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इंदौर क्‍यों सूखा, बचे मानसून में भी बारिश की नहीं उम्‍मीद, कमजोर सिस्‍टम ने बिगाड़ा खेल, क्‍या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक?

Indore rain
मानसून आधे से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश में कोटे की करीब 65 प्रतिशत ही बारिश रिकॉर्ड हुई है। इनमें भोपाल, शहडोल, रीवा और जबलपुर की तस्वीर बेहतर है, लेकिन इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में पानी कम गिरा है। इनमें भी इंदौर की हालत सबसे ज्‍यादा नाजुक है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मालवा के ऊपर सिस्‍टम इतना ताकतवर बन ही नहीं पा रहा है कि बारिश हो सके। उनका अनुमान है कि इंदौर में तो शेष मानसून में भी बारिश होने की उम्‍मीद नहीं है। इस बार इंदौर सूखा ही रहेगा।

इंदौर में सिर्फ 19 इंच बारिश : मौसम विभाग के अनुसार इंदौर जिले में इस सीजन में अब तक करीब 19.7 इंच पानी गिर चुका है, जो सामान्य औसत से थोड़ा कम है। जबकि इंदौर-उज्जैन संभाग में इस बार मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है और अन्य जिलों (जैसे धार, झाबुआ, बड़वानी) में भी 15 से 20 इंच के बीच ही बारिश दर्ज की गई है। इंदौर में अब तक कुल 19.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो कोटे की 58 प्रतिशत है। पिछले सप्ताह यहां तेज बारिश नहीं हुई। इस कारण सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। संभाग में सबसे ज्यादा बुरहानपुर में 27.2 इंच बारिश हो चुकी है। यहां कोटे की 94 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। आलीराजपुर में सबसे कम पानी गिरा है। अगले सप्ताह तेज बारिश होने के कम आसार है।

भोपाल के मौसम वैज्ञानिक जीडी मिश्रा ने बताया कि मालवा में सिस्‍टम इतना स्‍ट्रांग नहीं बन पा रहा है कि यहां बारिश हो सके। यह सिस्‍टम मालवा में असर नहीं दिखा पा रहा है। आगे भी इंदौर, मालवा के कुछ हिस्‍सों समेत अलीराजपुर और धार जैसे जिलों में बारिश की कोई उम्‍मीद नहीं है। हालांकि मध्‍यप्रदेश में बारिश सामान्‍य है। बस मालवा के जिले कमजोर रहेंगे। यह सिर्फ इसलिए हो रहा है कि सिस्‍टम इतना ताकतवर बन ही नहीं पा रहा है।

एमपी के कम ज्‍यादा बारिश वाले जिले : मध्‍यप्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, डिंडौरी, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ में 1% से 51% तक कम बारिश हुई है।

आगर- मालवा की स्‍थिति : वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 2% से 47% कम पानी गिरा है।

इन 15 जिलों में ज्यादा बारिश : IMD की माने तो अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

सितंबर पर टिकी बारिश की आस : मौसम चक्र के अनुसार इंदौर के लिए अगस्त और सितंबर के महीने सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि वर्षा का मुख्य कोटा इन्हीं दो महीनों में पूरा होता है। सामान्य परिस्थितियों में अगस्त के दौरान 10 से 11 इंच बारिश दर्ज की जाती है और इस दौरान लगभग 12 से 13 दिन वर्षा वाले होते हैं। इस आधार पर देखा जाए तो अगस्त में हुई बारिश औसत से काफी कम है। अब ऐसे में सितंबर महीने से लोग उम्‍मीद कर रहे हैं, हालांकि मौसम वैज्ञानिक जीडी मिश्रा का कहना है कि आगे भी इंदौर और मालवा के कुछ क्षेत्रों में बारिश की संभावना नहीं है। अब बचे मानसून में करीब 20 इंच से अधिक बारिश की सख्त जरूरत है। यदि आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू नहीं होता है, तो वर्षा के निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल साबित हो सकता है।
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