स्पेस में भारत का Axiom-4 मिशन क्यों है खास, एलन मस्क के स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल से होगी वापसी
भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम (Gaganyaan Programme) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के निर्माण की दिशा में Axiom-4 (Ax-4) मिशन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर भारत के गगनयात्री (भारतीय अंतरिक्ष यात्री) ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला द्वारा किए गए 7 मुख्य माइक्रोग्रेविटी (माइक्रोग्रैविटी/शून्य गुरुत्वाकर्षण) वैज्ञानिक प्रयोग सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। इसरो (ISRO) और नासा (NASA) के संयुक्त तत्वावधान में इन प्रयोगों के सैंपल्स और वैज्ञानिक डेटा को पृथ्वी पर वापस लाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ALSO READ: ISRO में मची खलबली, चंद्रयान और गगनयान से जुड़े वैज्ञानिक क्यों दे रहे इस्तीफा?
1. मायोजेनेसिस (Myogenesis - मांसपेशी पुनर्जनन)
इसरो और नासा के फ्लाइट सर्जनों तथा वैज्ञानिकों की टीम मिशन डेटा संग्रह और वापसी के प्रोटोकॉल पर काम कर रही है:
Axiom-4 मिशन से मिला डेटा भारत के अपने गगनयान-1 (Gaganyaan Crewed Mission) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS - Bharatiya Antariksha Station) के निर्माण में रीढ़ की हड्डी का काम करेगा। भारतीय शोध संस्थानों को माइक्रोग्रैविटी रिसर्च का जो व्यावहारिक अनुभव मिला है, वह देश के युवाओं और वैज्ञानिकों के लिए नए रास्ते खोलेगा।
माइक्रोग्रैविटी में भारत के 5 मुख्य प्रयोग : आसान भाषा में समझें
अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी स्थिति (जहाँ गुरुत्वाकर्षण बल लगभग शून्य होता है) में मानव शरीर, पौधों और सूक्ष्मजीवों में होने वाले बदलावों को समझने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा डिजाइन किए गए प्रयोगों को अंजाम दिया गया:
1. मायोजेनेसिस (Myogenesis - मांसपेशी पुनर्जनन)
- सरल व्याख्या : लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने पर अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियां कमजोर (Muscle Wasting) होने लगती हैं। इस प्रयोग में मानव मांसपेशी कोशिकाओं पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभावों का अध्ययन किया गया।
- फायदा : इससे भविष्य में गहरे अंतरिक्ष अभियानों के दौरान एस्ट्रोनॉट्स की मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए दवाएं बनाने और पृथ्वी पर बुजुर्गों में मांसपेशियों की कमजोरी के इलाज में मदद मिलेगी।
- सरल व्याख्या: अंतरिक्ष में ताजे भोजन की उपलब्धता के लिए मूंग और मेथी के बीजों को शून्य गुरुत्वाकर्षण में उगाकर (Germination) देखा गया।
- फायदा : यह अध्ययन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष स्टेशन पर ही पौष्टिक भोजन उगाने (Space Farming) की क्षमता प्रदान करेगा।
- सरल व्याख्या : 'टार्डिग्रेड्स' पृथ्वी के सबसे छोटे लेकिन सबसे मजबूत जीव हैं, जो अत्यधिक विकिरण (Radiation) और शून्य तापमान में भी जीवित रह सकते हैं।
- फायदा : अंतरिक्ष के विकिरण और माइक्रोग्रैविटी में इनके पुनरुत्थान (Revival) और डीएनए संरचना में बदलाव का अध्ययन कर इंसानों को रेडिएशन से बचाने के सूत्र खोजे जा रहे हैं।
- सरल व्याख्या : ये ऐसे सूक्ष्मजीव हैं जो प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के जरिए कार्बन डाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं और नाइट्रोजन स्थिर करते हैं।
- फायदा : अंतरिक्ष अभियानों में लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Life Support System) को आत्मनिर्भर बनाने, ऑक्सीजन उत्पादन और बायो-फ्यूल तैयार करने में यह रिसर्च बेहद अहम है।
- सरल व्याख्या : माइक्रोग्रैविटी में जब अंतरिक्ष यात्री कंप्यूटर और स्क्रीन पर काम करते हैं, तो उनकी आँखों की गति (Gaze Fixation) और तनाव के स्तर पर क्या असर पड़ता है, इसका विश्लेषण किया गया।
स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल से धरती पर वापसी की योजना
इसरो और नासा के फ्लाइट सर्जनों तथा वैज्ञानिकों की टीम मिशन डेटा संग्रह और वापसी के प्रोटोकॉल पर काम कर रही है:- अनडॉकिंग (Undocking): स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन (Crew Dragon) अंतरिक्ष यान द्वारा ISS से अलग होकर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के लिए थ्रस्टर्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
- स्पलैशडाउन (Splashdown): पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के बाद यान पैराशूट के जरिए सुरक्षित महासागर में लैंड (Splashdown) करेगा, जहाँ से रिकवरी टीमें सैंपल्स और गगनयात्री को सुरक्षित बाहर निकालेंगी।
- पुनर्वास (Rehabilitation): पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में वापस ढलने के लिए इसरो और नासा के चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में स्वास्थ्य जांच और कार्डियोवैस्कुलर मूल्यांकन किया जाएगा।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर इसका रणनीतिक असर
इसरो (ISRO) का आधिकारिक दृष्टिकोण:Axiom-4 मिशन से मिला डेटा भारत के अपने गगनयान-1 (Gaganyaan Crewed Mission) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS - Bharatiya Antariksha Station) के निर्माण में रीढ़ की हड्डी का काम करेगा। भारतीय शोध संस्थानों को माइक्रोग्रैविटी रिसर्च का जो व्यावहारिक अनुभव मिला है, वह देश के युवाओं और वैज्ञानिकों के लिए नए रास्ते खोलेगा।

