वॉचिंग के साथ हुई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को पक्षियों की पहचान, उनके प्राकृतिक आवास एवं आर्द्रभूमियों की पारिस्थितिकी में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी।भीकुंड वेटलैंड यूरेशियाई देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है। इस वर्ष अब तक का सबसे बड़ा बर्ड काउंट दर्ज किया गया, जिसमें 30,000 से अधिक प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति दर्ज हुई। यह क्षेत्र 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास माना जाता है।
 
प्रमुख रूप से बार-हेडेड गूस, लिटिल कॉर्मोरेंट, ब्राह्मणी, एग्रेट, किंगफिशर, ग्रे-लेग गूस, सारस क्रेन एवं स्पूनबिल डक देखी गईं। इस अवसर पर विद्यार्थियों को रामसर साइट्स के महत्व की जानकारी दी गई तथा भीकुंड वेटलैंड को रामसर साइट घोषित किए जाने की मांग भी उठाई गई।
 

गंगा नदी में 1633 कछुआ शावकों का पुनर्वास

कार्यक्रम के दूसरे चरण में मखदुमपुर घाट स्थित टर्टल हैचरी में हैच किए गए कुल 1633 कछुआ शावकों को गंगा नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। यह पहल गंगा नदी के जैविक संतुलन एवं विलुप्तप्राय कछुआ प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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गंगा नदी में विभिन्न प्रजाति  Batagurdhongoka 41, Pangshura smithii, 944, Pangshura tentoria 648 शावक छोड़े गए है। विशेषज्ञों के मुताबिक कछुए गंगा के पारिस्थितिक तंत्र में प्राकृतिक स्कैवेंजर की भूमिका निभाते हैं, जिससे नदी की स्वच्छता और जैव संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
 

चित्रकला प्रतियोगिता एवं सम्मान समारोह

वेटलैंड दिवस के अवसर पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सीनियर वर्ग में स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल की मिशिका त्यागी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि जूनियर वर्ग में हस्तिनापुर पब्लिक स्कूल के रित्विक को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त 10 विद्यार्थियों को द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
बर्ड आइडेंटिफिकेशन एवं फोटोग्राफी में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. रजत भार्गव को सम्मानित किया गया। वहीं सुनील पोसवाल को हस्तिनापुर की प्रकृति एवं सांस्कृतिक विरासत पर आधारित कविता 'आओ चले हस्तिनापुर की ओर', बूढ़ी गंगा पुनरोद्धार एवं शैक्षणिक योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया। डॉ. रजत भार्गव द्वारा आयोजित पक्षी प्रश्नोत्तरी में भाग लेने वाले शोभित विश्वविद्यालय के पांच विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया।
 

टर्टल हैचरी का भ्रमण

कार्यक्रम के अंतिम चरण में अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने टर्टल हैचरी का भ्रमण किया, जहां कछुओं के संरक्षण, अंडों के सुरक्षित ऊष्मायन एवं शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
 

संदेश

अपने संबोधन में अतिथियों ने आर्द्रभूमियों को प्रकृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रम समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
 
कार्यक्रम में प्रभागीय निदेशक (डीएफओ) सुश्री वंदना फोगाट, ब्लॉक प्रमुख नितिन पोसवाल, जिला मंत्री सुनील पोसवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियांक भारती, वन क्षेत्राधिकारी श्रीमती खुशबू उपाध्याय, ऑर्निथोलॉजिस्ट डॉ. रजत भार्गव, हरिमोहन मीणा (WWF) सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, पर्यावरण प्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि एवं विभिन्न विद्यालयों के 300 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम वन विभाग, WWF एवं स्थानीय प्रशासन के समन्वय से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
Edited By : Chetan Gour
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