नीति कथा - खुदा का घर
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गुरु नानक तीर्थाटन करते हुए मक्काशरीफ पधारे। रात हो गई थी, अतः वे समीप ही एक वृक्ष के नीचे सो गए।
उनमें से एक ने नानक देव को उठा देख डांटकर पूछा, 'कौन हो जी तुम, जो खुदा पाक के घर की ओर पांव किए सो रहे हो?'
बात यह थी कि नानक देव के पैर जिस ओर थे, उस ओर काबा था। नानक देव ने उत्तर दिया, 'जी, मैं एक मुसाफिर हूं, गलती हो गई। आप इन पैरों को उस ओर कर दें जिस ओर खुदा का घर नहीं हो।'
यह सुनते ही उस मुल्ला ने गुस्से से पैर खींचकर दूसरी ओर कर दिए किंतु सबको यह देख आश्चर्य हुआ कि उनके पैर अब जिस दिशा की ओर किए गए थे, काबा भी उसी तरफ है। वह मुल्ला तो आगबबूला हो उठा और उसने उनके पैर तीसरी दिशा की ओर कर दिए किंतु यह देख वह दंग रह गया कि काबा भी उसी दिशा की ओर है।
काजी ने नानक देव से प्रश्न किया, 'तुम कौन हो, हिंदू या मुसलमान?'
'जी, मैं तो पांच तत्वों का पुतला हूं' - उत्तर मिला।
'फिर तुम्हारे हाथ में पुस्तक कैसे है?'
'यह तो मेरा भोजन है। इसे पढ़ने से मेरी भूख मिटती है।'

