सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता
यह रही सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता:
सावन की सरगम
जब सावन की पहली बूंदें,
धरती का आंचल छू जाती हैं।
सूखी डालों पर हरियाली,
जीवन की धुन गुनगुनाती हैं।
काले-काले मेघ घिर आए,
रिमझिम वर्षा गीत सुनाए।
मोर पंख फैलाकर नाचे,
प्रकृति खुशियों के दीप जलाए।
शिवालय में गूंजे "हर-हर",
बजे घंटियों की मधुर पुकार।
बेलपत्र, गंगाजल लेकर,
भक्त करें भोले का श्रृंगार।
सावन केवल ऋतु नहीं है,
श्रद्धा का यह पावन द्वार।
मन में प्रेम, हृदय में सेवा,
यही है इसका सच्चा सार।
झूले पड़ते पीपल डाली,
कजरी गाती हर इक नारी।
मिट्टी की सौंधी-सी खुशबू,
भर देती है दुनिया सारी।
हरियाली का संदेश लिए,
सावन खुशियों का उपहार।
प्रेम, दया, विश्वास जगाए,
जीवन हो उज्ज्वल हर बार।
आओ मिलकर प्रण यह लें हम,
पेड़ लगाएँ, प्रकृति सँवारें।
भोलेनाथ का नाम जपें हम,
प्रेम और सद्भाव निखारें।
सावन आया, सुख बरसाया,
मन-मंदिर में दीप जलाए।
हर घर में मंगल ही मंगल,
शिव कृपा से जीवन मुस्काए।
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