Ganesh chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी उत्सव में 10 दिनों तक करें 10 भोग अर्पित
गणेशोत्सव के दौरान गणपति बाप्पा को प्रतिदिन उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग लगाने से विशेष कृपा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक बाप्पा को अर्पित किए जाने वाले 10 पारंपरिक भोग। हालांकि इस वर्ष 2026 में 10 नहीं 12 दिनों का उत्सव रहेगा। 14 सितंबर से प्रारंभ होकर 25 सितंबर 2026 तक यह उत्सव मनाया जाएगा।
प्रथम दिन (गणेश चतुर्थी): मोदक (उकडीचे मोदक/मावा मोदक)
भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग मोदक है। प्रथम दिन चावल के आटे या मावा के मोदक अर्पित करने से गणपति अति प्रसन्न होते हैं।
दूसरा दिन: मोतीचूर के लड्डू
बूंदी या मोतीचूर के लड्डू बाप्पा को बेहद प्रिय हैं। माना जाता है कि लड्डू का भोग लगाने से जीवन में मिठास और खुशहाली आती है।
तीसरा दिन: बेसन के लड्डू
शुद्ध देसी घी में बने बेसन के लड्डू बाप्पा को अर्पित करें। यह भोग धन-धान्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
चौथा दिन: मावा पेड़ा
केसर और इलायची युक्त दूध/मावा के पेड़े का भोग गणेश जी की कृपा से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि कराता है।
पांचवां दिन: पूरण पोली
महाराष्ट्र का यह प्रसिद्ध व्यंजन चने की दाल और गुड़ से तैयार किया जाता है। इसका भोग लगाने से परिवार में मिठास और तालमेल बना रहता है।
छठा दिन: नारियल के लड्डू (कोकोनट लड्डू)
ताजे नारियल या सूखे नारियल से बने लड्डू बाप्पा को चढ़ाएं। यह भोग स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्रदान करता है।
सातवां दिन: शीरा / हलवा (रवा हलवा)
सूजी, घी और dry fruits से बना हलवा (शीरा) बाप्पा को अर्पित करने से घर में खुशहाली और सुख-शांति आती है।
आठवां दिन: मखाना या चावल की खीर
दूध, मखाने या चावल और ड्राई फ्रूट्स से बनी खीर का भोग बाप्पा को अति प्रिय है। इससे भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है।
नौवां दिन: मालपुआ
आटे या मैदा और रबड़ी/चाशनी से बने मालपुए का भोग लगाने से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
दसवां दिन (अनंत चतुर्दशी): छप्पन भोग या पंचामृत व मोदक
विसर्जन के दिन बाप्पा को विदाई देते समय पंचामृत, विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और पसंदीदा मोदक का भव्य भोग अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
ग्याहर और बारहवें दिन आप अपनी मन पसंद का भोग लगाएं। भोग लगाते समय उसमें दूर्वा (दूब घास) अवश्य रखें, क्योंकि बिना दूर्वा के गणपति बाप्पा का भोग अधूरा माना जाता है। ध्यान रहें कि तुलसी न रखें।

