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PM मोदी के केदारनाथ दौरे से पहले रूठे पुरोहितों को मनाने में जुटी BJP

Narendra Modi
प्रमुख बिंदु
  • रूठे तीर्थ पुरोहितों को मनाने में जुटी BJP
  • केदारनाथ कूच करेंगे तीर्थ पुरोहित
  • भैरवनाथ के कपाट मंगलवार को बंद हुए
केदारनाथ। 5 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे का चारधाम तीर्थ पुरोहित हक-हकूकधारी महापंचायत समिति ने विरोध जताने का ऐलान किया है। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर सरकार तीर्थ पुरोहित समाज का अपमान कर रही है इसलिए 3 नवंबर को केदारनाथ कूच करने की भी योजना है। इसके बाद भी सरकार नहीं चेती तो 5 नवंबर को पीएम के दौरे का विरोध किया जाएगा।
 
इस ऐलान के बाद भाजपा इस विरोध को शांत कर आंदोलनकारियों को समझाने में लग गई है। बीते दिन तीर्थ पुरोहितों ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की केदार एंट्री बैन कर डाली थी। प्रधानमंत्री के केदार दौरे की व्यवस्था देखने आए मंत्री धनसिंह रावत और भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक को भी घेर डाला था।

 
घेराव से मुक्त होने के बाद सोमवार को मदन कौशिक और प्रोटोकॉल मंत्री ने मोदी के दौरे को देखते हुए केदार धाम पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने जिलाध्यक्ष रुद्रप्रयाग सहित जिला कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ भी बैठक कर रैली को लेकर जरूरी निर्देश और जिम्मेदारियां सौपीं, वहीं 12 ज्योतिर्लिंगों में ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर भी वार्ता की। कौशिक ने कहा कि मोदी के दौरे को भव्य बनाने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य है कि मोदी के उत्तराखंड के किसी भी धाम पर आने से विश्व में संदेश जाता है और यह उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है।
 
देवस्थानम बोर्ड के सीईओ व गढ़वाल कमिश्नर रविनाथ रमन मोदी के भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने केदार पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी मनुज गोयल के साथ चर्चा करते हुए जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। पीएम मोदी के दौरे के दौरान उनके द्वारा केदारनाथ पुनर्निर्माण के पहले चरण में पूरे हो चुके निर्माण कार्यों का लोकार्पण व दूसरे चरण में लगभग 120 करोड़ की लागत से होने वाले कार्यों का भूमिपूजन व शिलान्यास किया जाना है।
 
दूसरी तरफ केदारनाथ के रक्षक के रूप में पूजे जाने वाले भगवान भैरवनाथ के कपाट मंगलवार को पौराणिक रीति-रिवाजों के साथ शीतकाल के 6 माह के लिए बंद कर दिए गए। केदारनाथ के कपाट बंद होने से पहले जो भी मंगल या शनिवार पहले पड़ता हो, उसमें भैरवनाथ के कपाट बंद होने की परंपरा है। भैरवनाथ को भगवान केदारनाथ के क्षेत्र रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
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एन. पांडेय
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