सावन मास पर हिन्दी में बेहतरीन कविता
सावन के पावन महीने, शिव भक्ति और प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को समेटती एक विशेष कविता जो सावन के दोनों रूपों को दर्शाती है-पहला, जब बारिश की बूंदें सूखी धरती को हरा-भरा कर देती हैं और चारों तरफ लोकगीतों की गूंज होती है; और दूसरा, जब कांवड़िए और शिवभक्त महादेव की आराधना में लीन होकर पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना देते हैं।
रिमझिम बरसा सावन आया
लो रिमझिम बरसा सावन आया,
धरती पर हरी चुनरिया लाया।
तपती धूप का अंत हुआ अब,
अंबर ने ठंडी बूंदों को बरसाया।
बागों में देखो झूले सज गए,
कजरी और मल्हार के सुर जग गए।
मेहंदी रची हथेलियों ने शर्माकर,
खुशियों के नए गीत गुनगुनाया।
कंठ में विष, जटा में गंगा,
भोले की भक्ति में डूबा जग सारा।
कांवड़ियों ने थामी है राहें,
गूंज उठा 'बम-बम' का जयकारा।
पीपल चूमे बूंदों की बौछारें,
नदियां गातीं कल-कल के तराने।
प्रकृति का यह रूप सलोना,
हर मन को शिवमय करने आया।
लो रिमझिम बरसा सावन आया,
भक्ति और हरियाली का उत्सव लाया।
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