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मिसाइलें तैयार! भारत ने पहली बार तैनात किए 'रेडी-टू-फायर' परमाणु हथियार, दुनिया में खलबली

India Ready To Fire Nuclear Weapons
India Ready To Fire Nuclear Weapons: क्या भारत और उसके पड़ोसियों के बीच परमाणु युद्ध का खतरा अब तक के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है? स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। दशकों पुरानी रक्षा नीति को मरोड़ते हुए भारत ने इतिहास में पहली बार, शांति काल के दौरान ही अपने 12 परमाणु बमों (Nuclear Warheads) को मिसाइलों पर फिट करके 'रेडी-टू-फायर' (दागने के लिए तैयार) मोड में तैनात कर दिया है।
 
अब तक वैज्ञानिकों की तिजोरियों में बंद रहने वाले ये घातक परमाणु हथियार अब न्यूक्लियर सबमरीन और अंडरग्राउंड मिसाइल साइलो में सीधे सेना के कंट्रोल में हैं। चीन की दादागिरी और साल 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए खुफिया 'ऑपरेशन सिंदूर' के तनाव के बाद, भारत का यह कदम सीधे तौर पर दुश्मनों को नेस्तनाबूद करने की खुली चेतावनी माना जा रहा है। खेल बदल चुका है, और भारत की परमाणु मिसाइलें अब पलक झपकते ही तबाही मचाने के लिए पूरी तरह 'लाइव' हैं! ALSO READ: चीन की परमाणु प्रलय की तैयारी? रेगिस्तान में बिछाया मिसाइलों का खौफनाक जाल, सीधे अमेरिका पर निशाना!

बड़ा रणनीतिक बदलाव

दशकों से चली आ रही पारंपरिक रक्षा नीति से यह एक बहुत बड़ा रणनीतिक बदलाव है। यहां इस कदम, इसके तकनीकी स्वरूप और वैश्विक व क्षेत्रीय स्तर पर इसके मायने काफी अहम है। जानकारी के मुताबिक अब कुछ परमाणु हथियारों को मिसाइल साइलो और न्यूक्लियर सबमरीन पर तैयार रखा गया है। इस भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 तक भारत के पास 190 परमाणु हथियार थे, जो कि वर्तमान हालात में थोड़े बढ़ भी गए हैं। 
 
इससे पहले भारत हमेशा से अपने परमाणु हथियारों (Warheads) और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलों या विमानों (Delivery Systems) को शांति काल में अलग-अलग रखता था। हथियार वैज्ञानिकों के नियंत्रण में केंद्रीय भंडारण में सुरक्षित होते थे और सेना के पास केवल डिलीवरी सिस्टम होता था। SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार भारत ने अपने 12 परमाणु वॉरहेड्स को उनके लॉन्चर्स या मिसाइलों के साथ 'मेट' यानी जोड़ दिया है और उन्हें ऑपरेशनल बेस पर तैनात कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि ये 12 परमाणु हथियार अब 'रेडी-टू-फायर' (Ready-to-fire) स्थिति में हैं। ALSO READ: भारत ने तोड़ा पाकिस्तान के परमाणु हमले का भ्रम, Operation Sindoor पर वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने क्या बताया
 
भारत अब अपनी आधुनिक मिसाइलों (जैसे अग्नि श्रृंखला और के-सीरीज की सबमरीन मिसाइलें) को 'कैनिस्टर' (विशेष सीलबंद ट्यूब) में रखता है। कैनिस्टर तकनीक का मतलब ही यह है कि मिसाइल के अंदर वॉरहेड पहले से फिट है और इसे बेहद कम समय के नोटिस पर दागा जा सकता है।

नो फर्स्ट यूज, लेकिन.... 

हालांकि भारत की परमाणु नीति 'नो फर्स्ट यूज' यानी पहले परमाणु हमला न करना के सिद्धांत पर टिकी है। इसका मतलब है कि भारत किसी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन यदि भारत पर परमाणु हमला होता है, तो वह इतना भीषण जवाबी हमला करेगा जिसे दुश्मन बर्दाश्त न कर सके। दरअसल, जवाबी हमले को अचूक बनाने के लिए यह जरूरी है कि भारत के परमाणु हथियार दुश्मन के पहले हमले में नष्ट न हों। समुद्र के नीचे छिपी पनडुब्बियों पर परमाणु हथियारों की यह 'लाइव तैनाती' भारत की सेकेंड स्ट्राइक क्षमता को अचूक और अजेय बनाती है। ALSO READ: बढ़ रहा है परमाणु हथियारों का जख़ीरा, परमाणु अप्रसार संधि में बदलाव जरूरी, UN प्रमुख गुटेरेश ने किया आगाह

क्या है इसके पीछे असली मकसद?

चीन को जवाब : चीन ने हाल के वर्षों में अपने परमाणु जखीरे का तेजी से आधुनिकीकरण किया है। एक जानकारी के मुताबिक चीन के पास कुल 620 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से 34 तैनात हैं। चीन ने शांति काल में भी अपनी मिसाइलों को हाई-कॉम्बैट रेडीनेस पर रखना शुरू कर दिया है। चीन की इस आक्रामक नीति को संतुलित करने और उसे कड़ा संदेश देने के लिए भारत ने अपनी तत्परता के स्तर को बढ़ाया है।
 
पाकिस्तान से तनाव का असर : रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के रूप में जो संक्षिप्त सैन्य तनाव देखा गया था, उसके बाद भारत ने अपनी रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा और जवाबी तैयारी को और कड़ा करने का फैसला किया। हालांकि भारत का मुख्य ध्यान अब लंबी दूरी के डिलीवरी सिस्टम पर है जो पूरे चीन को कवर कर सकें, लेकिन पाकिस्तान की ओर से किसी भी दुस्साहस को रोकने के लिए यह 'रेडी-टू-फायर' मोड बेहद अहम है। हालांकि भारत के कदम से पूरी दुनिया में हलचल है। 
 
हालांकि भारत द्वारा 12 परमाणु हथियारों की यह पहली तैनाती किसी आक्रामक युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि अपनी ताकत का प्रदर्शन है। 'नो फर्स्ट यूज' नीति पर कायम रहते हुए भारत ने दुनिया को यह साफ संदेश भी दे दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए अपनी सैन्य और परमाणु तत्परता को किसी भी हद तक अपग्रेड करने से पीछे नहीं हटेगा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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