पेरिस में बना यूरोप का सबसे बड़ा अक्षरधाम मंदिर
Paris Akshardham Temple: फ्रांस की राजधानी पेरिस अपने अनगिनत आकर्षणों के लिए पहले से ही बहुत प्रसिद्ध है। इस प्रसिद्धि में अब एक ऐसा नया आकर्षण जुड़ गया है, जिसका सीधा संबंध भारत के सनातन धर्म व संस्कृति से है।
यह आकर्षण है, पेरिस के बुसी साँ जॉर्ज नाम की जगह पर बना BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर, जिसका 6 सितंबर को वैदिक परंपराओं और पूर्ण विधि-विधान वाली प्राण-प्रतिष्ठा के साथ भव्य उद्घाटन हुआ। सवा सौ संत और हज़ारों श्रद्धालु इस पुण्य अवसर के साक्षी बने।
एक वीडियो संदेश द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर की महत्ता को रेखांकित किया। बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह मंदिर भारत और फ्रांस के बीच के सांस्कृतिक संबंधों का एक नया युग-स्तंभ है...इस लोकार्पण का मंच, वसुधैव कुटुंबकम के भाव का जीवंत मंच बन गया है। हमारे मानवीय मूल्य पूरे यूरोप में गूँजेंगे।
पेरिस में पहला हिंदू मंदिर
पारंपरिक हिंदू वास्तुकला के सिद्धांतों के अनुसार विशेष रूप से निर्मित पेरिस में यह पहला हिंदू मंदिर है। मंदिर के उद्घाटन समारोह में देश-विदेश से पहुंचे संत-महंत और हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। यह मंदिर करीब पांच हजार वर्ग मीटर के दायरे में फैला है। वह अपने आप में भारत की प्राचीन शिल्प कला और फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग का संगम है।
मंदिर के निर्माण में भारत में ग्वालियर के बलुआ पत्थरों के साथ-साथ वियतनाम, ग्रीस और इटली के विशिष्ट पत्थरों का उपयोग हुआ है। उन्हें तराशा और मोहक नक्काशियों से सजाया-संवारा गया है। देवी-देवताओं का रूप दिया गया है।
दर्शकों की उमड़ी भीड़
प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में, पेरिस की "सेन" नदी के दोनों किनारों पर खड़े अनगिनत फ्रंसीसी और विदेशी दर्शकों के जमघट के बीच रंगबिरंगी भव्य बोट-यात्रा, शहर की सड़कों पर नाच-गानों के साथ पालकी-यात्रा और वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया। पेरिसवासियों ने अपनी सड़कों और "सेन" नदी पर ऐसा रंगीला दृश्य पहले कभी नहीं देखा होगा।
इन अनुष्ठानों और समारोहों में फ्रांस में रहने वाले भारतीय ही नहीं, यूरोप के अन्य देशों से आए भारतीय स्त्री-पुरुष और बच्चे भी बड़ी संख्या में भाग लेते दिखे। साथ ही दुनिया के अन्य प्रमुख देशों में बने प्राचीन और समकालीन हिंदू मंदिरों के इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया।
सबके लिए निःशुल्क प्रवेश
पेरिस में बने स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में प्रवेश जाति, धर्म या किसी भी भेदभाव के बिना सबके लिए निःशुल्क है। लेकिन, आगंतुकों को—चाहे वे किसी भी धर्म और लिंग के हों—अपने कंधे और घुटने ढंके रखने होंगे। मंदिर के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। मंदिर के विभिन्न अनुभागों में प्रवेश करने से पहले अपने जूते-चप्पल उतारकर निर्धारित जगहों पर रखने होंगे हैं; हालाँकि, मोज़े पहने रहने की अनुमति है।
पेरिस में बने इस भव्य मंदिर का संचालन जिस BAPS स्वामीनारायण संस्था के हाथों में है,वह एक अंतरराष्ट्रीय सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संस्था है। मंदिर, भगवान स्वामीनारायण और हिंदू परंपरा के अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित है। तब भी, वह केवल धार्मिक पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है: उसे हिंदू संस्कृति को जानने-समझने के एक ऐसे पवित्र स्थान के तौर पर भी बनाया गया है, जो सभी धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोगों के लिए खुला रहेगा। मंदिर में सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रम भी होंगे।
यूरोप महाद्वीप पर बना सबसे बड़ा हिंदू मंदिर
इस तरह के मंदिर पेरिस से पहले अमेरिका, ब्रिटेन, अफ्रीका, मध्यपूर्व और हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र के कई देशों में बन चुके हैं। पेरिस का यह स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर, पूरे यूरोप महाद्वीप के किसी भी देश में बना सबसे बड़ा हिंदू मंदिर बताया जा रहा है। इस बीच यूरोप के कई देशों में हिंदू मंदिर हैं, पर वे पेरिस वाले इस नए मंदिर जितने बड़े और भव्य नहीं हैं। फ्रांस में रहने वाले भारतीयों की संख्या बहुत अधिक नहीं है; अनुमानत: केवल 1,19,000 है।
अक्षरधाम शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: "अक्षर" का अर्थ है "शाश्वत" और "धाम" का अर्थ है "निवास"। कुल मिलाकर इसका अर्थ शाश्वत मूल्यों, गुणों और सिद्धांतों का निवास है, जिनका उल्लेख हिंदू पौराणिक कथाओं के वेदों और पुराणों में किया गया है। पेरिस के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के लिए ज़मीन 2017 में ली गई। मंदिर के निर्माण का कार्य 2021 में आरंभ हुआ। पाँच वर्ष बाद 2026 में अब यह मंदिर पेरिस के आइफ़ल टॉवर जैसा ही एक नया और बड़ा आकर्षण बनने जा रहा है।

