WHO की डरावनी रिपोर्ट : दुनिया की 92% आबादी पर कैंसर का खतरा, जानें पुरुषों-महिलाओं में कौन सा कैंसर है सबसे आम
"क्या आप और आपका परिवार कैंसर की ज़द में हैं? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की लेटेस्ट रिपोर्ट कहती है कि दुनिया की 92% आबादी सीधे या परोक्ष रूप से कैंसर से प्रभावित होने वाली है। यानी या तो आप खुद, या आपके परिवार का कोई बेहद करीबी सदस्य इस जानलेवा बीमारी का शिकार बनेगा। जानिए डब्ल्यूएचओ ने इस वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल पर क्या चेताया है।"
'डाउन टू अर्थ' की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर को लेकर अब तक की सबसे भयानक चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कैंसर अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक तेज़ी से बढ़ता हुआ सामाजिक, स्वास्थ्य और आर्थिक संकट बन चुका है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की लगभग 92 प्रतिशत आबादी अपने जीवनकाल में किसी न किसी रूप में कैंसर के प्रभाव में आएगी।
नोट: बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर (Colorectal Cancer) पुरुषों और महिलाओं दोनों में तीसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर बन चुका है। इसके अलावा, बच्चों में भी यह बोझ बढ़ रहा है, जहां हर साल 19 वर्ष तक के लगभग 4 लाख बच्चे और किशोर इसका शिकार हो रहे हैं।
यदि आप किसी अमीर देश में पैदा हुए हैं, तो आपके बचने की संभावना बहुत ज्यादा है, जबकि गरीब देशों में यह किस्मत के भरोसे है:
व्यक्तिगत स्तर पर सलाह : कैंसर के 40% मामलों को सिर्फ सही खान-पान, एक्सरसाइज, तंबाकू-सिगरेट से दूरी और समय पर स्क्रीनिंग (जैसे 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के लिए पैप स्मीयर और मैमोग्राफी) के ज़रिए रोका जा सकता है।
1. हर 5 में से 1 व्यक्ति को कैंसर : क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़े बेहद डरावने हैं। दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कैंसर की चपेट में आ रहा है।
2. पुरुषों और महिलाओं में सबसे आम कैंसर कौन से हैं?
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जेंडर के आधार पर कौन से कैंसर सबसे ज्यादा पैर पसार रहे हैं:
नोट: बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर (Colorectal Cancer) पुरुषों और महिलाओं दोनों में तीसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर बन चुका है। इसके अलावा, बच्चों में भी यह बोझ बढ़ रहा है, जहां हर साल 19 वर्ष तक के लगभग 4 लाख बच्चे और किशोर इसका शिकार हो रहे हैं।
3. मासूमों पर दोहरी मार : लाखों बच्चे हो रहे अनाथ
कैंसर सिर्फ जान नहीं लेता, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देता है।
4. जेब पर वार : परिवारों को कंगाल बना रहा है इलाज
कैंसर का मानसिक और आर्थिक असर किसी भी परिवार को तोड़कर रख देता है। डब्ल्यूएचओ के सर्वेक्षण में सामने आया कि:- 45% से अधिक लोगों को इलाज के कारण भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।
- महंगे इलाज, दवाओं के खर्च और अस्पताल के चक्करों के कारण लाखों परिवार गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।
- आधे से अधिक मरीजों और उनके तीमारदारों (Caregivers) ने गंभीर मानसिक तनाव, डिप्रेशन और सामाजिक अलगाव की बात स्वीकार की।
5. अमीर और गरीब देशों के बीच 'इलाज की खाई'
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात इलाज में मौजूद असमानता को लेकर कही गई है। दुनिया की 47% आबादी के पास आज भी कैंसर की बुनियादी जांच सुविधाएं नहीं हैं।यदि आप किसी अमीर देश में पैदा हुए हैं, तो आपके बचने की संभावना बहुत ज्यादा है, जबकि गरीब देशों में यह किस्मत के भरोसे है:
2050 का भविष्य: 133% तक बढ़ सकते हैं मामले
डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या 66.7% बढ़कर 3.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इसका सबसे बुरा असर निम्न और मध्यम आय वाले देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) पर पड़ेगा, जहां मामलों में 133% की वृद्धि देखी जा सकती है। इसके पीछे बढ़ती आबादी, बदलती जीवनशैली और प्रदूषण जैसे कारक जिम्मेदार हैं।आगे की राह क्या है?
बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है! डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट कहना है कि कैंसर से लड़ाई केवल महंगी दवाओं या रोबोटिक सर्जरी से नहीं जीती जा सकती। सरकार को हर नागरिक तक सस्ती और समय पर जांच (Early Detection) की सुविधा पहुंचानी होगी।व्यक्तिगत स्तर पर सलाह : कैंसर के 40% मामलों को सिर्फ सही खान-पान, एक्सरसाइज, तंबाकू-सिगरेट से दूरी और समय पर स्क्रीनिंग (जैसे 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के लिए पैप स्मीयर और मैमोग्राफी) के ज़रिए रोका जा सकता है।

