हिंदी भाषा की धाराओं का संगम
GN
विगत दिनों न्यूयॉर्क के भारतीय विद्या भवन में अमेरिका के हिंदी विकास मंच और इंग्लैंड की गीतांजलि नामक संस्थाओं के सौजन्य से एक अद्वितीय काव्य-संध्या का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह कार्यक्रम इस दृष्टिकोण से अद्वितीय था कि यह विश्व के भूभाग (इंग्लैंड) के हिंदी प्रेमियों द्वारा दूसरे भूभाग (उत्तरी अमेरिका) की सद्भावना यात्रा का एक महत्वपूर्ण अंग था। भारतीय विद्या भवन के दीपक दवे ने सभागार में उपस्थित व्यक्तियों का स्वागत करते हुए डॉ. जयरामन की ओर से भविष्य में होने वाले ऐसे आयोजनों में भवन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
इंग्लैंड से पधारे सद्भावना मंडल में डॉ. कृष्ण कुमार के नेतृत्व में आए अन्य कवि-कवियात्रियों में सर्वश्री परवेज मुजफ्फर, कृष्ण कन्हैया, नीना पॉल, श्रीमती अरुण सबरवाल, नरेंद्र ग्रोवर, श्रीमती जय वर्मा, श्रीमती स्वर्ण तलवाड़ उपस्थित थे।
डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि गीतांजलि एक बहुभाषी साहित्यिक समुदाय है जो मुख्य रूप से बरकिंघम, यूके में स्थित है पर अब इसकी शाखाएँ अन्य शहरों में भी शुरू हो रही हैं। यह संस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य के विकास की दिशा में निष्ठा के साथ सेवा करती आई है। हिंदी की सेवा करने का महत्वपूर्ण कार्य साहित्य लेखन के माध्यम से हो रहा है। प्रवासी भारतीय अनेक हिंदी कार्यक्रमों की रूप-रेखा रचते चले आ रहे हैं। उनका अपने देश की मिट्टी से प्रेम और हिंदी भाषा व संस्कृति से लगाव प्रशंसनीय है।
उन्होंने यह भी कहा कि 'भारत से दूर रहकर अपनी भाषा को कैसे जीवित रखा जाए, इस प्रयास में आनेवाली कठिनाइयों से कैसे जूझा जाए और संभावनाओं को कैसे साकार किया जाए इस दिशा में प्रवासी भारतीय साहित्यकारों का योगदान सराहनीय है।'
विचारों के आदान-प्रदान के उपरांत काव्य पाठ के साथ-साथ रचना पाठ भी हुआ। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की न्यूयॉर्क शाखा के पूर्वाध्यक्ष मेजर शेरबहादुर सिंह भी श्रोताओं में उपस्थित थे।

