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Last Modified: मेरठ (उप्र) , शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 (12:31 IST)

मेरठ के केंद्रीय विद्यालय में इतिहास बना कॉमिक, नवाचार से डर हुआ छूमंतर

History has been turned into a comic book at Kendriya Vidyalaya in Meerut
Meerut Kendriya Vidyalaya : आमतौर पर इतिहास का नाम सुनते ही कई छात्रों के चेहरे पर डर और ऊब साफ दिखाई देने लगती है। तारीखें, युद्ध, राजवंश और लंबे विवरण अक्सर विद्यार्थियों को नीरस लगते हैं, लेकिन मेरठ के पंजाब लाइन स्थित पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय में इतिहास अब डर नहीं, बल्कि आनंद और रचनात्मकता का विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी नवाचार, बेहतर सीखने के परिणाम और शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के लिए स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और शिक्षक प्रशिक्षण जैसी पहल की जा रही हैं।

अब ये प्रयास ज़मीनी स्तर पर असर दिखाने लगे हैं और आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। इसी नवाचार की कड़ी में मेरठ के पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय के इतिहास शिक्षक निरुपम गुप्ता ने उस विषय को रोचक बना दिया, जिसे छात्र अक्सर कठिन और उबाऊ मानते थे। अब छात्र इतिहास सिर्फ पढ़ ही नहीं रहे, बल्कि उसे जी भी रहे हैं।

निरुपम गुप्ता का मानना है कि इतिहास कभी नीरस हो ही नहीं सकता, बस उसे पढ़ाने का तरीका बदलने की ज़रूरत है। छात्रों की इतिहास से अरुचि दूर करने के लिए उन्होंने एक अभिनव प्रयोग किया। सबसे पहले उन्होंने विद्यार्थियों का विश्वास जीता, उनका मनोबल बढ़ाया और फिर NCERT की कक्षा 11वीं और 12वीं की पूरी इतिहास की पुस्तकों को कॉमिक्स में बदलने की योजना बनाई।
इस प्रयोग के तहत इतिहास के अध्यायों को कहानियों के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कक्षा 11वीं में इतिहास के 7 अध्याय और कक्षा 12वीं में 12 अध्याय हैं। इन सभी अध्यायों को छात्रों ने स्वयं कॉमिक्स के रूप में तैयार किया।
 
कॉमिक्स बनाते समय विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक घटनाओं को हूबहू दर्शाया, संवाद खुद लिखे और उस समय की वेशभूषा, कलाकृतियों तथा स्थापत्य को कार्टून चित्रों में उकेरा। परिणामस्वरूप छात्र विषय से गहराई से जुड़ते चले गए। यह कहना गलत नहीं होगा कि छात्रों ने सिर्फ इतिहास पढ़ा नहीं, बल्कि उसे गढ़ा भी। पारंपरिक पढ़ाई की लकीर से हटकर यह प्रयोग छात्रों की सोच और दृष्टिकोण को बदलने वाला साबित हुआ।
 
इतिहास को कालखंडों और सभ्यताओं में पिरोते हुए छात्र सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर विजयनगर साम्राज्य तक पहुंचे। उन्हें ऐसा महसूस होने लगा मानो वे स्वयं उस दौर में मौजूद हों। सिंधु घाटी सभ्यता के अध्याय में छात्रों ने उस समय की मुहरें, कलाकृतियां और नगर संरचना को पहले समझा और फिर बिल्कुल उसी रूप में चित्रित किया। वहीं विजयनगर साम्राज्य को समझने के लिए कॉमिक्स में टाइम मशीन का प्रयोग किया गया, जिसमें छात्र खुद को दर्शक पात्र बनाकर इतिहास के उस काल में पहुंच गए और घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।
 
इस अनूठे प्रयोग के माध्यम से छात्रों ने इतिहास को पढ़ा, सीखा, समझा और लिखकर चित्रित किया। जो छात्र स्वयं को इतिहास के पात्र के रूप में वेशभूषा, स्थापत्य और परिवेश में ढाल चुका हो, वह उसे जीवनभर नहीं भूल सकता। इस अभिनव प्रयास से कल्पना और तथ्यों के बीच संतुलन मजबूत हुआ, जिससे छात्र अब किताबों के सवाल-जवाब भी आसानी से याद कर पा रहे हैं।
निरुपम गुप्ता बताते हैं कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत विद्यालयों में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका यह प्रयोग नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप है, क्योंकि इसमें रटंत विद्या के बजाय रचनात्मक और सर्वांगीण विकास पर जोर दिया गया है।

इस प्रक्रिया में छात्रों ने लेखन, चित्रांकन, कॉमिक डिज़ाइन, तर्क क्षमता, कल्पनाशक्ति और तकनीकी समझ जैसी कई विधाओं में दक्षता हासिल की। यहां तक कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को भी छात्रों ने सहजता से समझा।
 
अब यह इतिहास शिक्षक इस अभिनव प्रयोग को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रहा है, ताकि भविष्य में अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकें। यह प्रयास UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
 
कक्षा 11वीं-12वीं के छात्रों का कहना है कि निरुपम सर के मार्गदर्शन में जब उन्होंने पूरे अध्याय को कॉमिक्स में बदला, तो इतिहास बेहद आसान और मज़ेदार लगने लगा। अब यह अध्याय वे कभी नहीं भूल पाएंगे। वास्तव में इतिहास की पढ़ाई अब एक रचनात्मक यात्रा बन चुकी है। जो विषय कभी ऊबाऊ और कठिन लगता था, वह अब खेल-खेल में सिखाया जा रहा है। इतिहास अब किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि काग़ज़ों पर उकेरा गया एक जीवंत अतीत बन चुका है।
Edited By : Chetan Gour
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