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गणेश चतुर्थी का पर्व कब है, 14 या 15 सितंबर, सही तिथि जानिए

lord ganesh Ganesh Utsav
Ganesh chaturthi kab hai 2026 mein:  सनातन परंपरा में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसी पावन तिथि पर बुद्धि, सिद्धि और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। वर्ष 2026 में गणेश उत्सव को लेकर लोगों के मन में तिथि और स्थापना के दिन को लेकर थोड़ा संशय बना हुआ है कि यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा या 15 सितंबर को। आइए पंचांगीय गणना के अनुसार इसकी सही तिथि और शुभ मुहूर्त को विस्तार से समझते हैं।
 

गणेश चतुर्थी की सही तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 14 सितंबर 2026 को सुबह 05:22 बजे हो रहा है। यह तिथि 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:14 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, गणपति स्थापना और मध्याह्न काल की पूजा उदया तिथि और दोपहर के मुहूर्त के आधार पर की जाती है। चूंकि 14 सितंबर को सुबह से ही चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी और मध्याह्न व्यापिनी मुहूर्त प्राप्त होगा, इसलिए गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व और प्रतिमा स्थापना 14 सितंबर 2026 को ही की जाएगी।

वर्ष 2026 के गणेश उत्सव की खास बातें

आराधना का 12 दिनों का दुर्लभ अवसर:

धार्मिक दृष्टि से गणेश उत्सव मुख्य रूप से 10 तिथियों का होता है, जो चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। लेकिन वर्ष 2026 में पंचांग की घट-बढ़ के कारण कैलेंडर के हिसाब से 14 सितंबर (गणपति स्थापना) से लेकर 25 सितंबर (अनंत चतुर्दशी विसर्जन) तक कुल 12 दिनों का अद्भुत अवसर मिल रहा है। भक्तों को इस बार पूरे 12 दिनों तक बप्पा की सेवा, पूजा-अर्चना और प्रिय मोदक का भोग लगाने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
 

9 वर्षों बाद बना ऐसा पंचांगीय संयोग:

पंचांगीय गणना के अनुसार लगभग नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद तिथियों का ऐसा दुर्लभ मेल बन रहा है। तृतीया से अनंत चतुर्दशी तक तिथियों के इस विशेष गणितीय योग के कारण यह उत्सव आध्यात्मिक रूप से अत्यधिक फलदायी माना जा रहा है।

सोमवार का अत्यंत शुभ संयोग:

इस वर्ष गणेश चतुर्थी का शुभारंभ सोमवार के दिन हो रहा है। सोमवार का दिन भगवान श्री गणेश के पिता देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है। पिता और पुत्र के इस दिव्य और अद्भुत संयोग से इस बार का गणेशोत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष समृद्धि, सुख और मनोवांछित फल देने वाला रहेगा।
 
संक्षेप में कहें तो, 14 सितंबर 2026 को ही मंगलमूर्ति श्री गणेश का आगमन होगा और उसी दिन विधि-विधान से घट व मूर्ति स्थापना की जाएगी, जिसके बाद 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को भावपूर्ण विदाई दी जाएगी।
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