0

नानक देव की सीख : जब गुरु नानक जी के आगे बगदाद के शासक को भी सिर झुकाना पड़ा

गुरुवार,नवंबर 22, 2018
Guru Nanak ki Seekh
0
1
गुरु नानक देव जी मध्यप्रदेश में संभवतः महाराष्ट्र के नासिक शहर से होते हुए बुरहानपुर आए थे। बुरहानपुर में वे ताप्ती नदी के किनारे ठहरे। वहां से वे ओंकारेश्वर गए और ओंकारेश्वर से इंदौर।
1
2
कहा जाता है कि गुरु नानकदेवजी का आगमन ऐसे युग में हुआ जो इस देश के इतिहास के सबसे अंधेरे युगों में था।
2
3
समाज में समानता का नारा देने के लिए उन्होंने कहा कि ईश्वर हमारा पिता है और हम सब उसके बच्चे हैं और पिता की निगाह में छोटा-बड़ा कोई नहीं होता। वही हमें पैदा करता है और हमारे पेट भरने के लिए खाना भेजता है। गुरु नानक देव के यह 8 दोहे आपके लिए...
3
4
गुरुनानकदेवजी का अवतरण संवत्‌ 1526 में कार्तिक पूर्णिमा को ननकाना साहिब में हुआ। सतगुरुजी की महानता के दर्शन बचपन से ही दिखने लगे थे।
4
4
5
बालक नानक बोले, 'यदि यज्ञोपवित ही पहनाना है तो ऐसा पहनाओ कि जो न टूटे, न गंदा हो और न बदला जा सके। जो ईश्वरीय हो, जिसमें दया का कपास हो, संतोष का सूत हो। ऐसा यज्ञोपवित ही सच्चा यज्ञोपवीत है। पुरोहित जी! क्या आपके पास ऐसा यज्ञोपवित है?' ...और यह सुन ...
5
6
बचपन से प्रखर बुद्धिवाले नानक देव सिख धर्म के संस्थापक हैं। वे उम्र के 16वें वर्ष में शादी होने के बाद अपनी पत्नी और दोनों पुत्रों को छोड़कर धर्म के मार्ग पर निकल पड़ें। बचपन से ही उनका मन धर्म और अध्यात्म में लगता था।
6
7
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी का आरंभ मूल मंत्र से होता है। ये मूल मंत्र हमें उस परमात्मा की परिभाषा बताता है जिसकी सब अलग-अलग रूप में पूजा करते हैं।
7
8
शुक्रवार, 23 नवंबर को श्री गुरु नानक देव का 550वां प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। सिख संप्रदाय में इस पर्व को मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है।
8
8
9
ऐतिहासिक तथा सांस्‍कृतिक दृष्टि से प्राचीन, नर्मदापुर तथा आधुनिक काल में होशंगाबाद जिले का महत्‍वपूर्ण स्‍थान रहा है। पुण्‍य सलिला मां नर्मदा की महिमा न्‍यारी है तभी यहां सांप्रदायिक सद्‍भाव की गौरवमयी मिसालें देखने को मिलती है।
9
10
23 नवंबर 2018 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्री गुरु नानक देव साहिब का प्रकाशोत्‍सव मनाया जाएगा।
10
11
गुरु नानक देवजी का प्रकाश पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है। सिखों के पहले गुरु नानक देव जी की जयंती देशभर में प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है।
11
12
भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व आदिकाल से ही रहा है। सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। गुरु नानक देव से मोक्ष तक पहुंचने के एक नए मार्ग का अवतरण होता है।
12
13
गुरु नानक देवजी सिख धर्म के संस्थापक ही नहीं, अपितु संपूर्ण सृष्टि के जगद्गुरु थे। 'नानक शाह फकीर। हिन्दू का गुरु, मुसलमान का पीर।
13
14
सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म लाहौर के पास तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ। । उनके चेहरे पर बाल्यकाल से ही अद्भुत तेज दिखाई देता था। गुरु नानक जी के दिए गए मूल मंत्र आज भी प्रासंगिक हैं। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं ...
14
15
गुरुनानक देव जी का प्रकाशोत्सव पर्व 4 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। बचपन से ही प्रखर बुद्धिवाले नानक देव सिख धर्म के संस्थापक हैं। बचपन से ही उनका मन धर्म और अध्यात्म में लगता था। उन्होंने भारतसहित अनेक देशों की यात्राएं कर धार्मिक एकता के उपदेशों
15
16
गुरुनानक देवजी का अवतरण संवत्‌ 1526 में कार्तिक पूर्णिमा को माता तृप्ता देवीजी और पिता कालू खत्रीजी के घर श्री ननकाना साहिब में हुआ। उनकी महानता के दर्शन बचपन से ही दिखने लगे थे।
16
17
एक समय की बात है। गुरु नानक बगदाद गए हुए थे। वहां का शासक बड़ा ही अत्याचारी था। वह जनता को कष्ट तो देता ही था, उनकी संपत्ति लूटकर अपने खजाने में जमा भी कर लिया करता था। उसे जब मालूम हुआ कि हिंदुस्तान से कोई साधु पुरुष आया है तो वह नानकजी से मिलने ...
17
18
गुरु नानकदेव भाई मरदाने और कौड़ा राक्षस के साथ वर्तमान के मढ़ाताल पहुंचे, जहां कौड़ा राक्षस कई सालों तक गुरु नानकदेव की भक्ति करता रहा।
18
19
गुरु नानक एक बार एक गांव में गए। उस गांव के लोग नास्तिक विचारधारा के थे। वे भगवान, उपदेश और पूजा-पाठ में बिल्कुल भी विश्वास नहीं रखते थे। वे साधुओं को ढोंगी की संज्ञा देते।
19