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Pradosh Vrat के 13 फायदे कौन से हैं?

Pradosh Vrat
हर माह दो प्रदोष व्रत आते हैं। कृष्‍ण पक्ष का और शुक्ल पक्ष का। हर प्रदोष का अलग महत्व और नाम है। जिस तरह एकादशी का व्रत रखा जाता है जिसमें श्री हरि विष्णु की पूजा का खास महत्व होता है। उसी तरह प्रदोष का व्रत रखा जाता है जिसमें भगवान शिव की पूजा का खास महत्व होता है। आओ जानते हैं कि प्रदोष व्रत रखने के 13 फायदे।
 
1. चंद्र दोष होता समाप्त : प्रदोष का व्रत करने से कुंडली में स्थित चंद्र दोष समाप्त हो जाता है। प्रदोष रखने से आपका चंद्र ठीक होता है। अर्थात शरीर में चंद्र तत्व में सुधार होता है। माना जाता है कि चंद्र के सुधार होने से शुक्र भी सुधरता है और शुक्र से सुधरने से बुध भी सुधर जाता है।
 
2. रविवार : जो प्रदोष रविवार के दिन पड़ता है उसे भानुप्रदोष या रवि प्रदोष कहते हैं। इस दिन नियम पूर्वक व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और लंबी आयु प्राप्त होती है। रवि प्रदोष का संबंध सीधा सूर्य से होता है। अत: चंद्रमा के साथ सूर्य भी आपके जीवन में सक्रिय रहता है। यह सूर्य से संबंधित होने के कारण नाम, यश और सम्मान भी दिलाता है। अगर आपकी कुंडली में अपयश के योग हो तो यह प्रदोष करें। रवि प्रदोष रखने से सूर्य संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती है।
 
3. सोमवार : सोमवार को त्रयोदशी तिथि आने पर इसे सोम प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से इच्छा अनुसार फल प्राप्ति होती है। जिसका चंद्र खराब असर दे रहा है उनको तो यह प्रदोष जरूर नियम ‍पूर्वक रखना चाहिए जिससे जीवन में शांति बनी रहेगी। अक्सर लोग संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं।
 
4. मंगलवार : मंगलवार को आने वाले इस प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं। इस दिन स्वास्थ्य सबंधी तरह की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन प्रदोष व्रत विधिपूर्वक रखने से कर्ज से छुटकारा मिल जाता है।
5. बुधवार : इस दिन को आने वाले प्रदोष को सौम्यवारा प्रदोष भी कहा जाता है यह शिक्षा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए किया जाता है। साथ ही यह जिस भी तरह की मनोकामना लेकर किया जाए उसे भी पूर्ण करता है। यदि आपमें ईष्‍ट प्राप्ति की इच्‍छा है तो यह प्रदोष जरूर रखें।
 
6. गुरुवार : इस गुरुवारा प्रदोष कहते हैं। इससे आपक बृहस्पति ग्रह शुभ प्रभाव तो देता ही है साथ ही इसे करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। अक्सर यह प्रदोष शत्रु एवं खतरों के विनाश के लिए किया जाता है। यह हर तर की सफलता के लिए भी रखा जाता है।
 
7. शुक्रवार : इसे भ्रुगुवारा प्रदोष कहा जाता है। जीवन में सौभाग्य की वृद्धि हेतु यह प्रदोष किया जाता है। सौभाग्य है तो धन और संपदा स्वत: ही मिल जाती है। इससे जीवन में हर कार्य में सफलता भी मिलती है।
 
8. शनिवार : शनि प्रदोष से पुत्र की प्राप्ति होती है। अक्सर लोग इसे हर तरह की मनोकामना के लिए और नौकरी में पदोन्नति की प्राप्ति के लिए करते हैं।
 
9. दूर होता शनि दोष : प्रदोष का व्रत करते रहने से शनि दोष भी समाप्त हो जाता है। शनि की साढ़े साती और ढैया से व्यक्ति परेशान नहीं होता है।
 
10. शिवजी का आशीर्वाद: प्रददोष का व्रत करने से शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।
 
11. मानसिक बैचेनी दूर होती है: प्रदोष का व्रत करने से मानसिक बैचेनी खत्म होती है।
 
12. डर और घबराहट दूर होती है: लगातार प्रदोष का व्रत रखने से मन में चल रही घबराहट और डर का भाव दूर होता है।
 
13. धन समृद्धि बढ़ती है : प्रदोष का व्रत रखने से चंद्र दोष दूर होता है, जिसके चलते शुक्र मजबूत बनता है। यह दोनों ही ग्रह घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि को बढ़ाते हैं। 
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