1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. Poem on the month of Sawan

सावन मास पर हिन्दी में बेहतरीन कविता

sawan maas par kavita
सावन के पावन महीने, शिव भक्ति और प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को समेटती एक विशेष कविता जो सावन के दोनों रूपों को दर्शाती है-पहला, जब बारिश की बूंदें सूखी धरती को हरा-भरा कर देती हैं और चारों तरफ लोकगीतों की गूंज होती है; और दूसरा, जब कांवड़िए और शिवभक्त महादेव की आराधना में लीन होकर पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना देते हैं।
 
रिमझिम बरसा सावन आया
लो रिमझिम बरसा सावन आया,
धरती पर हरी चुनरिया लाया।
तपती धूप का अंत हुआ अब,
अंबर ने ठंडी बूंदों को बरसाया।
 
बागों में देखो झूले सज गए,
कजरी और मल्हार के सुर जग गए।
मेहंदी रची हथेलियों ने शर्माकर,
खुशियों के नए गीत गुनगुनाया।
 
कंठ में विष, जटा में गंगा,
भोले की भक्ति में डूबा जग सारा।
कांवड़ियों ने थामी है राहें,
गूंज उठा 'बम-बम' का जयकारा।
 
पीपल चूमे बूंदों की बौछारें,
नदियां गातीं कल-कल के तराने।
प्रकृति का यह रूप सलोना,
हर मन को शिवमय करने आया।
 
लो रिमझिम बरसा सावन आया,
भक्ति और हरियाली का उत्सव लाया।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
 
अगला लेख
Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध