Uttarakhand: रुद्रप्रयाग गुरुद्वारे में 40 घंटे से तनाव, छत पर डटे निहंग, सेना तैनात, जानिए क्या है पूरा विवाद?
Rudraprayag Gurudwara controversy: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में नगरासू (दमदमा साहिब) गुरुद्वारे में पिछले कुछ दिनों से एक गंभीर और तनावपूर्ण गतिरोध चल रहा है। श्री हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर स्थित इस गुरुद्वारे की छत पर पारंपरिक हथियारों (तलवार, भाले, कुल्हाड़ी) से लैस कुछ निहंग सिख लगभग 40 से 50 घंटे से अधिक समय से डटे हुए हैं। इस संवेदनशील माहौल को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। यहां पुलिस के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सेना के जवानों को तैनात किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
इस विवाद की जड़ें 16 जून 2026 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ी हैं। हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे निहंग सिखों के एक गुट का स्थानीय बाजार में पार्किंग को लेकर विवाद हो गया था। यह विवाद इतना बढ़ा कि तलवारें चल गईं, जिसमें कुछ स्थानीय लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों के हंगामे के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और 4 निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कर्णप्रयाग की घटना के बाद, लगभग 7 से 8 निहंग सिखों का एक दूसरा दल रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे पहुंचा।
20 जून को लंगर के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन समिति और इन निहंगों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। निहंगों का आरोप था कि उनके साथियों पर एकतरफा कार्रवाई हुई है, इसलिए वे गुरुद्वारा प्रबंधन से विरोध प्रदर्शन में समर्थन मांग रहे थे। विवाद बढ़ने पर प्रबंधन ने पुलिस (112) को फोन कर दिया।
पुलिस को आते देख निहंग सिख घबरा गए और हथियारों के साथ गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल (छत) पर चढ़ गए और ऊपर जाने वाले रास्ते को ब्लॉक कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक भाले और तलवारों से लैस लगभग छह निहंग शनिवार शाम करीब 4 बजे गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और तब से वहीं डटे हुए हैं। वे गिरफ्तार किए गए 4 निहंगों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
क्या कहना है गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी का?
गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार (ग्रंथी) बाबा बेंत सिंह के मुताबिक, शुरुआत में निहंगों ने कुछ सेवादारों/श्रद्धालुओं को बंधक बनाने की कोशिश की थी, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी बंधक नहीं है।
आरोप है कि छत पर मौजूद निहंगों ने गुरुद्वारे की संपत्तियों, जैसे सोलर पैनल आदि को नुकसान पहुंचाया और नीचे की तरफ पत्थर भी फेंके। हालांकि गुरुद्वारे के भीतर आम श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षा कारणों से फिलहाल रोका गया है, लेकिन जिला प्रशासन का कहना है कि मुख्य हेमकुंड साहिब और चारधाम यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है।
निहंगों से बातचीत जारी
इससे पहले, रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने कहा था कि इनसे बातचीत की जा रही है और बातचीत के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। निहंगों में से एक प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से बात करने के लिए छत से नीचे आया है और बाकी निहंगों के साथ बातचीत चल रही है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि हेमकुंड साहिब यात्रा शांतिपूर्वक चल रही है और गुरुद्वारे में अरदास और लंगर सहित नियमित गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी हैं। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की।
क्या कहना है गढ़वाल आईजी का?
इस गतिरोध को कर्णप्रयाग झड़प से जोड़ने वाली रिपोर्टों को खारिज करते हुए, गढ़वाल के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि यह घटना शुरुआत में निहंग श्रद्धालुओं और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच एक विवाद के रूप में शुरू हुई थी, जहां वे लंगर छक रहे थे। बहस के बाद, प्रबंधन ने 112 नंबर पर कॉल किया था, जिस पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। यह मुख्य रूप से गुरुद्वारा प्रबंधन और यहां आए निहंग श्रद्धालुओं के बीच का आंतरिक विवाद है और विशेष रूप से, प्रबंधन के सदस्य भी निहंग समुदाय से ही ताल्लुक रखते हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
