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Chaitra Navratri 2020 | चैत्र नवरात्रि में करें ये 5 कार्य, होगी मनोकामना पूर्ण
नवरात्रि वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- चैत्र, आषाढ़, अश्विन और पौष। चैत्र माह में चैत्र नवरात्रि जिसे बड़ी नवरात्रि या वसंत नवरात्रि भी कहते हैं। आषाढ़ और पौष माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। अश्विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से प्रारंभ हो रही है। चैत्र माह से ही भारतीय नववर्ष का प्रारंभ भी होता है। यह माह कैलेंडर का पहला माह है। आओ जानते हैं कि ऐसे कौन से 5 कार्य करें कि मनोकामना हो पूर्ण।
1. उपवास : नवरात्रियों में कठिन उपवास और व्रत रखने का महत्व है। उपवास रखने से अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई हो जाती है। उपवास रखकर ही साधना की जा सकती है। यथासम्भव नमक और मीठा (चीनी मिष्ठानादि) छोड़ दें। उपवास में रहकर इन नौ दिनों में की गई हर तरह की साधनाएं और मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
2. नियम संयम से रहें- इन नौ दिनों में भोजन, मद्यमान, मांस-भक्षण और स्त्रिसंग शयन वर्जित माना गया है। लेकिन जो व्यक्ति इन नौ दिनों में पवित्र नहीं रहता है उसका बुरा वक्त कभी खत्म नहीं होता है। यदि आपने 9 दिनों तक साधना का संकल्प ले लिया है तो उसे बीच में तोड़ा नहीं जा सकता। मन और विचार से पवित्रता बनाकर रखें। छल, कपट प्रपंच और अपशब्दों का प्रयोग ना करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें, गलत लोगों की संगति ना करें।
इसके अतिरिक्त, पूरा या नियमित समय तक मौन, भूमि-शयन, चमड़े की बनी वस्तु का त्याग, पशुओं की सवारी का त्याग, अपनी शारीरिक सेवाएं स्वयं करना तय करें। अपनी सुख-सुविधाओं को यथासम्भव त्याग कर उपासना में लीन होना ही तप है। पूजा या साधना का स्थान और समय भी नियुक्त होना चाहिए।
3. साधारण साधना : नवदुर्गा में गृहस्थ मनुष्य को साधारण साधना ही करना चाहिए। इस दौरान उसे घट स्थापना करके, माता की ज्योत जलाकर चंडीपाठ, देवी महात्म्य परायण या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। यदि यह नहीं कर सकते हैं तो इन नौ दिनों के दौरान प्रतिदिन एक माला माता के मंत्र का जाप करना चाहिए। साधना में किसी भी प्रकार की गलती माता को क्रोधित कर सकती है। यदि आप इस दौरान बीमार पड़ जाते हैं, आपको अचानक ही कहीं यात्रा में जाना है या घर पर किसी भी प्रकार का संकट आ जाता है तो इस दौरान उपवास तोड़ना या साधना छोड़ना क्षम्य है।
सामान्यजन माता के बीज मंत्र या शाबर मंत्रों का जाप कर सकते हैं या अष्टमी की रात्रि में दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक मंत्र को विधिवत सिद्ध किया जाता है। सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ का 108 बार अष्टमी की रात्रि में पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में कम से कम दोनों काल (प्रातः एवं सायं) में तीन घंटा समय निकाल कर 26 माला प्रति दिन नियमित समय पर जपना चाहिए। शौच स्नान से निवृत्त होकर शुद्धतापूर्वक प्रातःकालीन उपासना पूर्व मुख और संध्याकाल की उपासना पश्चिम मुख होकर करनी चाहिए। जप के समय घी का दीपक जलाकर रखें और जल का एक पात्र निकट में रखें।
4. कन्या भोज व दान : सप्तमी, अष्टमी और नौवमी के दिन कन्या पूजन करके उन्हें अच्छे से भोजन ग्रहण कराना चाहिए। यदि आप कन्या भोज नहीं कर रहे हैं तो आप गरीब कन्याओं को दान दक्षिणा भी दे सकते हैं। खासकर उन्हें हरे वस्त्र या चुनरी भेंट करें। आप यह कार्य किसी मंदिर में जाकर भी कर सकते हैं। वहां आप माता को खीर का भोग लगाकर कन्याओं को दान दें।
5. हवन : अंतिम दिन विधिवत रूप से साधना और पूजा का समापन करके हवन करना चाहिए। हवन करते वक्त हवन के नियमों का पालन करना चाहिए। उसके बाद में निर्माल्य का विसर्जन करना चाहिए।
उपरोक्त पांच कार्य यदि आप नियम से और श्रद्धापूर्वक करेंगे तो आपकी जो भी मनोकामना होगी वह पूर्ण होगी।
