Germany Heatwave Deaths: जून की गर्मी से जर्मनी में 5,100 मौतें, यूरोप में हीटवेव इतनी खतरनाक क्यों?
निखिल रंजन डीपीए
जून के महीने में जर्मनी में पड़ी भारी गर्मी की वजह से करीब 5,100 लोगों की मौत हो गई। आखिर गर्मी का मौसम यूरोपीय देशों को इतना परेशान क्यों कर जाता है? ALSO READ: फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता की सजा घटी लेकिन चुनौतियां नहीं
जून के कुछ हफ्ते जर्मनी समेत कई देशों के लिए बहुत तकलीफदेह रहे। कई शहरों में तापमान 38-40 डिग्री तक पहुंच गया था। अब जर्मनी के रॉबर्ट कॉख इंस्टीट्यूट (आरकेआई) ने जानकारी दी है कि इस दौरान करीब 5,100 लोगों की मौत हो गई। 9 जुलाई को जारी ये आंकड़े गर्मी से होने वाली मौत के हैं जो इंस्टीट्यूट की साप्ताहिक रिपोर्ट का हिस्सा बने हैं। आरकेआई ने कहा है कि यह आंकड़ा 2023 से 2025 के बीच गर्मी से हुए औसतन 2,900 मौतों के आंकड़े को पहले ही पार कर गया है।
इंस्टीट्यूट का आकलन है कि जून में 22-28 तारीख वाले हफ्ते में गर्मी के कारण होने वाली मौत की संख्या 4,310 तक बढ़ गई। इस हफ्ते में जर्मनी ने भारी गर्मी का सामना किया। इस दौरान देश के कई हिस्से में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया था।
अप्रैल से लेकर 21 जून तक की अवधि में आरकेआई का अनुमान है कि करीब 810 लोगों की मौत गर्मी की वजह से हुई थी। हालांकि आरकेआई के प्रवक्ता का कहना है कि इनमें से लगभग सभी लोगों की मौत 15-21 जून के बीच हुई थी। ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है
बुजुर्ग लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरा
गर्मी के कारण जो लोग मरे हैं उनमें ज्यादातर लोग बुजुर्ग हैं। 28 जून तक जिन लोगों की मौत हुई उनमें 2,950 लोग 85 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे। 75-84 साल की उम्र वाले लोगों की संख्या 1,320 जबकी 65-74 साल की उम्र वाले 550 लोग थे। 65 साल से कम उम्र वाले लोग जिनकी गर्मी की वजह से मौत हुई उनकी संख्या लगभग 300 थी।
आरकेआई का कहना है कि गर्मी का कुल मिला कर असर इससे और ज्यादा भी हो सकता है। जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय ने 22-28 जून के बीच 6800 अतिरिक्त लोगों की मौत दर्ज की है। हालांकि दोनों आंकड़े अलग अलग तरीकों से जुटाए गए हैं।
चरम स्थिति का बहुत कुछ लेना देना गर्मी के कारण बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और तैराकी के दौरान हुई दर्जनों लोगों की मौत से भी है। सड़कों के पिघलने से कई हाईवे अस्थाई रूप से बंद करने पड़े, इसी तरह से गर्मी के कारण पहुंचे नुकसान की वजह से रेल सेवा भी कई इलाकों में बाधित हुई। ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर
रिकॉर्डतोड़ तापमान
जर्मन मौसम सेवा (डीडब्ल्यूडी) के मुताबिक जून, 2026 रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से दूसरा सबसे गर्म महीना था। इसके पहले इतनी गर्मी 2019 में पड़ी थी। जून के आखिरी हफ्तों में गर्म हवाओं के कारण तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के ऊपर चला गया। 46 मौसम स्टेशनों ने 27 जून को 40 डिग्री से ऊपर तापमान दर्ज किया। आरकेआई गर्मी से होने वाली मौत का पता लगाने के लिए सांख्यिकीय मॉडल का सहारा लेती है क्योंकि मौत की वजह के रूप में गर्मी को दर्ज नहीं किया जाता है। खासतौर से जबकि यह पहले से मौजूद स्वास्थ्य की स्थिति को बिगाड़ रही हो।
आरकेआई का कहना है, "लू लगने जैसे कुछ मामलों में अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने पर सीधे मौत हो जाती है।" ज्यादातर मामलों में गर्मी से होने वाली मौत के पीछे पहले से मौजूद बीमारी का बुरे हाल में पहुंचना होता है। इसका मतलब है कि इस तरह की मौत की वजह में गर्मी को दर्ज नहीं किया जाता है। इंस्टीट्यूट ने यह भी कहा है कि अप्रैल से 28 जून तक की अवधि में अनिश्चितता काफी ज्यादा है। गर्मी से जुड़ी मौत की घटनाएं 4,410 से लेकर 5,850 तक के बीच हैं। ALSO READ: भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी
यूरोप में गर्मी की समस्या
यूरोप के बाहर रहने वाले लोग अकसर इस बात से हैरान होते हैं कि 30 डिग्री से ऊपर के तापमान में ही यूरोपीय देश हलकान हो जाते हैं। जबकि अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में लोग 40 से ऊपर का तापमान भी सहन कर लेते हैं। यूरोपीय लोगों के परेशान होने की कई वजहे हैं।
पारंपरिक रूप से ठंडा रहे इस इलाके में गर्मी के दिन काफी लंबे होते हैं, लगभग 16 घंटे या फिर उससे भी ज्यादा। ऐसे में ज्यादा देर तक उन्हें सूरज की गर्मी झेलनी पड़ती है। तापमान कम रहे तो यह बुरा नहीं लगता लेकिन तापमान बढ़ जाए तो फिर आफत आ जाती है। दूसरे ज्यादातर समय ठंड रहने की वजह से यहां के घर, दफ्तर, गाड़ियां सब सर्दी के अनुकूल बनाए गए हैं। ऐसे में जब तापमान बढ़ता है तो उन घरों में रहना बड़ी मुसीबत बन जाती है। ज्यादातर इमारतों में एसी तो छोड़िए कूलर या पंखा तक नहीं है।
अत्यधिक गर्मी के दिन यहां होते नहीं तो उसकी तैयारी भी नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण अब जब ऐसे दिनों की संख्या बढ़ रही है तो उसके साथ संकट भी बढ़ रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं बढ़ती गर्मी के कारण यूरोप के जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, इसकी वजह से भी लोग मुश्किलों में हैं।
एक और वजह यह है कि ज्यादातर यूरोपीय देशों में बुजुर्ग लोगों की आबादी ज्यादा है। जिन लोगों ने पूरे जीवन कभी गर्मी को नहीं झेला जब उनका सामना इससे होता है तो उनकी हालत बिगड़ जाती है।

